'बॉर्डर' के असली नायक ब्रिगेडियर कुलदीप चांदपुरी का निधन

  • 17 नवंबर 2018
कुलदीप चांदपुरी और सनी देओल इमेज कॉपीरइट FB/ KULDEEP CAHNDPURI
Image caption बॉर्डर फ़िल्म के हीरो सनी देओल के साथ कुलदीप सिंह चांदपुरी

भारतीय सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का देहांत हो गया है. ब्रिगेडियर चांदपुरी 78 साल के थे और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार मोहाली के फ़ोर्टिस अस्पताल में शनिवार सुबह नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में राजस्थान के लोंगेवाला मोर्चे पर हुई लड़ाई का उन्हें हीरो माना जाता है. भारतीय फ़ौज में शानदार सेवाओं के लिए उन्हें महावीर चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से नवाज़ा गया था.

ब्रिगेडियर चांदपुरी और उनके साथियों की लोंगेवाला मोर्चे पर दिखाई बहादुरी पर बॉलीवुड फ़िल्म 'बॉर्डर' बनाई गई थी. इस फ़िल्म में तत्कालीन मेजर कुलदीप चांदपुरी की भूमिका अभिनेता सनी देओल ने निभाई थी.

इस लड़ाई में चांदपुरी लोंगेवाला पोस्ट पर तैनात थे. सीमा पर पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजिमेंट थी और चांदपुरी की कमांड में सिर्फ़ 120 जवान थे.

उनकी रेजिमेंट पंजाब रेजिमेंट थी जिसमें अधिकतर जवान सिख थे और कुछ डोगरा फ़ौजी भी थे.

बॉर्डर फ़िल्म के बारे में ब्रिगेडियर चांदपुरी ने कुछ समय पहले एक ख़ास मुलाक़ात के दौरान बीबीसी पंजाबी सेवा के पत्रकार सरबजीत धालीवाल को युद्ध और बॉर्डर फ़िल्म पर अपने विचार ज़ाहिर किए थे.

Image caption कुलदीप सिंह चांदपुरी

पढ़ें, कुलदीप चांदपुरी न क्या कहा था

फ़िल्म बॉर्डर में फ़ौज या वायु सेना के बारे में जो भी सीन दिखाए गए हैं. वह सारे सरकार की ओर से क्लियर किए गए थे.

बाकी डांस के सीन वग़ैराह तो न तो असल में वहां लड़ाई में होता है न कभी हुआ है. पर यह फ़िल्म में जो नाच के सीन सबने देखे वह सच नहीं थे.

लड़ाई 1971 को तीन दिसंबर शाम को शुरू हुई थी. उसमें 60 के क़रीब पाकिस्तान के टैंक आए थे जिनके साथ क़रीब तीन हज़ार जवान थे. उन्होंने क़रीब आधी रात को लोंगेवाला पर घेरा डाल दिया था.

मौत से हर कोई डरता है

जहां तक बाक़ी फ़ौज के आने का सवाल था. बाक़ी फ़ौज का सबसे क़रीबी बंदा मेरे से 17-18 किलोमीटर दूर था.

जब हम घिर गए तो मेरी पंजाब रेजिमेंट की कंपनी को एक आदेश था कि लोंगेवाला एक अहम पोस्ट है जिसके लिए आपको आख़िरी बंदे तक लड़ना होगा. हर हालत में उसे कब्ज़े में रखना होगा.

मैं बहुत आभारी हूं अपने जवानों का. उन्होंने बहुत बहादुरी दिखाई. हमने फ़ैसला किया कि हम यहीं लड़ेंगे और लड़कर मारेंगे.

लड़ाई तो जो होनी थी वो हुई पर एक बात ज़रूर बताना चाहूंगा कि मौत से हर बंदा डरता है, बड़े-बड़े योद्धा डरते हैं. मैं भी डरता हूं. बाक़ी सब भी डरते हैं.

ख़ुद लड़कर मरना कोई मुश्किल काम नहीं है पर अपने साथ बाकियों को खड़े करना और कहना कि आप भी मेरे साथ लड़ो और मरो यह बेहद मुश्किल काम है.

इमेज कॉपीरइट Kuldeep Chandpuri-FB
Image caption ब्रिगेडियर कुलदीप चांदपुरी को महावीर चक्र से नवाज़ा गया था

जवानों में मरने का जज़्बा कैसे भरा?

मौत तो हमें यक़ीनन नज़र आ रही थी. जब 40-50 टैंक आपको घेर लें और हर टैंक में मशीनगन लगी हो और दो किलोमीटर तक उसकी मार हो तो उस दायरे से बचकर निकलना बेहद मुश्किल है.

मेरे लिए ऐसे हालात में फ़ैसला लेना बेहद मुश्किल था. मैं पोस्ट छोड़कर भाग नहीं सकता था क्योंकि मेरा धर्म इसकी इजाज़त नहीं देता था और न ही मुझे ऐसा टास्क मिला था कि जब पाकिस्तान की फ़ौज आए तो आप बोरिया-बिस्तर उठाकर घर भाग जाओ.

दूसरा यह था कि वहां लड़ना है और लड़ने के लिए मैं बिलकुल तैयार था मेरे जवान बिलकुल तैयार थे. मैंने उनको प्रेरित किया. वे भी ख़ुद को टैंकों से घिरे हुए देख रहे थे. मैंने उन्हें गुरु गोबिंद सिंह और उनके बेटों की शहादत की मिसालें दीं और कहा कि अगर हम युद्ध छोड़कर भागेंगे तो यह पूरी सिख कौम पर कलंक होगा.

मेरे जवानों ने लड़ाई का फ़ैसला मेरे ऊपर छोड़ दिया था और मैंने उनसे कहा कि अगर मैं पोस्ट से पैर हटाता हूं तो आप 120 के 120 जवान मुझे गोलियां मार देना.

ब्रिगेडियर चांदपुरी की पृष्ठभूमि

ब्रिगेडियर चांदपुरी का जन्म 22 नवंबर 1940 को मौजूदा पाकिस्तान के मिंट गुमरी में हुआ था. 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उनका परिवार पंजाब के नवाशहर ज़िले के क़स्बे बलाचौर के गांव चांदपुर में आकर बस गया.

कुलदीप चांदपुरी ने अपनी पढ़ाई सरकारी कॉलेज होशियारपुर से की. वह 1962 में भारतीय फ़ौज की पंजाब रेजिमेंट में बतौर लेफ़्टिनेंट भर्ती हुए थे.

उन्होंने भारत के लिए 1965 और 1971 की लड़ाई में अपनी बहादुरी का जौहर दिखाया. ब्रिगेडियर चांदपुरी ने संयुक्त राष्ट्र की इमर्जेंसी सेवाओं में भी एक साल की सेवा दी.

ब्रिगेडियर चांदपुरी और उनके साथियों की लोंगेवाला मोर्चे पर दिखाई बहादुरी पर बॉलिवुड फ़िल्म बॉर्डर बनाई गई थी. इस फ़िल्म में तत्कालीन मेजर कुलदीप चांदपुरी की भूमिका अभिनेता सनी देओल ने निभाई थी.

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