छत्तीसगढ़ की नई राजधानी के लिए ज़मीन देनेवाला किसान बेहाल

  • 18 नवंबर 2018
रुपन चंद्राकर इमेज कॉपीरइट Aolk Putul/BBC
Image caption रुपन चंद्राकर

परसदा गांव के रहने वाले 65 साल के किसान रुपन चंद्राकर को आप दूर से ही पहचान सकते हैं. रुपन चंद्राकर अपने सिर पर हमेशा एक कफ़न की पगड़ी पहने रहते हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में 22 सालों से भी अधिक समय तक सक्रिय रहे रुपन चंद्राकर ने चार साल पहले किसानों के हक़ के लिये सिर पर कफ़न बांधा था, जो अब उनके पहनावे का हिस्सा हो गया है.

उनका दावा है कि इस कफ़न के कारण उन्हें लगातार लड़ते रहने की प्रेरणा मिलती है और अब किसी से डर नहीं लगता.

रुपन चंद्राकर कहते हैं, "राज्य में भी हमारी सरकार है और केंद्र में भी. लेकिन कहीं किसानों की सुनवाई नहीं हुई. छत्तीसगढ़ में किसान को बाध्य किया जा रहा है कि वह हथियार उठा ले, माओवादी बन जाए. लेकिन हम जैसे लोग, जिनकी आस्था हिंसा में नहीं है, उन्होंने लोकतांत्रिक तरीक़े से लड़ने का ज़िम्मा लिया है."

रुपन चंद्राकर रायपुर के उन हज़ारों किसानों के नेता हैं, जो सरकारी उदासीनता के शिकार हैं. आसपास के गांवों के किसान मानते हैं कि रुपन चंद्राकर ही हैं, जो किसानों की हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं.

रुपन चंद्राकर कहते हैं, "हमने तो गांव की समस्या को लेकर इस बार विधानसभा चुनाव के बहिष्कार करने की सोची थी. आख़िर बदहाल और परेशान किसान क्यों वोट करे? किसानों और ग़रीबों की हालत देखनी है तो राज्य सरकार की नई राजधानी और हमारे गांव की हालत आपको देखनी चाहिए."

चंद्राकर के दावे में अतिशयोक्ति भी नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul/BBC

नई राजधानी- अटल नगर

छत्तीसगढ़ की नई राजधानी, नया रायपुर का नाम अब अटल नगर है.

चमचमाती हुई सड़कें, हज़ारों मकान, जंगल सफ़ारी, कॉलेज, बॉटेनिकल गार्डन, सेंट्रल पार्क, स्टेडियम, भव्य सरकारी इमारतें और रात में भी दिन जैसी रोशनी वाले इस अटल नगर पर अब तक 10 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की रक़म खर्च की जा चुकी है और लगभग 20 हज़ार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

तीन चरणों में बन रही 237.42 वर्ग किलोमीटर में फैली इस नई राजधानी में चमचमाती सड़कों पर फ़र्राटे भरती सरकारी अफ़सरों और नेताओं की गाड़ियों की आवाजाही दिन भर बनी रहती है.

देश और दुनिया के दूसरे हिस्सों से आने वाले लोगों को इस नई राजधानी को जूरुर दिखाया जाता है.

लेकिन शाम होते ही मंत्रालय से लेकर सैकड़ों दूसरे सरकारी कार्यालयों के विशालकाय इमारतों में सन्नाटा पसर जाता है. सूरज जैसे ही डूबता है, पिछल कई सालों से खाली पड़े राज्य सरकार की हाउसिंग बोर्ड के हज़ारों मकानों का सूनापन और बढ़ जाता है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul/BBC

विकास का वादे

साल 2008 से बन रहे इस अत्याधुनिक शहर को बसाने के लिये 41 गांवों की ज़मीन अधिग्रहित की गई.

कुछ किसानों से सरकार ने कौड़ियों के भाव ज़मीनें ख़रीदीं और जिन्होंने ज़मीन देने से मना किया, उनके ख़िलाफ़ आपातकालीन अधिकारों का उपयोग करके ज़मीनों पर कब्ज़ा किया गया.

लोगों को आश्वस्त किया गया कि उनका शानदार विस्थापन होगा. आसपास के गांवों को भी विकसित किया जाएगा.

गांवों में स्कूल और अस्पताल खुलेंगे. दो लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिलेगा.

लेकिन हक़ीक़त ऐसी नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul/BBC

नई राजधानी में...

इस नई राजधानी में सौ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम परसदा गांव की ज़मीन पर बनाया गया है.

भारत के दूसरे और दुनिया के इस चौंथे नंबर के सबसे विशाल स्टेडियम में 65 हज़ार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है.

इस स्टेडियम तक पहुंचने वाली सड़कें रात में भी चमचमाती रहती हैं. लेकिन सिक्स लेन और फ़ोर लेन वाली सड़कें इस स्टेडियम के पास पहुंच कर दम तोड़ देती हैं.

स्टेडियम से अगर आपको परसदा गांव जाना हो तो दोनों तरफ जानलेवा गड्ढों से भरी एक पतली-सी सड़क आपको मिलेगी.

साढ़े पांच हज़ार की आबादी वाले परसदा गांव की ओर जाने वाली महज़ आठ फुट चौड़ी तारकोल की यह सड़क गांव तक पहुंच कर ख़त्म हो जाती है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul/BBC

सरकार का पक्ष

गांव की गलियों के बीचों-बीच नाली का पानी बहता रहता है. इन्हीं नालियों के बीच खड़े एक नौजवान ने हमसे कहा, "सरकार के आदमी हो तो भाग जाओ."

गांव के दूसरे लोगों ने बताया कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है.

लेकिन गांव के जिन लोगों की मानसिक स्थिति ठीक है, वे भी सरकार और सरकारी लोगों को लेकर बहुत अच्छी राय नहीं रखते हैं.

हालांकि राज्य के लोक निर्माण, आवास एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री राजेश मूणत का कहना है कि सरकार ने किसानों का पूरा ध्यान रखा है.

वे कहते हैं, "किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा."

मुकदमा और तारीख़ पर तारीख़

नई राजधानी बनाने के नाम पर किसानों को कई सपने दिखाये गये थे. लेकिन अधिकांश सपने ही रह गये. जब किसानों को पुनर्वास का लाभ नहीं मिला तो छह हज़ार से अधिक किसानों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामले दायर किये.

अकेले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ऐसे मुक़दमों की संख्या 97 से अधिक है और इनमें से कई मामले पिछले 10 सालों से लंबित है, जिन पर सुनवाई तो नहीं होती, बस तारीख़ पर तारीख़ मिलती जाती है.

इन तारीख़ों से परेशान किसानों को जब कुछ नहीं सूझा तो इस साल मई की भीषण गर्मी में हज़ारों की संख्या में नया रायपुर से प्रभावित किसान चार दिन की पदयात्रा करके 112 किलोमीटर दूर बिलासपुर हाईकोर्ट जा पहुंचे.

हाईकोर्ट के अधिकारियों और जजों से चर्चा हुई और उन्हें आश्वस्त किया गया कि मामले की सुनवाई जल्दी होगी. लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई.

विधानसभा चुनाव प्रचार के लिये गांव पहुंचे राजनीतिक दलों के नेता दबे मुंह यह तो कहते हैं कि किसानों की समस्या दूर कर दी जाएगी.

धोखाधड़ी के मामले

लेकिन यह सब कैसे होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. लेकिन जो किसान मुआवजे को लेकर परेशान हैं, मुश्किल उनकी भर नहीं है.

जिन किसानों को मुआवजे की रक़म मिली, वो भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.

गांव के प्रेम प्रकाश चंद्राकर को ही लें.

चंद्राकर को ज़मीन अधिग्रहण के बदले 12 लाख रुपये मिले थे. उसे उन्होंने एक फ़ाइनेंस कंपनी में जमा करवा दिया था कि पैसा भी सुरक्षित रहेगा और ब्याज से आराम से ज़िंदगी कटेगी. लेकिन एक दिन फ़ाइनेंस कंपनी ही भाग गई.

अब प्रेम के पास न तो ज़मीन है और ना ही पैसे. वे हर दिन गांव से रायपुर जाते हैं कि शायद कोई काम कहीं मिल जाये.

प्रेम जैसे लोगों की संख्या सैकड़ों में हैं जिनके पैसे लेकर फ़ाइनेंस कंपनियां रफ़ूचक्कर हो चुकी हैं. जिस आरंग विधानसभा क्षेत्र में नई राजधानी का इलाका आता है, वहां फ़ाइनेंस कंपनियां और उनका कारोबार एक बड़ा मुद्दा है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul/BBC
Image caption सत्यनारायण शर्मा

रायपुर बनाम नई राजधानी

रायपुर की तुलना में नई राजधानी में होने वाले खर्च को लेकर भी लोगों में नाराजगी है. एक तरफ़ जहां आबादी का ठिकाना नहीं है, वहां तो सुविधाओं का अंबार लगाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पुराने शहर में पीने के शुद्ध पानी के लिये भी लोगों को तरसना पड़ता है.

रायपुर में पीने के शुद्ध पानी को लेकर हाईकोर्ट कई बार फटकार लगा चुका है, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं है. रायपुर के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में ज़रूरत की दवायें नहीं हैं.

रायपुर ग्रामीण के विधायक सत्यनारायण शर्मा कहते हैं, "पुराने रायपुर में जो काम होने थे, उसके बजाये सारा पैसा नयी राजधानी में खर्च हो रहा है, जहां बसाहट नहीं है. नाली, सड़क, बिजली, पानी की मुश्किलों से रायपुर जूझ रहा है. लोग डेंगू, डायरिया, पीलिया से मर रहे हैं, इसे देखने वाला कोई नहीं है."

रायपुर पश्चिम से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार विकास उपाध्याय अपने भाषणों में इस बात का उल्लेख करना नहीं भूलते कि रायपुर की सड़कों का हाल बुरा है. छह महीने में सड़कें उखड़ जाती हैं.

वे कहते हैं, "रायपुर में मूलभूत सुविधायें गायब हैं, लेकिन विकास के नाम पर जन विरोध के बाद भी स्काई वॉक का निर्माण हो रहा है. जाहिर है, मामला निर्माण का है और रायपुर से लेकर नई राजधानी तक निर्माण में भ्रष्टाचार जगज़ाहिर है."

क्या कहती है भाजपा

लेकिन भाजपा के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव इसे कांग्रेस पार्टी में 'विजन का अभाव' की संज्ञा देते हुए कहते हैं कि आरोपों के अलावा कांग्रेस पार्टी के हिस्से कुछ भी नहीं है. श्रीवास्तव मानते हैं कि राज्य की जनता के लिये नई राजधानी एक बड़ी उपलब्धि है.

संजय श्रीवास्तव कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हैं कि 50 सालों तक इस इलाके पर कांग्रेस पार्टी ने राज किया लेकिन न तो छत्तीसगढ़ का विकास हो पाया और न ही रायपुर का. उनका दावा है कि नई राजधानी में विस्थापित किसानों को देश के किसी भी हिस्से की तुलना में सबसे बेहतर पुनर्वास और मुआवजे का लाभ मिला है.

श्रीवास्तव कहते हैं, "हमारी पार्टी ने सत्ता में आते ही अलग राज्य बनाया और अब भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से नई राजधानी का विकास कर रही है. जिस तरह से नई राजधानी धीरे-धीरे विकसित हो रही है, आने वाले दिनों में पूरे भारत के सबसे बेहतर शहरों में इसका नाम शुमार होगा."

रायपुर बनाम नई राजधानी या नई राजधानी बनाम विस्थापित गांव का मुद्दा विधानसभा चुनाव को कितना प्रभावित करेगा, ये कह पाना तो मुश्किल है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक रूप से नई राजधानी आने वाले कई सालों तक मुद्दा बना रहेगा, यह बात तो तय है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार