करतारपुर कॉरिडोर: पाकिस्तान की ओर भी शुरू होगा काम

  • 22 नवंबर 2018
गुरुद्वारा

गुरुवार को भारत सरकार ने डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक एक कॉरिडोर बनाने की घोषणा की ताकि सिख श्रद्धालु गुरु नानक की कर्मस्थली करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन कर सकें.

इसके कुछ घंटों के भीतर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि वो बाबा गुरु नानक के 550 प्रकाश पर्व पर पहले ही कॉरिडोर बनाने की घोषणा कर चुके हैं. उन्होंने ऐलान किया कि 28 नवंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस कॉरिडोर के निर्माण की नींव रखेंगे.

इससे पहले भारत सरकार ने पंजाब के गुरदासपुर में मौजूद डेरा बाबा नानक से भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर साहिब कॉरिडोर के निर्माण के फ़ैसले पर मुहर लगाई थी.

करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बारे में कैबिनेट के फ़ैसले की जानकारी वित्त मंत्री अरूण जेटली ने एक बयान जारी कर दी.

उन्होंने बताया कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक कमिटी बनी थी, जिसके सुझाव पर ये फ़ैसला लिया गया है.

भारत सरकार की इस घोषणा के कुछ घंटे बाद पाकिस्तान ने कहा है कि उनकी सरकार ने पहले ही भारत को करतारपुर कॉरिडोर बनाने के अपने फ़ैसले के बारे में ख़बर दी है.

पाकिस्तानी सरकार ने विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी का बयान शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि "28 नवंबर को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान करतारपुर में इसकी नींव रखेंगे."

सरकार का कहना है बाबा गुरु नानक के 550 प्रकाश पर्व पर वो पाकिस्तान में सिख समुदाय के लोगों का स्वागत करते हैं.

भारत सरकार के फ़ैसले में क्या-क्या है?

1 डेरा बाबा नानक से लेकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक गुरुद्वारा दरबार सिंह करतारपुर साहिब के लिए कॉरिडोर बनाया जायेगा और इसका पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठायेगी. माना जाता है कि पाकिस्तान में रावी नदी के किनारे मौजूद करतारपुर साहेब में गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के 18 साल बिताए थे.

2. सुल्तानपुर लोधी को हेरीटेज सिटी बनाया जायेगा जिसका नाम 'पिंड बाबे नानक दा' रखा जायेगा. यहां गुरुनानक देव जी के जीवन और उनकी शिक्षा के बारे में बताया जायेगा.

3. गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी में 'सेंटर फॉर इंटरफेथ स्टडीज़' का निर्माण किया जायेगा. ब्रिटेन और कनाडा की दो यूनिवर्सिटियों में इस सेंटर के नाम के साथ नई पीठ स्थापित की जायेगी.

4. गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर ख़ास डाक टिकट और सिक्के जारी किये जायेंगे.

5. विदेशों में भारतीय दूतावासों में प्रकाश पर्व के संबंध में विशेष समारोह कराए जायेंगे.

6. नेशनल बुक ट्रस्ट अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गुरुनानक देव जी की शिक्षा के बारे में जानकारी प्रकाशित करेगा. भारतीय रेलवे भी गुरुनानक देव के स्थानों तक रेलगाड़ी चलाएगी.

7. भारत सककार का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया गया है कि वह सिख समुदाय की भावनाओं को समझते हुए अपने क्षेत्र में भी इस तरह का एक गलियारा विकसित करे.

दूरबीन से दिखता है गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर पाकिस्तान के ज़िला नारोवाल में है जो लाहौर से करीब 120 किलोमीटर दूर है. ये गुरुद्वारा भारत की सीमा से करीब 3 किलोमीटर दूर है लेकिन पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव ने इसे तीर्थयात्रियों के लिए बहुत दूर बना दिया है.

भारत सरकार ने भारतीय सीमा के नज़दीक एक बड़ा टेलिस्कोप लगाया है जिसके ज़रिए तीर्थयात्री करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं.

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पाकिस्तान की तहसील शकरगढ़ में स्थित सिखों का ये धर्म स्थान आज भारत और पाकिस्तान की सुर्खियों में छाया हुआ है. पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के शपथ ग्रहण में पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धु को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जरनल क़मर जावेद बाजवा ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने का भरोसा दिलाया था.

सरकार के इस फ़ैसले के बाद सिद्धु ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसका स्वागत किया है.

इससे पहले बीबीसी संवाददाता शुमाइला जाफ़री से बातचीत में पाकिस्तान के प्रसार मंत्री फवाद चौधरी ने कहा था, "करतारपुर सीमा को खोला जा रहा है. गुरूद्वारे तक आने के लिए अब वीज़ा की जरूरत नहीं होगी. वहां तक आने के लिए रास्ता बनाया जायेगा."

"दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु टिकट खरीद कर यहां आ कर और माथा टेक सकते हैं. इसी तरह का एक सिस्टम बनाने की कोशिश हो रही है.''

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करतारपुर वो स्थान है जहां सिखों के पहले गुरू श्री गुरुनानक देव जी ने अपने जीवन के आखिरी 17-18 वर्ष गुजारे थे और सिख समुदाय को एकजुट किया था.

माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव की मौत हुई थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था.

सिखों और मुसलमानों दोनों धर्मों में इस स्थान की मान्यता है. ये गुरुद्वारा शकरगढ़ तहसील के कोटी पिंड में रावी नदी के पश्चिम में स्थित है.

एक अद्भुत स्थान

कहा जाता है कि गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर कुदरत का बनाया अद्भुत स्थान है. पाकिस्तान में सिखों के और भी धार्मिक स्थान हैं- डेरा साहिब लाहौर, पंजा साहिब और ननकाना साहिब उन गांव में हैं जो भारत-पाक सीमा के क़रीब है.

लाहौर से गुरुद्वारे की तरफ बढ़ने पर जैसे ही आप गुरुद्वारे के नज़दीक शकरगढ़ रोड़ तक आते हैं, आपको खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है.

हरे भरे खेत आपका स्वागत करते हैं, बच्चे खेतों में खलते और ट्यूबवेल से पानी पीते नज़र आते हैं. इन्हीं खेतों के बीच एक सफेद रंग की शानदार इमारत नज़र आती है.

गुरुद्वारे के अंदर एक कुआं है. माना जाता है कि ये कुआं गुरुनानक देव जी के समय से है और इस कारण कुएं को लेकर श्रद्धालुओं में काफ़ी मान्यता है.

कुएं के पास एक बम के टुकड़े को भी शीशे में सहेज कर रखा गया है. कहा जाता है कि 1971 की लड़ाई में ये बम यहां गिरा था.

यहां सेवा करने वालों में सिख और मुसलमान दोनों शामिल होते हैं.

रावी नदी में आई बाढ़ के कारण गुरुद्वारे को काफी नुकसान पहुंचा था. उसके बाद 1920-1929 तक महाराजा पटियाला ने इसे फिर से बनवाया था. इस पर 1,35,600 का खर्चा आया.

साल 1995 में पाकिस्तान सरकार ने इसके कुछ हिस्सों का फिर से निर्माण करवाया था. भारत-पाक के बंटवारे में ये गुरुद्वारा पाकिस्तान की तरफ चला गया था.

करतारपुर साहिब के बारे में पहली 1998 में भारत ने पाकिस्तान से बातचीत की थी और उसके 20 साल बाद ये मुद्दा फिर सुर्खियों में आया है.

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