राम मंदिर निर्माण की तारीख़ लेने अयोध्या पहुंचे उद्धव

  • 24 नवंबर 2018
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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शनिवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को ले कर हो रही विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद में शिरकत करने पहुंचे. उनके साथ उनकी पत्नी और बेटा भी हैं.

धर्म संसद में शामिल होने के लिए शिव सेना कार्यकर्ता और कई राज्यों से विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोग वहां पहुंच रहे हैं.

इस आयोजन के प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं, और बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है.

उद्धव ठाकरे समेत पार्टी के कई नेता 24 और 25 नवंबर को अयोध्या में रहेंगे. इस दौरान वो मंदिर में दर्शन करेंगे, संतों से मुलाक़ात और सरयू आरती में शामिल होंगे.

धर्म संसद में मंदिर निर्माण के लिए संसद में क़ानून लाने या अन्य विकल्पों की संभावनाओं पर विचार किया जाना है.

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Image caption राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास भी मंच पर पहुंचे हैं

'कुंभकर्णी को जगाने आया हूं'

अयोध्या पहुंचकर उद्धव ठाकरे सीधे लक्ष्मण किला पहुंचे जहां बड़ी संख्या में लोगों को जमावड़ देखा जा रहा है. यहां राम मंदिर को लेकर लोग नारेबाज़ी कर रहे हैं.

उद्धव ने कहा, "मैं कुंभकर्णी को जगाने आया हूं जो मंदिर निर्माण का वादा करके सोए हुए हैं. हमें मंदिर निर्माण की तारीख़ चाहिए."

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Image caption अयोध्या पहुंचकर उद्धव ठाकरे ने ये तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट में पोसट की और लिखा कि हिंदुओ के उर्जास्रोत प्रभु राम के चरणों से स्पर्श की गई भूमि पर पहुंचा.
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Image caption सरयू तट पर उद्धव ठाकरे की आरती के दौरान गोमाता ने भीड़ में भी अपनी जगह बना ही ली

इससे पहले शुक्रवार को शिवसेना ने भाजपा से राम मंदिर निर्माण को लेकर अध्यादेश लाने और तारीख की घोषणा करने के लिए कहा.

पार्टी ने उद्धभ ठाकरे का एक बयान ट्वीट किया था जिसमें कहा गया था, "हर हिंदू की यही पुकार, पहले मंदिर फिर सरकार."

इससे पहले, पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया भी अयोध्या में 'राम मंदिर के पक्ष में माहौल' बनाने की कोशिश कर चुके हैं.

आशंका का माहौल

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इधर इस कार्यक्रम को देखते हुए अयोध्या के स्थानीय लोगों में आशंका का माहौल है.

सरयू घाट पर घूमने आए कुछ लोगों के अनुसार कई लोगों ने अपने घरों में अतिरिक्त राशन जुटाकर रख लिया है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में भूखे न रहना पड़े.

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अयोध्या में रहने वाले इश्तियाक अहमद कहते हैं, "भीड़ बढ़ रही है और लोगों को आशंका हो रही है कि 90-92 जैसा कोई हादसा ना हो जाए. लोग डर रहे हैं, कुछ लोगों ने अपने घरों से महिलाओं को दूसरी जगहों पर भेजा है."

"कुछ लोगों ने राशन पानी अपने घर में जमा कर लिया है. 90-92 में भी लोगों को काफी परेशानी हुई थी."

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रईस अहमद कहते हैं, "सरकार ने अब तक ऐसा कोई बयान नहीं दिया है कि हम लोगों का भरोसा प्रशासन पर जगे."

"पिछले दिनों सुरक्षाबल खड़ी थी और सभी कांड उन्हीं के सामने हो चुके हैं. हम लोग पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं कि हमारी सुरक्षा हो पाएगी."

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शेर अली कहते हैं, "यहां पर माहौल 90-92 वाला ही है. फिर भी हम सरकार और प्रशासन पर भरोसा रखते हैं. हम दुर्घटना नहीं हो. हम चाहते हैं कि आपस में भाईचारा रहे."

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इस आयोजन से मद्देनज़र अयोध्या मामले में याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी के घर के इर्दगिर्द सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

इससे पहले इकबाल अंसारी ने डर की आशंका जताई थी और कहा था कि माहौल ऐसा ही रहा तो वे अयोध्या से बाहर चले जाएंगे.

उनका कहना था, "साल 1992 में भी ऐसे ही भीड़ बढ़ी थी. कई मस्जिदें तोड़ी गई थीं और मकान जलाए गए थे. अयोध्या के मुसलमान बाहर से आने वाले लोगों से डरे हुए हैं."

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Image caption अयोध्या में कई जगहों पर सड़क किनारे इस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं

भाजपा का पक्ष

गुरुवार को एक साक्षात्कार में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि भाजपा इस मुद्दे को संवैधानिक तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है. ये हमारे लिए मुद्दा है और रहेगा.

उनका कहना था कि जनवरी में राम जन्म भूमि अयोध्या मामले की सुनवाई होनी है और जैसा कोर्ट कहेगी हम वैसा ही करेंगे.

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Image caption क्रार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता
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