अमूल के वर्गीज़ कुरियन पर गुजरात के भाजपा नेता दिलीप संघानी ने क्या कहा

  • 26 नवंबर 2018
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Image caption वर्गीज़ कुरियन

वर्गीज़ कुरियन जीवित होते तो आज 97 साल के होते लेकिन मौत के छह साल बाद भारत में श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले कुरियन का नाम एक बार फिर चर्चा में है.

दरअसल, गुजरात में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहे भाजपा नेता दिलीप संघानी ने शनिवार को गुजरात के अमरेली में एक कार्यक्रम के दौरान विवादास्पद बयान दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने दिलीप संघानी के हवाले से लिखा है कि वर्गीज़ कुरियन ने अमूल के पैसे से गुजरात के डांग ज़िले में धर्मांतरण की गतिविधियों को पैसा मुहैया कराया था.

हालांकि, बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश से बातचीत में दिलीप संघानी ने कहा है कि अमरेली की अमर डेयरी के एक कार्यक्रम में दिए गए उनके बयान की आख़िरी लाइन को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है.

दिलीप संघानी ने कहा, "मैं उनका आदर करता हूं. उनकी क़ाबिलियत के बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है. लेकिन गुजरात के डांग ज़िले में शबरीधाम के निर्माता लोग जब चंदे के लिए उनके पास गए तो उन्होंने ये कहते हुए मना कर दिया कि हम इसमें विश्वास नहीं रखते हैं लेकिन उसी दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल में ईसाई संस्थाओं को चंदा दिया."

1997 में गुजरात के डांग ज़िले में आदिवासी कल्याण संगठन शबरीधाम की स्थापना हुई थी और स्वामी असीमानंद इसके संस्थापकों में से थे. असीमानंद हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में हुए धमाके में मुख्य अभियुक्त थे, जिन्हें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी यानी एनआईए की विशेष अदालत ने बरी कर दिया था.

भाजपा नेता अपने इस बयान पर क़ायम हैं. हालांकि, गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन (जीसीएमएमएफ़) की तरफ़ से दिलीप संघानी के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है और इसका इंतज़ार किया जा रहा है.

हालाँकि डीएनए ने जीसीएमएमएफ़ के चेयरमैन राम सिंह परमार के हवाले से लिखा है, "हम ऐसे बोगस बयानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते."

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कौन थे वर्गीज़ कुरियन

केरल में जन्मे कुरियन को गुजरात के आणंद में सहकारी डेयरी विकास के एक सफल मॉडल की स्थापना करने और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए जाना जाता है.

साल 1973 में उन्होंने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन (जीसीएमएमएफ़) की स्थापना की और 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे. जीसीएमएमएफ़ ही वो संस्था है जो अमूल के नाम से डेयरी उत्पाद बनाती है.

11 हज़ार से अधिक गाँवों के 20 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली इस संस्था ने सहकारिता के क्षेत्र में दूध और अन्य उत्पादों के लिए एक इतिहास रचा है.

कुरियन के जीवनकाल में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया. साल 1965 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

वर्गीज़ कुरियन आणंद के इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल मैनेजमेंट (आईआरएमए) के अध्यक्ष भी रहे. कुरियन को 'भारत का मिल्कमैन' भी कहा जाता है.

एक समय जब भारत में दूध की कमी हो गई थी, कुरियन के नेतृत्व में भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ. कहा जाता है कि नब्बे के दशक तक आते-आते भारत ने दुग्ध उत्पादन में अमरीका को भी पीछे छोड़ दिया था.

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चंदे का विवाद

लेकिन ईसाई संस्थाओं को चंदा देने के मसले पर भाजपा नेता ने वर्गीज़ कुरियन की मंशा पर सवाल उठाया है.

हालांकि, चंदा देना किसी संस्था के विशेषाधिकार का मसला होता है.

इस सवाल पर दिलीप संघानी कहते हैं, "हिंदुओं की संस्था शबरी धाम बना रही थी, लेकिन वर्गीज़ कुरियन ने बोल दिया कि हमें इसमें विश्वास नहीं है. उन्हें किसी को भी चंदा नहीं देना चाहिए था. एक को दें और दूसरे को न दें, ऐसा नहीं हो सकता है. ये सब बातें रिकॉर्ड में हैं."

मंत्री रहते हुए इस मुद्दे पर उन्होंने क्या किया?

इस सवाल पर दिलीप संघानी ने कहा, "हमने इसकी जांच करवाई थी. हमारी जांच में ये बात सामने आई कि उन्होंने शबरीधाम के लिए चंदा देने से मना कर दिया था लेकिन क्रिश्चियन मिशनरियों को चंदा दिया. हालांकि इसमें सरकार कुछ नहीं कर सकती थी. इससे किसी की मानसिकता का पता चलता है."

ऐतिहासिक इस्तीफ़ा

भाजपा नेता ने ये भी आरोप लगाया कि वर्गीज़ कुरियन ग़लत तरीके से 15 साल तक गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन के अध्यक्ष बने रहे.

साल 2006 में कुरियन को प्रतिकूल परिस्थितियों में अमूल के चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

उस वक़्त बीबीसी से उन्होंने कहा था कि गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन के सदस्य सहकारी समितियों का भरोसा खो देने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दिया.

वर्गीज़ कुरियन के ख़िलाफ़ गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था और संस्था के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए भरा गया उनका नामांकन फ़ॉर्म रिटर्निंग ऑफ़िसर ने रद्द कर दिया था.

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