अयोध्या की सड़कें क्या वाक़ई में धर्म सभा के दौरान भगवा रंग में रंग गई थीं

  • 26 नवंबर 2018
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राम मंदिर बनाने की मांग को लेकर रविवार को अयोध्या में धर्म सभा बुलाई गई थी, जिसमें हज़ारों की संख्या में हिंदू, दक्षिणपंथी कार्यकर्ता और साधु-संत पहुंचे थे.

दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले कई सोशल मीडिया पेजों पर इसे ख़ूब प्रचारित किया गया. कुछ पेजों में दावा किया गया था कि लाखों की तादाद में लोग अयोध्या पहुँचेंगे.

इस कार्यक्रम के एक दिन बाद सोशल मीडिया पर अयोध्या से जुड़ी तस्वीरों की बाढ़ सी आ गई है. कई सोशल मीडिया पेजों ने दावा किया गया धर्म सभा के दौरान पूरा अयोध्या भगवा रंग में रंगा नज़र आया.

हमारी पड़ताल में यह पता चला है कि इन पेजों की शेयर की गई तस्वीरों में से कई फ़ेक यानी फ़र्ज़ी हैं.

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ऊपर की तस्वीर को शेयर करते हुए धर्म सभा को भारी जनसमर्थन मिलने की बात कही गई है. हालांकि सच यह है कि ये तस्वीर अयोध्या की नहीं, बल्कि मराठा क्रांति मोर्चा की है. ऊपर की तस्वीर अगस्त 2017 में मराठा आंदोलन की दौरान ली गई थी.

इसमें हज़ारों मराठाओं ने भायखला चिड़ियाघर से आज़ाद मैदान तक रैली निकाली थी, जिसमें उन्होंने आरक्षण और सामाजिक न्याय की मांग की थी.

सरकार के साथ बातचीत के बाद मराठा आंदोलन को ख़त्म कर दिया गया था.

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Image caption एक दूसरी तस्वीर कर्नाटक की है, जिसे अयोध्या का बताया गया है.

कन्नड़ भाषा के बैनर-पोस्टर

एक दूसरी तस्वीर कर्नाटक की है, जिसे अयोध्या का बताया गया है. यह दावा किया गया है कि धर्म सभा से पहले अयोध्या की तरफ़ भारी भीड़ जा रही है.

तस्वीर में कन्नड़ भाषा में लिखे बैनर-पोस्टर साफ़ देखे जा सकते हैं.

इसे बजरंग दल के एक आयोजन के दौरान लिया गया था.

हिंदू विवादित स्थल को भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं, वहीं मुसलमानों का कहना है कि वो यहां कई पीढ़ियों से इबादत करते आए हैं.

साल 1992 में जब हिंदुओं की एक भीड़ ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया तो हिंदू-मुसलमानों के बीच तनाव बहुत ज़्यादा हो गया था.

इसके बाद साम्प्रदायिक दंगों में देश भर में क़रीब दो हज़ार लोग मारे गए थे.

समय-समय पर कई संगठन और हिंदूवादी राजनैतिक पार्टियां यहां राम मंदिर बनाने की मांग करती आई हैं.

मामला सुप्रीम कोर्ट में है और आगामी चुनावों को देखते हुए कई नेता राम मंदिर बनाने के लिए विशेष क़ानून लाने की मांग कर रहे हैं.

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