बीजेपी के लिए विकास कोई मुद्दा नहीं, हिंदुत्व पर होगा चुनाव: सुब्रमण्यम स्वामी

  • 27 नवंबर 2018
सुब्रमण्यम स्वामी इमेज कॉपीरइट @SWAMY39

बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक लाइव में राम मंदिर, रफ़ाल, नोटबंदी और लोकसभा चुनावों जैसे कई मुद्दों पर बात की.

उन्होंने बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के साथ इस बातचीत में जहां हिंदुत्व को चुनावी मुद्दा बताया तो वहीं मौजूदा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल भी उठाए.

सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्तमान राजनीतिक स्थिति, भावी चुनावों और मुद्दों को लेकर क्या-क्या कहा. पढ़िए स्वामी से बीबीसी की पूरी बातचीत...

राम मंदिर पर बीजेपी की दूरी के मायने?

बीजेपी को इस मामले पर दूर ही रहना चाहिए. वो सत्तारूढ़ दल है. मैंने राम मंदिर पर कोर्ट में याचिका दायर की है. इसे किसी पार्टी का सवाल नहीं बनाना चाहिए. खेद की बात है कि हमारे देश में बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने ही ये मुद्दा उठाया है.

जबकि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने उस जगह पर मंदिर होने की बात को प्रमाणित किया है. वहां मंदिर के बाद ही मस्जिद बनाई गई थी.

इस्लाम धर्म ने और सुप्रीम कोर्ट ने मेरी याचिका में पुष्टि की है कि मस्जिद उस जगह का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है.

तो मैं सोचता हूं कि जब ये राम की जन्मभूमि है और राम आस्था के अनुसार एक तथाकथित जगह पर पैदा हुए तो पहले के मंदिर को दोबारा बनाने की बात को सारे समाज को मानना चाहिए.

शिवसेना से चुनौती

शिवसेना हमारी सहयोगी है. लोकतंत्र में इतना विरोध तो हो ही सकता है. लेकिन, मैं दावा करता हूं कि बीजेपी और शिवसेना का साथ किसी भी हालत में नहीं छूटेगा.

सैय्यद शहाबुद्दीन को लिखी चिट्ठी में स्वामी ने मुसलमानों के साथ अन्याय होने पर उनका साथ देने की बात लिखी थी लेकिन अब वो राम मंदिर का समर्थन कर रहे हैं.

इस पर स्वामी ने कहा—

हाशिमपुरा मैंने ही जीत कर दिया. इस मामले में आजीवन कारावास की सज़ा दिलाई. जहां भी अन्याय होगा तो मैं ज़रूर लड़ूंगा.लेकिन, हिंदुओं के साथ भी बहुत अत्याचार हुआ है. उसे भी ठीक करना है.

इमेज कॉपीरइट AFP

मंत्रिमंडल में न होने का अफ़सोस?

मुझे क्यों अफ़सोस होना चाहिए, अफ़सोस उन्हें होना चाहिए जिन्होंने मुझे बाहर रखा.

करतारपुर कॉरिडर पर विरोध क्यों?

मुझे लगता है कि करतापुर कॉरिडर में दोनों मंत्रियों को नहीं जाना चाहिए. इसे बनाने के लिए आदेश देना ग़लत नहीं है लेकिन इसे त्योहार की तरह मनाना सही नहीं है. मुंबई हमले के बाद सब लोग जश्न मना रहे थे जिसमें पाकिस्तान सरकार के नुमाइंदे भी शामिल थे.

यहां से मंत्रियों के जाने से पाकिस्तान के प्रस्ताव को सम्मान मिलता है. आज की परिस्थिति में थोड़ा भी सम्मान नहीं मिलना चाहिए.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना

सीबीआई विवाद पर स्वामी

सुब्रमण्यम स्वामी ने भ्रष्टाचार मामले में छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की 2016 में तारीफ़ की थी. लेकिन, हाल ही में उन्होंने अस्थाना का विरोध करते हुए लिखा कि वो चिदंबरम का पक्ष ले रहे थे.

इस पर स्वामी ने कहा,''6 दिसंबर, 2014 में चिदंबरम से सीबीआई मुख्यालय में पूछताछ की गई थी. बाद में जांच करने वाले अधिकारी की जगह राकेश अस्थाना आए थे.

तब मैंने उनसे कहा कि इस मामले में आपने चार्ज़शीट दायर नहीं की, कोई स्टेटस रिपोर्ट नहीं दी. तब उन्होंने कहा था मैं सितंबर अंत तक चार्ज़शीट दायर करने का वचन देता हूं.

लेकिन, वो अभी तक नहीं हुई तब बाद में पता लगा कि उनके रिश्ते चिदंबरम से अप्रत्यक्ष रूप से बन गए थे. प्रवर्तन निदेशालय के छापे में सील कवर वाली स्टेटस मिली थी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

रॉबर्ट वाड्रा मामले में ख़ामोश क्यों?

क्योंकि सोनिया गांधी उन्हें खु़द निकालना चाहती है. अंदर की बात ये है कि प्रियंका गांधी को मुक़्त करने के लिए वाड्रा की छुट्टी करना चाहती हैं.

रफ़ाल को लेकर स्वामी कहते हैं कि अगर विपक्ष इस मुद्दे को उठाएगा तो वो मदद नहीं करेंगे. जिन लोगों ने ये मुद्दा उठाया है ख़ुद मेहनत क्यों नहीं करते. जैसे मैंने नेशनल हेराल्ड में किया वैसा क्यों नहीं करते.

सरकार की आर्थिक नीति

ये कोई आर्थिक नीति नहीं है. वित्त मंत्री अरुण जेटली वही करते हैं जो उनसे अधिकारी कह देते हैं. उन्हें अधिकारी बरगला रहे हैं.

चिदबंरम जीएसटी पर जो नीति बनाई उसे ही दोहरा दिया.

वहीं, नोटबंदी बहुत अच्छा क़दम था. लेकिन, उसके लिए पर्याप्त तैयारियां नहीं की गई इसके लिए अरुण जेटली ज़िम्मेदार हैं.

इमेज कॉपीरइट SAMIRATMAJ MISHRA/BBC

चुनाव में मुद्दा क्या होगा

विकास कभी हमारा मुद्दा नहीं रहा. वाजपेयी और नरसिम्हा राव का था और वो हार गये. '​सबका साथ, सबका विकास' बोलने की बात है.

लेकिन, चेतना और आस्था जगाने वाला है हिंदुत्व. जब हम लोगों को अपनी जाति से ऊपर उठकर वोट देने के लिए तैयार कर देते हैं तब हमारी जीत होती है.

आने वाले चुनाव में भी हिंदुत्व ही चलेगा. पिछली बार हमारी 21 प्रतिशत वोट 31 प्रतिशत हो गया और पार्टी जीत गई.

मैं नहीं मानता कि ब्राह्मण पैदा होते हैं, जो ज्ञानी और त्यागी होते हैं वो ही ब्राह्मण होते हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

कांग्रेस या क्षेत्रीय दल चुनौती

कांग्रेस अभी न के बराबर है. जब भी राहुल गांधी बोलते हैं तो हमारा वोट एक प्रतिशत बढ़ता है. क्षेत्रीय दल कोई चुनौती नहीं है. जैसे इंदिरा के सामने बड़ी-बड़ी हस्ती खड़ी हो गई थी.

लोगों ने कहा कि ये खिचड़ी नहीं चल सकती, आपस में लड़ेंगे तो अब भी वही होगा.

जो कुछ भी हमने पांच साल चलाया. कई काम भी किए. कुछ असंतुष्ट हैं लेकिन ऐसे काम किए जो पहले किसी ने नहीं किए. सोनिया गांधी को कटघरे में खड़ा कर दिया. ज़मानत लेनी पड़ी.

ये सच है कि ये मैंने किया. इसमें बीजेपी का योगदान नहीं है लेकिन मैं बीजेपी से ही हूं. जो भी किया बीजेपी के लिए ही किया.

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार