राम मंदिर निर्माण पर क़ानून, कितना संभव?

  • 26 नवंबर 2018
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर पर जल्द से जल्द क़ानून बनना चाहिए.

मोहन भागवत ने कहा, "न जाने क्या कारण है, या तो अदालत बहुत व्यस्त है या राम मंदिर उसके लिए प्राथमिकता नहीं, इस स्थिति में सरकार को सोचना चाहिए कि वो मंदिर निर्माण के लिए किस तरह क़ानून ला सकती है .... वो क़ानून जल्द से जल्द पेश किया जाना चाहिए."

लेकिन इस तरह का कोई क़ानून सरकार क्या ला सकती है?

संविधान के जानकार और मशहूर वकील सूरत सिंह कहते हैं, "सरकार के पास अगर बहुमत हो तो उसके पास अधिकार है कि वो क़ानून बना सकती है. लेकिन उस क़ानून को संविधान की मूल भावनाओं के अनुरूप होना होगा."

संविधान के मूल में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और धर्मनिरपेक्षता जैसी भावनाएं निहित हैं. ये सभी संविधान की प्रस्तावना में बहुत साफ़ तौर पर दर्ज हैं.

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Image caption बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 में एक उन्मादित भीड़ ने ढहा दिया था

सुप्रीम कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती

सुप्रीम कोर्ट की मशहूर वकील इंदिरा जयसिंह तो साफ़तौर पर कहती हैं कि कोई भी क़ानून किसी भी एक धर्म के लिए नहीं तैयार किया जा सकता है.

इसके बावजूद अगर सरकार इस मुद्दे पर क़ानून ले भी आती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है, और अगर अदालत को कहीं भी लगता है कि नया क़ानून संविधान की किसी भी भावना के विपरीत है तो वो उसे रद्द कर देगी.

सुप्रीम कोर्ट ने चंद महीनों पहले ही समलैंगिकता को जुर्म मानने वाले एक क़ानून को इस आधार पर रद्द कर दिया क्योंकि वो समानता के अधिकार के विपरीत था.

केरल के सबरीमाला के संबंध में भी जो फ़ैसला अदालत ने दिया था वो इसी मूल भावना पर आधारित था कि क्या लिंग के आधार पर किसी को कहीं जाने से रोका जा सकता है?

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Image caption राज्य सभा सांसद राकेश सिन्हा ने निजी बिल लाने की बात कही थी

राम मंदिर पर निजी बिल

सूरत सिंह पूरे मामले को और समझाते हुए कहते हैं कि संपत्ति का अधिकार एक अहम क़ानून है लेकिन उसमें ये अधिकार शामिल नहीं कि आप पड़ोसी की संपत्ति पर क़ब्ज़ा कर लें यानी जब आप एक क़ानून किसी समुदाय या समूह विशेष के लिए बना रहे हों तो आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि उससे दूसरे समुदाय या वर्ग के अधिकार का हनन नहीं हो रहा हो.

शायद यही वजह हो कि हाल के दिनों में तमामतर दावों के बावजूद राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा के राम मंदिर बिल का मामला अब तक आगे नहीं बढ़ा है.

राकेश सिन्हा ने कहा था कि वो राम मंदिर निर्माण को लेकर एक प्राइवेट मेम्बर बिल लाएंगे.

उन्होंने दूसरे दलों जैसे कांग्रेस और वामपंथियों से ये सवाल भी किया था कि वो इस तरह के बिल का समर्थन करेंगे या नहीं, लेकिन फिर इस बारे में किसी तरह के किसी मसौदे के बारे में उनकी तरफ़ से ख़ामोशी बनी हुई है.

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