मध्य प्रदेश चुनाव में 'पिछड़ती भाजपा' पर 'RSS के सर्वे' का सच

  • 27 नवंबर 2018
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राजस्थान में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को सूबे में मतदान होगा और 11 दिसंबर को मतों की गणना होगी.

वहीं मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग कल यानी बुधवार, 28 नवंबर को होनी है. मध्यप्रदेश में भी मतों की गणना 11 दिसंबर को ही होगी.

मध्यप्रदेश में चुनाव प्रचार बंद हो चुका है. जबकि राजस्थान में चुनाव प्रचार अभी ज़ोरों पर है और चुनावी माहौल में तमाम तरह की बेबुनियाद ख़बरें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं.

इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि जो चीज़ें सोशल मीडिया पर जारी की जा रही हैं, उनके साथ या तो आधी-अधूरी जानकारी दी जा रही है या फिर ख़ास परिदृश्य जोड़कर उन्हें पेश किया जा रहा है.

मध्यप्रदेश चुनाव पर आरएसएस का सर्वे

मध्यप्रदेश चुनाव पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक कथित सर्वे सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पैड पर छपे इस कथित सर्वे में ये दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ये सर्वे 15 नवंबर से 21 नवंबर के बीच किया गया था.

भारतीय जनता पार्टी के मध्यप्रदेश अध्यक्ष और जबलपुर से सांसद राकेश सिंह के नाम से प्रेषित इस चिट्ठी में लिखा है कि उज्जैन संभाग में अचानक से भाजपा की स्थिति ख़राब हुई है. वहीं इंदौर, ग्वालियर, रीवा एवं मध्यप्रदेश के मध्य क्षेत्र में टिकट वितरण की ग़लतियों का खामियाज़ा भी बड़े पैमाने पर नज़र आ रहा है.

इस चिट्ठी में ये भी दावा किया गया है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रैलियों का मध्यप्रदेश की जनता पर ग़लत प्रभाव पड़ रहा है.

इस कथित सर्वे के अनुसार, कांग्रेस 142 सीटों पर काफ़ी मज़बूत स्थिति में है.

लेकिन ये पूरा सर्वे फ़ेक है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली और भोपाल दफ़्तर के अनुसार उन्हें ये फ़र्ज़ी चिट्ठी रविवार को प्राप्त हुई थी.

आरएसएस के भोपाल (ज़िला) प्रचारक मनोहर राजपाल ने बताया कि चिट्ठी में प्रमोद नामदेव नाम के जिस शख़्स का हस्ताक्षर है, उस नाम से कोई सर्वे एवं जनमत दल प्रमुख आरएसएस में नहीं है.

गहलोत और राहुल का डांस वीडियो

दक्षिण पंथी रुझान रखने वाले कुछ फ़ेसबुक ग्रुप्स में एक वीडियो शेयर किया जा रहा है.

इस वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता व राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में डांस करते दिखाई दे रहे हैं.

बहुत से लोगों ने फ़ेसबुक और व्हॉट्सऐप पर इस वीडियो को शेयर करते हुए ये टिप्पणी की है कि 'गहलोत गांधी परिवार के सेवक हैं. वो उनकी ही सेवा करते रहेंगे. जो नेता चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी के साथ जाकर डांस करने के लिए वक़्त निकाल सकता है, वो राजस्थान की जनता के लिए क्या वक़्त निकालेगा?'

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सोमवार रात को भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया.

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "गहलोत जी आप इस वीडियो में क्या कर रहे हैं? राजस्थान की जनता की सेवा या 'बेबी सिटिंग'? राजस्थान की जनता ये जानना चाह रही है!"

हमारी पड़ताल में ये पता चला है कि इस वीडियो का राजस्थान चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है. कुछ लोगों ने इस वीडियो को सोची-समझी प्लानिंग के तहत ख़ास एंगल दिया है.

दरअसल, ये वीडियो क़रीब एक साल पुराना है और इसे गुजरात के बडौदा शहर के पास स्थित छोटा उदेपुर में पार्टी कार्यक्रम के दौरान शूट किया गया था.

राहुल गांधी 10 अक्तूबर, 2017 को गुजरात चुनाव में प्रचार करने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर बडौदा पहुंचे थे और उन्होंने कांग्रेस पार्टी के गुजरात चुनाव प्रभारी रहे अशोक गहलोत के साथ आदिवासी कलाकारों की इस नृत्य प्रस्तुति में शिरकत की थी.

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कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा था कि आदिवासी संस्कृति ही भारतीय सभ्यता की नींव है. हमें इनसे बहुत कुछ सीखना है. आदिवासी कलाकारों के साथ बिताये कुछ पल.

हमने अमित मालवीय से इस वीडियो के बारे में बात करने की कोशिश की तो उनके दफ़्तर से जवाब मिला कि ये वीडियो सोमवार को जोधपुर में हुई कांग्रेस की रैली का है जहाँ अशोक गहलोत और राहुल गांधी, दोनों एक ही मंच पर मौजूद थे.

'राम भक्तों को पानी पिलाती यूपी पुलिस'

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अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर 25 नवंबर को बुलाई गई 'धर्म सभा' से जुड़ा 'फ़र्ज़ी कंटेट' लगातार सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.

सोमवार को हमने अपनी पड़ताल में पाया था कि कैसे अयोध्या में श्रद्धालुओं के जमावड़े को बढ़ाकर दिखाने के लिए मराठा आंदोलन और कर्नाटक की विहिप यूनिट और बजरंग दल की पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया.

ऐसी ही एक और फ़र्ज़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस तस्वीर में आप यूपी के पुलिसकर्मी को एक बुज़ुर्ग शख़्स को पानी पिलाते हुए देख सकते हैं.

इस तस्वीर को फ़ेसबुक और व्हॉट्सऐप पर शेयर किया जा रहा है. साथ में संदेश लिखा है, "साल 1992 में जिन पुलिस वालों ने रामभक्तों पर गोलियाँ चलाई थीं वो पुलिस वाले आज रामभक्तों की सेवा में लगे हैं. #योगीराज."

लेकिन इस तस्वीर के साथ इस संदेश को जोड़कर एक काल्पनिक परिस्थिति को गढ़ा गया है.

दरअसल ये तस्वीर 25 मई 2018 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल @Uppolice से ट्वीट की थी.

इसके अलावा दो अन्य तस्वीरें शेयर करते हुए यूपी पुलिस ने ट्वीट किया था कि 'घर के बड़े बुजुर्गों को कई बार सिर्फ़ आपकी केयर और आपके वक़्त की दरकार होती है. हम कभी भी उनके प्रति अपना स्नेह दिखाने से पीछे नहीं हटते और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं. #EldersFirstUPP #UPPolice'

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