कांग्रेस के 'मंदिर तोड़ने वाली तस्वीर' का पाकिस्तान कनेक्शन

  • 28 नवंबर 2018
लाहौर का जैन मंदिर जिसे 8 दिसंबर, 1992 को तोड़ दिया गया इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption लाहौर का जैन मंदिर जिसे 8 दिसंबर, 1992 को तोड़ दिया गया

राजस्थान और मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावी माहौल के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह की झूठी और आधी-अधूरी जानकारी देने वाली ख़बरें फैलाई जा रही है.

ऐसी ऐसी झूठी या सच्ची ख़बरों का सच पता लगाने के लिए एक ख़ास प्रोजेक्ट शुरु किया गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है 'एकता न्यूज़रूम'.

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया के ज़रिए कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इस प्रोजेक्ट के ज़रिए इन्हीं की पड़ताल कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की गई है.

कांग्रेस ने तोड़े मंदिर- फ़ेक

दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले कुछ फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में एक भड़काऊ संदेश शेयर किया जा रहा है. इस संदेश में एक विध्वस्त मंदिर की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर दिखाई जा रही है.

तस्वीर के नीचे लिखा है, "कांग्रेस ने कश्मीर, केरल और बंगाल में लाखों मंदिर तोड़े हैं. परंतु हिंदू भूल चुका है और वो आज भी कांग्रेस को वोट देता है. ये हिंदुओं की कमज़ोरी है."

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Image caption सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है ये पोस्ट

राजस्थान की राजधानी जयपुर से दक्षिण में स्थित टोंक क़स्बे से एक शख़्स ने मंगलवार को ये संदेश व्हॉट्सऐप के ज़रिए 'एकता न्यूज़रूम' के साथ शेयर किया था.

इस संदेश में ये भी लिखा था कि बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के कारण भारतीय मुसलमान भाजपा से नाराज़ रहते हैं और उनका वोट कभी भाजपा को नहीं जाता.

संदेश भेजने वाले व्यक्ति का सवाल था कि इस बात में कितनी सच्चाई है और ये तस्वीर असल में कहाँ की है?

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Image caption लाहौर के जैन मंदिर की मौजूदा स्थिति

पड़ताल में सामने आया सच

राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.

प्रदेश में किशनपोल, आदर्श नगर और टोंक समेत कुछ विधानसभाएं ऐसी हैं जहाँ मुस्लिम वोटरों की संख्या ज़्यादा है और वो सियासी खेल बदल सकते हैं. साथ ही माना जाता है कि मकराना, फ़तेहपुर, चुरू और बाड़मेर में धार्मिक कार्ड काम कर सकता है.

वहीं टोंक विधानसभा सीट से भाजपा के अकेले मुस्लिम उम्मीदवार युनुस ख़ान चुनावी मैदान में हैं.

तस्वीर की पड़ताल करने पर हमने पाया कि ये तस्वीर और संदेश फ़ेसबुक के कुछ क्लोज़ ग्रुप्स में भी शेयर किया जा रहा है.

एकता न्यूज़रूम को टोंक क़स्बे के व्यक्ति ने जो संदेश भेजा था, उसमें तो कोई सच्चाई नहीं थी. लेकिन टूटे हुए मंदिर की तस्वीर की पड़ताल हमने की.

हमने पाया कि ये तस्वीर पाकिस्तान के लाहौर में गिराये गए जैन मंदिर की है और इस तस्वीर को आठ दिसंबर 1992 को लिया गया था.

बीते साल आठ दिसंबर को बीबीसी ने पाकिस्तान में तोड़े गए हिंदू मंदिरों पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी. उस रिपोर्ट में बीबीसी उर्दू के संवाददाता शिराज़ हसन ने लिखा था कि जब हिंदू कट्टरपंथियों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई थी तो कम ही लोगों ने सोचा होगा कि पड़ोसी देशों में इस पर किस क़िस्म की प्रतिक्रिया होगी.

"लेकिन छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद पाकिस्तान में इसकी प्रतिक्रिया होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. बाबरी मस्जिद के बाद पाकिस्तान में तक़रीबन 100 मंदिर या तो ज़मींदोज़ कर दिये गए या फिर उन्हें भारी नुक़सान पहुँचाया गया था."

आठ दिसंबर, 1992 को लाहौर के एक जैन मंदिर को उन्मादियों ने ढहा दिया था जिसकी तस्वीर अब राजस्थान के चुनावी माहौल में शेयर की जा रही है.

ट्विटर सीईओ ने कहा, 'मंदिर वहीं बनाएंगे'- फ़ेक

@indiantweeter नाम के हैंडल से पिछले सप्ताह एक फ़र्ज़ी तस्वीर ट्वीट की गई थी जिसे अब व्हॉट्सऐप पर भी शेयर किया जा रहा है.

इस तस्वीर में सोशल मीडिया ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी बाबरी मस्जिद का एक पोस्टर लिए खड़े हैं और उनके साथ कुछ महिला पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता दिखाई दे रहे हैं.

इस तस्वीर को @indiantweeter हैंडल चलाने वाले अंकित जैन ने इस टिप्पणी के साथ शेयर किया है कि "शुक्रिया जैक. #MandirWahinBanayenge."

अयोध्या में 25 नवंबर को हुई धर्मसभा के दौरान इस तस्वीर को काफ़ी रीट्वीट किया गया था. लेकिन अयोध्या से जोड़कर शेयर की जा रही ये तस्वीर नक़ली है.

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्से हाल ही में भारत दौरे पर आये थे. ये तस्वीर उस वक़्त ली गई थी. भारत दौरे पर जैक ने कुछ भारतीय महिलाओं के साथ बैठक की थी और उनकी समस्याओं को सुना था.

असल तस्वीर में जैक के हाथ में #BrahminicalPatriarchy मुहिम से जुड़ा एक पोस्टर था जिसे बैठक में शामिल हुई एक दलित एक्टिविस्ट ने उन्हें दिया था.

लेकिन अंकित जैन ने फ़ोटोशॉप की गई फ़र्ज़ी तस्वीर शेयर करके पूरी कहानी ही बदल दी.

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Image caption सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है ये फ़ेक तस्वीर

ये फ़ेक ट्वीट इतना वायरल क्यों हुआ?

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कुलजीत सिंह चाहल भी अंकित जैन को ट्विटर अकाउंट को फ़ॉलो करते हैं.

न्यूज़ वेबसाइट द क्विन्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2014 में भाजपा सरकार बनने के क़रीब एक साल बाद, एक जुलाई 2015 को नरेंद्र मोदी ने भाजपा के आईटी सेल की तरफ़ से आमंत्रण भेजकर 150 प्रभावशाली ट्विटर यूज़र्स को मिलने के लिए बुलाया था.

ये मीटिंग दिल्ली के सात आरसीआर स्थित प्रधानमंत्री आवास में हुई थी और अंकित जैन भी इस मीटिंग के लिए आमंत्रित थे.

इसी मुलाक़ात के दौरान पीएम मोदी के साथ ली गई तस्वीर अंकित जैन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लगा रखी है. इस कारण उनके फ़ॉलोअर्स हज़ारों की संख्या में हैं.

(ये कहानी फ़ेक न्यूज़ से लड़ने के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट 'एकता न्यूज़रूम' का हिस्सा है.)

अगर आपके पास ऐसी ख़बरें, वीडियो, तस्वीरें या दावे आते हैं जिन पर आपको शक हो तो उनकी सत्यता जाँचने के लिए आप उन्हें 'एकता न्यूज़रूम' को इस नंबर पर +91 89290 23625 व्हाट्सएप करें या यहाँ क्लिक करें.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

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