राहुल गांधी को कैसे मिला ‘कौल’ गोत्र?

  • 28 नवंबर 2018
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बात दो मई, 1991 की है. तपती धूप में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चुनाव प्रचार के बीच पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में आकर संकल्प लिया था.

देश में आम चुनाव का माहौल था, राजीव की कांग्रेस पार्टी विपक्ष में थी और माना जा रहा था कि राजीव वापसी कर सकते हैं.

राजीव गांधी का पुष्कर से कुछ ख़ास लगाव था. उन दिनों राजस्थान में राजीव के क़रीबी रहे एक नेता ने बताया, "वह पहली बार पुष्कर 1983 में आए थे जब वे कांग्रेस पार्टी के महासचिव थे. बतौर प्रधानमंत्री भी वे 1989 में पुष्कर आए और ब्रह्मा मंदिर में पूजा-अर्चना की."

लेकिन दो मई, 1991 की उनकी पुष्कर यात्रा के महज़ 19 दिन बाद तमिलनाडु में राजीव गांधी एक बम धमाके का शिकार हो गए.

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Image caption जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में पूजा करते हुए राहुल गांधी

उनकी मृत्यु के एक हफ़्ते बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन पुष्कर में किया गया जिस दौरान राजेश पायलट और अशोक गहलोत जैसे नेता मौजूद थे.

परिवार के पुरोहित दीनानाथ कौल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, "ये सभी नेता तीन हफ़्ते पहले भी राजीव जी के साथ यहाँ मौजूद थे. राजीव तीन बार पुष्कर आ चुके थे और उनकी मौत की ख़बर मिलने पर शहर कई दिनों तक सदमें में रहा था."

मोतीलाल नेहरू ने की थी पूजा

हालाँकि, राजीव से पहले उनके भाई संजय गांधी और भाभी मेनका गांधी भी पुष्कर आकर ब्रह्मा मंदिर में पूजा कर चुके थे.

दरअसल, संजय गांधी 1980 के मार्च महीने की 21 तारीख़ को पुष्कर आए थे लेकिन उसके दो महीने बाद ही एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी.

संजय गांधी की मृत्यु के कोई चार साल बाद मेनका गांधी पुष्कर पहुँची थीं और उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के विधि-विधान के अनुसार पूजा की थी.

Image caption राहुल गांधी की पूजा पुरोहित दीनानाथ कौल (बाएं) और राजनाथ कौल ने करवाई थी

नेहरू-गांधी परिवार का लंबा इतिहास राजस्थान के पुष्कर के बीचों-बीच बनी झील के किनारे से भी जुड़ा है.

साल 1921 यानी क़रीब 100 साल पहले मोतीलाल नेहरू पुष्कर आए थे. उस वक़्त पुरोहितों के एक पराशर परिवार ने उनके लिए यहाँ के मशहूर ब्रह्मा मंदिर में पूजा की थी.

मोतीलाल नेहरू ने पूजा के दौरान अपने को 'कौल' गोत्र का लिखते हुए इस पुरोहित परिवार को 'कौल' की उपाधि दी थी. मोतीलाल ने पुरोहित परिवार से कहा कि अब आप उनके परिवार के पुरोहित बन गए हैं इसलिए अपना सरनेम कौल कर दें.

चार पीढ़ी से पुष्कर में रह रहे इस पराशर परिवार के लोग तब से अपना सरनेम कौल लिखने लगे हैं.

Image caption इंदिरा गांधी जब पुष्कर दर्शन करने आई थीं तब उन्होंने हस्ताक्षर किए

15 साल बाद आया कोई शख़्स

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी तक पुष्कर आकर पूजा-पाठ में शामिल हो चुकी हैं.

लेकिन सच ये भी है कि गांधी परिवार के किसी सदस्य की पुष्कर यात्रा के पूरे 15 साल बाद ही राहुल गांधी का यहाँ आगमन हुआ है और ये चर्चा का विषय भी है.

इसी परिवार के दो बुज़ुर्ग पुरोहितों, राजनाथ कौल और दीनानाथ कौल ने सोमवार को राहुल गांधी से संकल्प करवाया और पूजा संपन्न करवाई थी.

Image caption कांग्रेस महासचिव रहते हुए राजीव गांधी पहली बार पुष्कर आए थे

राजनाथ कौल ने बीबीसी हिंदी से कहा, "उनकी माँ सोनिया गांधी को यहाँ आए 15 साल हो गए थे इसलिए हमें ख़ुशी है कि राहुल यहां आए. हमने उन्हें उनके परिवार का इतिहास बताया और उन्होंने बहुत ध्यान से सुना."

इस संकल्प में राहुल गांधी ने भी अपना गोत्र वही बताया जो 1921 में मोतीलाल नेहरू ने बताया था.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान में अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान अजमेर में सूफ़ी संत ख़्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर पहुंचे थे.

अजमेर में राहुल गांधी ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत के साथ चादर चढ़ाई और चुनावों में कांग्रेस की जीत के लिए दुआ मांगी.

वहीं, पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में राहुल गांधी ने पूजा की. इस दौरान उन्होंने अपना गोत्र 'कौल दत्तात्रेय' बताया है. इसके बाद से राहुल गांधी के गोत्र पर सोशल मीडिया में ख़ासी चर्चा होनी शुरू हो गई.

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस वार्ता में राहुल गांधी का गोत्र पूछा था.

Image caption राजीव गांधी जब दोबारा पुष्कर दर्शन करने आए थे तब उन्होंने यह लिखा

फ़िरोज़, प्रियंका और वरुण नहीं आए पुष्कर

कुछ लोग कह रहे हैं कि राहुल गांधी ने पहले कभी अपना गोत्र नहीं बताया जबकि कांग्रेस के कुछ लोगों का कहना है कि राहुल और उनका परिवार हमेशा से ख़ुद को कश्मीरी ब्राह्मण बताता रहा है और मोतीलाल-जवाहरलाल नेहरू भी यही थे.

पुष्कर में गांधी परिवार के कुल पुरोहित दीनानाथ कौल ने कहा कि, "मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल, इंदिरा गांधी सब यहाँ पर बतौर कश्मीरी ब्राह्मण यानी कौल बनकर ही पहुँचे हैं. समझ में नहीं आता विवाद किस बात पर है?"

Image caption पुष्कर ब्रह्मा मंदिर के अलावा अपनी झील के लिए भी प्रसिद्ध है

दरअसल, राहुल गांधी के पुष्कर में आने के बाद से कुछ लोगों में चर्चा का विषय ये बना कि जब इंदिरा गांधी के पति और राहुल गांधी के दादा फ़िरोज़ गांधी पारसी थे तब वे ख़ुद को कश्मीरी कौल कैसे बता सकते हैं.

हालाँकि, इस बात का तर्क कमज़ोर इसलिए हो जाता है कि ख़ुद इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी और मेनका गांधी ने पुष्कर में आकर अपने को कश्मीरी कौल गोत्र का बताते हुए पूजा-अर्चना की है.

पुष्कर में नेहरू-गांधी परिवार के मौजूदा पुरोहितों के अनुसार फ़िरोज़ गांधी कभी नहीं आए. उनके अनुसार परिवार के मौजूदा सदस्यों में से अभी तक प्रियंका गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और वरुण गांधी ने पुष्कर मंदिर का दौरा नहीं किया है.

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