कश्मीर: नवीद जट का मारा जाना कितनी बड़ी कामयाबी

  • 28 नवंबर 2018
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Image caption चरमपंथी नवीन जट

भारत प्रशासित कश्मीर में पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर नवीद जट को मारने का दावा किया है. सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में नवीद का एक साथी भी मारा गया है.

बुधवार तड़के सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम ने ज़िला बडगाम के कुठपोरा, छतरगाम इलाक़े में चरमपंथियों के छुपे होने की सूचना के बाद इलाक़े को घेरा था.

इलाके में छुपे चरमपंथियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियां चला दीं, जिस पर सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई की. इस मुठभेड़ में तीन सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए हैं.

पुलिस ने नवीद जट के मरने की पुष्टि की है. जम्मू-कश्मीर में एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस मुनीर ख़ान ने बीबीसी को बताया, "बुधवार को जो बडगाम में मुठभेड़ हुई है, उसमें लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर नवीद जट भी मारा गया है. पुलिस को कई मामलों में नवीद की तलाश थी."

उन्होंने कहा, "नवीद बीते साल श्रीनगर के एक अस्पताल से भाग गया था और हमारे दो पुलिस जवानों को भी मार दिया था. नवीद के मारे जाने से अब उन इलाक़ों में सुकून होगा जहां वो गतिविधियों को अंजाम देता था."

क्या सुरक्षाबलों की यह बड़ी कामयाबी है? ख़ान ने बताया, "हर एक आतंकवादी पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए वॉन्टेड होता है. नवीद कुख्यात आतंकवादी था. उसके ऊपर हत्याओं के कई मामले थे. सुरक्षाबलों पर हमले समेत और दूसरे अपराधों में भी वो शामिल था."

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Image caption पत्रकार शुजात बुख़ारी

शुजात बुख़ारी की हत्या का आरोप

नवीद जट पर कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुख़ारी की हत्या का आरोप था. इस साल पुलिस ने शुजात बुख़ारी की हत्या के मामले में नवीद जट का नाम लिया था.

पुलिस ने एक हफ़्ते पहले इस बात का दावा किया था कि अनंतनाग के सुतकीपोरा में मारे गए छह चरमपंथियों में से एक चरमपंथी आज़ाद अहमद मालिक उर्फ़ दादा को भी मारा गया है.

पुलिस ने शुजात बुख़ारी की हत्या में जिन चार लोगों का नाम लिया था, उनमें आज़ाद और नवीद शामिल थे.

जून 2018 में शुजात बुख़ारी की श्रीनगर में उनके दफ्तर के बाहर गोली मार हत्या कर दी गई थी. उस हमले में उनके दो सुरक्षाकर्मी भी मारे गए थे.

श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "नवीद जट शुजात बुख़ारी की हत्या में एक मुख्य अभियुक्त था. अगर हम ज़िंदा पकड़ते तो और भी चीज़ें सामने आ जातीं लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. नवीद की भूमिका किस हद तक थी और किस हद तक नहीं थी तो ये क़िस्सा भी अब खत्म हो गया. बाक़ी इस मामले में जांच जारी है."

नवीद जट कई बार सुरक्षाबलों से बचकर भागने में कामयाब रहे थे.

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2014 में हुई थी गिरफ़्तारी

नवीद को साल 2014 में दक्षिणी कश्मीर के ज़िला शोपियां से पकड़ा गया था.

गिरफ़्तारी के बाद नवीद को श्रीनगर की केंद्रीय जेल में रखा गया था. फ़रवरी 2018 में श्रीनगर के श्री महाराजा हरी सिंह अस्पताल से नवीद भागने में कामयाब हो गए थे.

पुलिस ने बताया था कि नवीद को जेल से फ़रार कराने की साज़िश श्रीनगर की सेंट्रल जेल में रची गई थी.

अस्पताल से फ़रार होने के बाद नवीद की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. उसमें नवीद को हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर सद्दाम पादर के साथ हथियार लहराते देखा गया था.

हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने उस समय इस बात की पुष्टि नहीं की थी कि वो नवीद की ही तस्वीर है या नहीं.

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युवाओं में मशहूर

नवीद जट कश्मीर के युवाओं में बहुत मशहूर थे. कश्मीर के किसी भी कोने में होने वाली मुठभेड़ को लेकर आम लोग पूछते थे कि कहीं नवीद जट भी मुठभेड़ में फंसा तो नहीं है.

पुलिस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया, "नवीद पाकिस्तान के मुल्तान का रहने वाला था. वह पाकिस्तान के मदरसे में अजमल कसाब के ग्रुप का हिस्सा था, जहां उसने हथियारों का प्रशिक्षण लिया था. वर्ष 2012 में नवीद अपने साथियों समेत सीमा पार करके कश्मीर में दाखिल हुआ था."

पुलिस ने बताया है कि मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं.

डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा है कि वो पाकिस्तान को नवीद जट का मृत शव लेने के लिए कहेंगे.

उन्होंने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि बीते दस महीनों में क़रीब 230 चरमपंथी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ों में मारे गए हैं. वहीं, बीते एक हफ़्ते में मुठभेड़ों में क़रीब 22 चरमपंथी मारे गए हैं.

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