स्तनपान के दौरान बच्चों की मौत का कारण क्या है?

  • 29 नवंबर 2018
नवजात शिशु इमेज कॉपीरइट Getty Images

केरल में बीते एक साल में छह बच्चों की मौत ब्रेस्टफ़ीड यानी स्तनपान के दौरान हो गई है. दो बच्चों की अटॉप्सी में ये बात साबित भी हो गई है.

बाकी चार बच्चों की मौत भी मां का दूध पीने के दौरान ही हुई लेकिन परिवारवालों के पोस्टमॉर्टम कराने से मना करने के कारण मौत के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है.

सबसे ताज़ा मामला एक सप्ताह पुराना है, जिसमें केरल के पालक्काड ज़िले के अटापड्डी में एक बच्चे की मौत मां का दूध पीने के दौरान हो गई.

यहां के गवर्नमेंट ट्राइबल स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के नोडल ऑफ़िसर आर प्रभुदास का कहना है कि बीते एक साल में 6 ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें दूध पीने के दौरान बच्चों की मौत हो गई.

लेकिन क्या बच्चों की मौत वाकई मां का दूध पीने से हो रही है?

जवाब है, नहीं...

मौत की वजह मां का दूध नहीं बल्कि दूध पिलाने का यानी ब्रेस्टफ़ीड कराने का तरीक़ा है.

Image caption बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड कराने की सही पोज़िशन कुछ ऐसी होनी चाहिए

दिल्ली स्थित पीडियाट्रिशियन और चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर दिनेश सिंघल का कहना है, "बच्चों की मौत की वजह मां का दूध तो नहीं हो सकता. हां, ये हो सकता है कि ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान मां से कुछ लापरवाही हुई हो और उस वजह से बच्चे की मौत हो गई हो."

डॉ. सिंघल का कहना है, "सबसे पहले लोगों को ये समझने की ज़रूरत है कि इन मौतों का ब्रेस्टफ़ीड से सीधे तौर पर कुछ लेना-देना नहीं है."

"दरअसल, कई बार होता ये है कि मां जब बच्चे को दूध पिला रही होती है तो दूध बच्चे की फ़ूड पाइप (खाने की नली) में जाने की बजाय विंड पाइप (सांस की नली) में चला जाता है, जिसे ट्रैकिया कहते हैं. विंड पाइप से ये दूध फेफड़ों में चला जाता है, जिससे बच्चे की मौत हो सकती है."

Image caption ब्रेस्टफ़ीड कराने के लिए तकिए या कुशन के सहारे का इस्तेमाल करें

डॉ. सिंघल का कहना है कि डिलीवरी के बाद हर मां को बच्चे को सही तरीके से ब्रेस्टफ़ीड कराने की जानकारी दी जाती है. मां को बताया जाता है कि ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान बच्चे को कभी भी स्ट्रेट यानी सीधी पोज़िशन में न रखें.

वो मानते हैं कि ब्रेस्टफ़ीड कराने से जुड़ी सबसे ज़्यादा परेशानी तब आती है जब मांएं सोकर दूध पिलाती हैं.

ये कई मामलों में ख़तरनाक हो सकता है. इससे दूध सांस की नली में जाने की आशंका होती है जिससे बच्चे की जान को ख़तरा हो सकता है.

क्या कोई और कारण भी हो सकता है?

इस पर डॉ. सिंघल कहते हैं कि कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चे को जन्म देने के दौरान मां को कोई संक्रामक बीमारी हो, जो आगे चलकर बच्चे को भी हो जाए और फिर उस कारण बच्चे की मौत हो जाए.

एनएचएस (अमरीकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संस्था) के अनुसार, पहली बार मां बनी औरतों के लिए ब्रेस्टफ़ीड कराना थोड़ा मुश्किल और अजीब हो सकता है. लेकिन, इसमें डरने जैसा कुछ भी नहीं है. ये एक ऐसी प्रक्रिया है जो बच्चा और मां साथ-साथ सीखते हैं.

मां अपने और बच्चे की सहूलियत के हिसाब से बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड करा सकती है लेकिन ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

एनएचएस के अनुसार स्तनपान कराते वक्त इन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए-

  • क्या आप आरामदेह स्थिति में हैं? मां का कम्फ़र्टेबल होना सबसे ज़रूरी है. ज़रूरी हो तो तकिये या कुशन का इस्तेमाल कर सकते हैं. मां की बांहें और कंधे आराम की मुद्रा में होने चाहिए.
  • क्या आपके बच्चे का सिर और शरीर एक सीध में है?
  • बच्चे की गर्दन, कंधे और पीठ को अपने हाथ का सहारा दें.
  • ब्रेस्टफ़ीड कराने के लिए बच्चे की ओर झुकें नहीं.
  • सबसे पहले निप्पल को बच्चे की नाक के पास ले जाएं और बच्चे को कोशिश करने दें कि वो अपना पूरा मुंह खोलें.
इमेज कॉपीरइट Getty Images

कुछ और ज़रूरी बातें

गर्भवती महिलाओं के लिए पैरेंटक्राफ़्ट क्लासेज़ भी होती हैं, जिनमें उन्हें बच्चे को जन्म देने से लेकर उनकी परवरिश तक की ज़रूरी बातें सिखाई और बताई जाती हैं. यहां मुख्य तौर पर बच्चे की देखभाल और उसका खानपान, प्रेग्नेंसी के दौरान स्वस्थ रहना और लेबर पेन को किस तरह झेलना है, सिखाया जाता है.

हर नवजात बच्चे के लिए मां का दूध ज़रूरी है. ये उसके विकास के लिए आवश्यक है. आमतौर पर दुनिया की हर मां अपने बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड करा सकती है लेकिन कई बार किसी संक्रमण या दूसरी वजह से बच्चे को मां का दूध नहीं मिल पाता.

डिलीवरी के बाद, मां के स्तनों में आने वाले पहले दूध को कोलोस्ट्रम कहते हैं. यह पीले रंग का गाढ़ा, चिपचिपा-सा पदार्थ होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी रिपोर्ट्स के अनुसार इसे बच्चे के लिए सबसे ज़रूरी बताया गया है. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस पहले दूध के मिलने से बच्चे की उम्र बढ़ जाती है और उसमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

आमतौर पर बच्चे को छह महीने तक ब्रेस्टफ़ीड कराना ज़रूरी बताया जाता है लेकिन छह महीने के बाद भी ब्रेस्टफ़ीड कराया जा सकता है लेकिन इसके साथ ही बच्चे को ऊपरी आहार भी देना शुरू कर देना चाहिए.

डॉ. सिंघल मानते हैं कि बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान एक बात का और ध्यान रखना चाहिए कि मां बच्चे को बीच में डकार दिला दे.

इमेज कॉपीरइट Alamy

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार...

  • बच्चे के जन्म के शुरुआती छह महीनों तक बच्चे के लिए ब्रेस्टफ़ीड बहुत ज़रूरी है.
  • ब्रेस्टफ़ीड बच्चे को शुरुआती संक्रमण और बीमारियों से सुरक्षित करता है.
  • ये सिर्फ़ बच्चे के लिए नहीं बल्कि मां के लिए भी फ़ायदेमंद है.
  • इसका फ़ायदा बच्चे को लंबे समय तक मिलता है.
  • बाज़ार में बिकने वाले फ़ार्मूला मिल्क में वो एंटी-बायोटिक्स नहीं होते हैं जो मां के दूध में होते हैं.
  • एचआईवी से पीड़ित मां के ब्रेस्टफ़ीड कराने से बच्चे को भी एचआईवी हो सकता है लेकिन इस ख़तरे को दवा के इस्तेमाल से रोका जा सकता है.

कितनी जल्दी-जल्दी बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड कराना ठीक है ?

पहले सप्ताह में बच्चे को बहुत जल्दी-जल्दी दूध की ज़रूरत होती है. बच्चे को लगभग हर घंटे या दो घंटे में मां का दूध चाहिए होता है.

ऐसे में जब भी बच्चे को भूख लगे तो उसे दूध पिलाएं लेकिन इस बात का ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि बच्चे को ज़रूरत से ज़्यादा दूध न पिलाएं.

कैसे जानें की बच्चा भूखा है...

  • बच्चा बेचैन नज़र आएगा
  • बच्चा अपनी उंगलियां मुंह में डालने लगेगा
  • मुंह से कुछ आवाज़ें निकालने लगेगा
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
क्या आपने अपने बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया था?

क्यों फायदेमंद है मां का दूध

बच्चे के लिए मां का दूध सिर्फ़ पेट भरने का काम नहीं करता बल्कि ये बच्चे की सेहत के लिए भी बहुत ज़रूरी है.

आमतौर पर तो बच्चे को छह महीने तक ब्रेस्टफ़ीड कराने की सलाह दी जाती है लेकिन आगे भी जब तक बच्चा ब्रेस्टफ़ीड करे, उसके लिए फ़ायदेमंद है.

मां का दूध बच्चे को इन ख़तरों से बचाता है-

  • कई तरह के संक्रमण से
  • डायरिया और उल्टी-दस्त से
  • सडन इन्फ़ेन्ट डेथ सिंड्रोम (SIDS)
  • ल्यूकेमिया
  • मोटापा
  • दिल से जुड़ी बीमारियों से
इमेज कॉपीरइट Getty Images

मां के लिए भी फ़ायदेमंद है ब्रेस्टफ़ीड कराना

ब्रेस्टफ़ीड कराना सिर्फ़ बच्चे के लिए ही फ़ायदेमंद नहीं है, इसका फ़ायदा मां को भी मिलता है. ब्रेस्टफ़ीड कराने से मां के लिए स्वास्थ्य से जुड़े ये ख़तरे कम हो जाते हैं..

  • ब्रेस्ट कैंसर होने का ख़तरा
  • ओवेरियन कैंसर होने का ख़तरा
  • ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा
  • कार्डियोवस्क्युलर डिज़ीज़
  • मोटापा

इन तमाम फ़ायदों के बावजूद ब्रेस्टफ़ीड को लेकर बहुत से भ्रम भी हैं. पहला भ्रम तो यही है कि ब्रेस्टफ़ीड कराने से स्तन शिथिल हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. हां, ये ज़रूर है कि प्रेग्नेंसी की वजह से उन लिगामेंट्स में खिंचाव आ जाता है जो स्तनों को सपोर्ट करते हैं. ऐसे में ब्रेस्टफ़ीड कराने का शिथिलता से कोई संबंध नहीं है.

दूसरा भ्रम ये है कि फ़ॉर्मूला मिल्क भी उतना ही फ़ायदेमंद होता है जितना मां का दूध लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि ये सच नहीं है.

इसी तरह के कई और भ्रम भी हैं लेकिन सच्चाई यही है कि ब्रेस्टफ़ीड कराना सुरक्षित और सेहतमंद है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार