कांग्रेस की मीटिंग में 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे' का सच

  • 2 दिसंबर 2018
राजसमंद में बैठक इमेज कॉपीरइट Facebook

विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र कई तरह के सच्चे-झूठे संदेश सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हैं. ऐसी ख़बरों का सच पता लगाने के लिए एक ख़ास प्रोजेक्ट शुरु किया गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है 'एकता न्यूज़रूम'.

इसके तहत चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया के ज़रिए वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों की पड़ताल कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की गई है.

कांग्रेस की मीटिंग में 'पाक नारा' - फ़ेक

राजस्थान में एक पुरानी तस्वीर व्हॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर तेज़ी से शेयर की जा रही है.

शुक्रवार को राजस्थान में ट्विटर पर जो भी बड़े ट्रेंड्स रहे, उनके साथ जोड़कर भी इस तस्वीर को शेयर किया गया.

दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले कुछ फ़ेसबुक पन्नों पर एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है. वीडियो के साथ लिखा गया है कि इसमें 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लग रहे हैं.

ये वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया है, "राजसमंद ज़िले में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे".

वीडियो एक मीटिंग के दौरान रिकॉर्ड किया गया है और इसमें कुछ लड़के नारेबाज़ी करते हुए दिखाई दे रहे हैं. एक बैनर भी दिख रहा है, जिस पर "नगर कांग्रेस कमेटी- राजसमंद" लिखा हुआ है.

वीडियो को पहली बार सुनने में लगता है कि लड़के "पाकिस्तान ज़िंदाबाद" जैसा ही कुछ बोल रहे है. इस वीडियो में लड़के और नारे भी लगा रहे हैं.

"कांग्रेस की मीटिंग में लगे पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे" इस मेसेज के साथ इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.

वीडियो को कांग्रेस समर्थित पेज और कांग्रेस के नेताओं के पेज पर भी शेयर जा रहा है. और साथ में लिखा जा रहा है, "भाजपा वाले दुष्प्रचार पर उतरे हैं, 'भाटी साहब ज़िंदाबाद' के नारे को 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा बताकर सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं."

हमने इस वीडियो की पड़ताल की तो पता चला कि ये वीडियो 25 नवंबर को दोपहर के वक़्त रिकॉर्ड किया गया था.

25 नवंबर को राजसमंद ज़िले के कांकरौली में गोपाल कृष्ण वाटिका में एक मीटिंग का आयोजन किया गया था. ये वीडियो उसी मीटिंग का है.

हमने इस वीडियो की हक़ीक़त जांचने के लिए इस वीडियो का फ़्रेम बाइ फ़्रेम ऑडियो एनालिसिस किया, जिससे हमें पता चला कि इस वीडियो में 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के बजाय 'भाटी साहब ज़िंदाबाद' के नारे लगाए गए थे.

जल्दबाज़ी में की गई नारेबाज़ी के कारण भाटी साहब की बजाय पाकिस्तान जैसा कुछ सुनाई ज़रूर देता है. लेकिन वीडियो के साथ 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का कैप्शन जोड़कर इसे अलग ही संदर्भ दे दिया गया है.

हमने ये भी पता लगाया कि जिन 'भाटी साहब' के नाम से नारे लगाये जा रहे हैं, वे नारायण सिंह भाटी हैं जो राजसमंद क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं.

राजस्थान में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है और सूबे में चुनाव प्रचार जारी है.

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क्या वाकई मोदी सरकार ने मस्जिद तुड़वाई? - फ़ेक

कुछ फ़ेसबुक पेज और ग्रुप में चार तस्वीरें शेयर की जा रही हैं. ये तस्वीरें इलाहाबाद की बताई जा रही हैं.

इन तस्वीरों के साथ कैप्शन में लिखा है, "ये इलाहाबाद की मस्जिद है. इस मस्जिद पर 20 साल से कोर्ट में केस चल रहा था. कल मोदी सरकार ने इसे तुड़वा दिया और किसी भी मीडिया संस्थान ने इसे नहीं दिखाया. अगर तुम सच्चे मुसलमान हो और तुम्हारे अंदर ज़रा भी ईमान है, तो इसे इतना शेयर करें कि मोदी की नींद हराम हो जाए."

इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने के बाद इलाहाबाद का राजनीतिक माहौल पहले से ही कुछ गर्म-सा है.

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से में जब देश के कुछ राज्यों में विधानसभा के चुनाव चल हो रहे हैं, तब इलाहाबाद के नाम से ये तस्वीरें शेयर की जा रही हैं. मस्जिद तोड़ने के लिए मोदी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

सोशल मीडिया पोस्ट में चार तस्वीरें हैं. इनमें से एक तस्वीर में आधी टूटी हुई इमारत दिखाई दे रही है जिसे टूटी हुई मस्जिद का ढांचा माना जा रहा है.

बाकी की तीन तस्वीरों में पुलिस कुछ मुस्लिम लोगों को पीटती दिख रही है.

ये पोस्ट "नबी का दीवान जो भी ग्रुप में एड होगा वो अपने 70 दोस्तों को एड करेगा" नाम के ग्रुप में शेयर कि गई थी, ऐसा एक स्क्रीन ग्रेब से प्रतीत होता है. लेकिन ये स्क्रीन ग्रैब एडिट की गई हो, ऐसा लग रहा है.

इन चार तस्वीरों की पड़ताल करने पर हमें मालूम हुआ कि इसमें से एक भी तस्वीर इलाहाबाद की नहीं है.

इसमें से पहली तस्वीर 6 साल पुरानी है और इसका मस्जिद तोड़ने के कोई संबंध नहीं है. ये दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में आंदोलनकारी और पुलिस के बीच हुए संघर्ष की तस्वीर है.

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दूसरी और तीसरी तस्वीर कश्मीर में हुए एक संघर्ष की है. तीसरी तस्वीर से जुड़ी कई तस्वीरें हमें गेटी इमेजेज़ (फ़ोटो एजेंसी) पर भी देखने को मिली.

इस के साथ लिखा है कि ये तस्वीर 26 सितंबर 2012 में जम्मू-कश्मीर में नर्सिंग के विद्यार्थियों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन की है.

आख़िरी तस्वीर में टूटी हुई इमारत का एक ढांचा दिख रहा है. तस्वीर की जाँच करने पर पता चला कि ये इलाहाबाद की नहीं है. वास्तव में ये तस्वीर कर्नाटक की है.

ये तस्वीर और तस्वीर में दिख रही इमारत के कुछ वीडियो हमें कर्नाटक के स्थानीय मीडिया में भी मिले.

इन वीडियो में दिखाया गया है यह इमारत कर्नाटक के रायचूर की है, जिसे रास्ता चौड़ा करते वक़्त तोड़ा गया था. हालांकि इस इमारत के मस्जिद होने पर भी शक़ जताया गया है.

लेकिन अलग-अलग समय और स्थल की इन तस्वीरों को एकसाथ रखकर इलाहाबाद की तस्वीरें बताई जा रही हैं, और इसे इलाहाबाद में तोड़ी गई मस्जिद बताया जा रहा है.

ये दावा पूरी तरह से फ़र्ज़ी है.

(ये कहानी फ़ेक न्यूज़ से लड़ने के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट 'एकता न्यूज़रूम' का हिस्सा है.)

अगर आपके पास ऐसी ख़बरें, वीडियो, तस्वीरें या दावे आते हैं, जिन पर आपको शक़ हो तो उनकी सत्यता जाँचने के लिए आप उन्हें 'एकता न्यूज़रूम' को इस नंबर पर +91 89290 23625 व्हाट्सएप करें या यहाँ क्लिक करें.

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