विधानसभा चुनाव: राजस्थान और तेलंगाना में आज डाले जाएंगे वोट

  • 7 दिसंबर 2018
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राजस्थान में वसुंधरा राजे और तेलंगाना में केसीआर की सरकार की वापसी होगी या विदाई दोनों राज्य के लोगों को आज ये फ़ैसला करना है.

राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा के लिए एक ही दिन यानी शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे.

राजस्थान में कुल 200 सीटों में से 199 सीटों पर और तेलंगाना की कुल 119 सीटों के लिए मतदान होगा.

राजस्थान में जहां भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं. वहीं तेलंगाना में क्षेत्रीय दलों के बीच मुख्य मुक़ाबला माना जा रहा है.

जिन पांच राज्यों के लिए विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, उनमें से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और मिज़ोरम की आने वाली सरकारों का फ़ैसला ईवीएम में दर्ज़ हो चुका है.

सभी पांचों राज्यों के लिए वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होनी है. माना जा रहा है कि मंगलवार दोपहर तक राजनीतिक तस्वीर साफ़ हो जाएगी.

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राजस्थान विधान सभा 2018 चुनाव : एक नज़र

  • प्रदेश में कुल 200 विधानसभा सीटे हैं, जिनमें से 199 सीटों पर मतदान शुक्रवार को होगा.
  • चुनाव आयोग ने अलवर ज़िले की रामगढ़ सीट पर बीएसपी उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया है.
  • सभी सीटों पर वोटिंग ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के जरिए होगी.
  • मतदान सुबह आठ बजे शुरू होगा और शाम पांच बजे तक चलेगा.
  • चुनाव के मद्देनजर राज्यभर में करीब 52 हजार पोलिंग बूथ बनाए गए हैं.
  • चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस सहित कुल 88 पार्टियां हैं.
  • इन पार्टियों के कुल 2274 उम्मीदवार अपना भाग्य इन चुनावों में आजमा रहे हैं.
  • चुनाव आयोग के मुताबिक रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या करीब 4.75 करोड़ है.
  • इनमें से करीब 2.47 करोड़ पुरुष वोटर हैं. महिला वोटरों की संख्या 2.27 करोड़ है.
  • इस चुनाव में करीब 20 लाख युवा मतदाता पहली बार वोट करेंगे. इनमें सबसे ज्यादा संख्या जयपुर के युवा मतदाताओं की है.

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चुनाव से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में करीब 75 फीसदी वोटरों ने मतदान किया था. राज्य में कुल 47,223 पोलिंग बूथ बनाए गए थे.
  • कुल 200 सीटों पर भाजपा ने कुल 163 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं कांग्रेस को महज 21 सीटे ही मिली थीं.
  • बसपा के तीन उम्मीदवारों में पिछले चुनावों में जीत का परचम लहराया था. वहीं सात स्वतंत्र उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे थे.
  • 2008 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 78, कांग्रेस को 96 और अन्य को 26 सीटें मिली थी.

पार्टियों के दावें और हकीकत

  • 1998 के बाद से राजस्थान में कोई भी सरकार दूसरे कार्यकाल के लिए नहीं चुनी गई है.
  • भाजपा का दावा है कि ये इतिहास इस बार के चुनावों में बदल जाएगा और भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी.
  • वहीं कांग्रेस को यकीन है कि लोगों में सरकार के कामकाज के प्रति रोष है और उसे इसका फायदा मिलेगा और वो सत्ता पर काबिज़ होगी.
  • कांग्रेस ने किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाया है. लेकिन ये समझा जा रहा है कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो उनके सामने दो चेहरे होंगे- सचिन पायलट और अशोक गहलोत.
  • वहीं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ही हैं.

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चुनावी सभाएं

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ राज्य में सभी पार्टियों ने मैराथन चुनावी सभाएं की.

भाजपा ने राज्य में कुल 223 जनसभाएं की, जिसमें पार्टी के 15 दिग्गजों ने भाग लिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 12 जनसभाएं की. वहीं अमित शाह ने 20, योगी आदित्यनाथ ने 24 और राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 75 जनसभाएं की.

कांग्रेस जनसभाएं करने की दौड़ भाजपा से कहीं आगे रही. पार्टी ने राज्य में कुल 433 जनसभाएं की, जिसमें पार्टी के 15 दिग्गजों ने भाग लिया.

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नए खिलाड़ी, बाग़ी उम्मीदवार और मुद्दे

चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बाग़ी उम्मीदवार भी मैदान में हैं. इनमें भाजपा के चार मंत्री भी शामिल हैं.

नई बनी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और भारत वाहिनी पार्टी ने परस्पर समझ पैदा कर 123 उम्मीदवार खड़े किए हैं.

निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की इस नई पार्टी ने कुछ स्थानों पर मुक़ाबले को तिकोना बना दिया है.

बेनीवाल प्रभावशाली जाट समुदाय से आते हैं. उनकी पार्टी ने पचास से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं.

राज्य में अपनी ताज़पोशी की ख्वाहिश लेकर निकले भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने शुरू में विकास को मुद्दा बनाने की बातें कही, लेकिन देखते-देखते इसमें, मंदिर, जाति और धर्म-आस्था आ गए और बात बढ़ी तो गोत्र भी शामिल कर लिया गया.

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तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2018 : एक नज़र

  • आंध्र प्रदेश से टूट कर तेलंगाना राज्य का गठन जून 2014 में किया गया था.
  • यह दूसरी बार है जब यहां विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. यहां चुनाव मई 2019 में होने थे, पर इससे पहले ही विधानसभा भंग कर दी गई.
  • अब शुक्रवार को यहां दूसरी विधानसभा के गठन के लिए वोट डाले जाएंगे.
  • गठन के बाद हुए चुनावों में तेलंगाना राष्ट्र समिति ने सबसे ज्यादा सीटें जीत कर सरकार बनाई थी.
  • पार्टी के नेता चंद्रशेखर राव राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने.
  • यहां चुनावी मैदान में चंद्रशेखर की तेलंगाना राष्ट्र समिति, तेल्गु देशम पार्टी, कांग्रेस, तेलंगाना जन समिति, सीपीआई, एमआईएम और भाजपा हैं.
  • कांग्रेस ने यहां तेलुगू देशम पार्टी और दूसरी छोटी पार्टियों के साथ मिलकर पीपुल्स फ्रंट बनाया, जिसे चंद्रशेखर राव के सामने एक कड़ी चुनौती माना जा रहा है.
  • भाजपा यहां अकेले चुनाव लड़ रही है. 2014 के चुनावों में भाजपा और तेलुगू देशम पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था.
  • इस बार तेलंगाना के चुनावों में तीन दावेदार हैं, उनमें से भाजपा तीसरे नंबर पर है. दूसरे नंबर पर कांग्रेस गठबंधन है.
  • असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम हैदराबाद की सिर्फ 8 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इनमें से 7 पर वो 2014 में जीती थी.
  • हालांकि एआईएमआईएम के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने टीआरएस के लिए मुस्लिम इलाकों में प्रचार किया है.
  • राज्य में करीब 2.73 करोड़ वोटर हैं, इनमें से 1.38 करोड़ पुरुष हैं और 1.35 करोड़ महिला वोटर हैं. यहां कुल 1,164 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं.
  • 2014 के चुनावों में तेलंगाना राष्ट्र समिति ने कुल 63 सीटों पर जीत का परचम लहराया था. कांग्रेस 21 सीट और भाजपा 5 सीट जीतने में सफल रही थी.

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