क्या पाकिस्तान, भारत से करतारपुर की अदला-बदली करेगा

  • 15 दिसंबर 2018
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क्या पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक करतारपुर गुरुद्वारे को भारत लाना मुमकिन है?

इस गुरुद्वारे में सिखों के पहले गुरू नानकदेव महाराज ने अपने जीवन के 18 साल बिताए थे और हाल में भारत और पाकिस्तान के बीच गुरुद्वारे तक पहुंचने के लिए कोरिडोर बनाने की शुरुआत हुई है.

पंजाब सरकार ने इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को भारत का हिस्सा बनाने के लिए एक नई पहल की है. शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में करतारपुर कॉरिडोर को खोले जाने का स्वागत किया गया और पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे को भारत का हिस्सा बनाने के लिए पाकिस्तान के साथ ज़मीन की अदला-बदली का प्रस्ताव पास किया गया.

सर्वसम्मति से पास किए गए इस प्रस्ताव को पंजाब सरकार अब केंद्र के पास भेजेगी.

विधानसभा के सत्र के दौरान करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोले जाने को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र सरकार की प्रशंसा के लिए प्रस्ताव पेश किया गया.

इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान ये बात उठी कि अगर पाकिस्तान करतारपुर साहिब गुरुद्वारा भारत को दे दे तो भारत भी उसे ज़मीन दे देगा.

पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बीबीसी पंजाबी से कहा कि ज़मीन की अदला-बदली के बारे में 1969 में भी बात चली थी लेकिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ये बातचीत रुक गई.

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दोनों देशों की सरकारें लेंगी फ़ैसला?

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि विधानसभा में ज़मीन की अदला-बदली के बारे में प्रस्ताव पास किया गया है. ये अब केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा. इस मुद्दे पर फ़ैसला केंद्र सरकार और पाकिस्तान सरकार की ओर से लिया जाएगा.

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करतारपुर कॉरिडोर को भारत और पाकिस्तान के बीच 'ब्रिज ऑफ़ पीस' बताया.

हालांकि कुछ वक़्त पहले अमरिंदर सिंह ने कहा था कि करतारपुर कॉरिडोर खोलना आईएसआई की साज़िश का हिस्सा है. ये पाकिस्तान सेना की रची साज़िश है, जिसके लिए मोहरा नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया गया है.

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करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन समारोह

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा का नवजोत सिंह सिद्धू के साथ करतारपुर पर बात करना इस बात की पुष्टि करता है.

उन्होंने आरोप लगाया था कि करतारपुर के ज़रिए पाकिस्तान सूबे में चरमपंथ को बढ़ावा दे सकता है, इससे सभी को सावधान रहना चाहिए.

क्यों तैयार हुआ भारत?

भारत सरकार करतारपुर कॉरिडोर का काम शुरू करने के सिलसिले में कई महीनों तक इनकार की मुद्रा में ही थी. लेकिन फिर अचानक भारत सरकार इसके लिए तैयार हो गई, जिसके चलते पंजाब (भारत) के गुरदासपुर में मौजूद डेरा बाबा नानक से भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर साहिब कॉरिडोर के निर्माण के फ़ैसले पर मुहर लगा दी गई.

करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखने से कुछ दिन पहले पाकिस्तान स्थित चीन के वाणिज्य दूतावास में एक चरमपंथी हमला हुआ था. पाकिस्तान के कुछ मंत्रियों ने इस हमले के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया था.

वहीं भारत लगातार पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह अपनी ज़मीन पर चरमपंथी समूहों को पनाह देता है और भारत में माहौल बिगाड़ने की कोशिशें करता रहता है.

यहां तक कि करतारपुर कॉरिडोर के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को निमंत्रण भेजा था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था.

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कहां है करतारपुर साहिब गुरुद्वारा

करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है, लेकिन भारत से इसकी दूरी महज़ साढ़े चार किलोमीटर है.

मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे और उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे.

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पाकिस्तान: करतारपुर साहिब की क्या है अहमियत?

इसके साथ ही माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव ने आख़िरी सांस ली थी वहीं पर गुरुद्वारा बनाया गया था.

हाल ही में भारत और पाकिस्तान दोनों ने करतारपुर गलियारे को खोलने पर सहमति देते हुए अपनी-अपनी ओर कॉरिडोर का शिलान्यास किया है.

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