गोर्धन झड़ाफिया: मोदी विरोध से BJP के UP प्रभारी तक

  • 27 दिसंबर 2018
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Image caption गोर्धन झड़ाफिया

2019 लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 17 प्रदेशों के प्रभारियों का ऐलान किया है. इनमें सबसे ज़्यादा चर्चा गोर्धन झड़ाफिया की हो रही है, जिन्हें दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा के साथ उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है.

गोर्धन झड़ाफिया 2002 गुजरात दंगों के समय प्रदेश के गृह मंत्री थे और बाद में उन्होंने भाजपा से अलग होकर अपनी पार्टी बना ली थी.

भाजपा से बाग़ी होने के बाद झड़ाफ़िया ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ ख़ूब बयान दिए थे. ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश का प्रभार मिलना राजनीतिक शक्ति के केंद्र में उनकी वापसी की तरह है.

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विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता थे

झड़ाफ़िया की सियासी ज़िंदगी की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से हुई थी. बीजेपी में शामिल होने से पहले करीब पंद्रह साल तक वो वीएचपी से ही जुड़े रहे थे.

गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार राजीव शाह बताते हैं, "गोर्धन झड़ाफ़िया वीएचपी में होने की वजह से प्रवीण तोगड़िया के काफ़ी करीबी थे."

गोर्धन झड़ाफ़िया के पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की डिग्री है और वह हीरा उद्योग से जुड़े हुए हैं. 1995 में पहली बार वो भाजपा के टिकट पर चुनकर विधानसभा पहुंचे थे.

जब मोदी सरकार से बाहर हुए झड़ाफिया

2002 के गुजरात दंगों के समय झड़ाफिया प्रदेश के गृहमंत्री थे. इन दंगों में उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे.

दंगों की तफ़्तीश करने वाली एसआईटी ने भी उनकी भूमिका की जांच की थी. जांच में कुछ ख़ास नहीं मिला लेकिन उन्हें गृहमंत्री के पद से हटना पड़ा.

प्रदेश की कैबिनेट में उनकी जगह गृहमंत्री का पद अमित शाह को मिला.

इसके बाद मंत्री परिषद ने गोर्धन झड़फ़िया को वापस लेने का प्रस्ताव भी रखा. लेकिन झड़ाफिया ने कैबिनेट में लौटने से इनकार कर दिया.

इसके बाद जल्द ही उनकी गिनती मोदी विरोधियों में होने लगी.

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जब झड़ाफ़िया बैठक में रो पड़े

वरिष्ठ पत्रकार राजीव शाह बताते हैं, "नरेंद्र मोदी और गोर्धन झड़ाफ़िया के बीच मतभेद थे और वो इतने बढ़ गए कि उन्होंने मोदी पर संगीन आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार उनका फ़ोन टैप कर रही है. उन्हें लगता था कि नरेंद्र मोदी उनके ख़िलाफ़ कोई साज़िश रच रहे हैं."

2005 में विधायकों की बैठक में बोलते हुए झड़ाफिया रो पड़े थे.

गोर्धन झड़ाफ़िया को प्रवीण तोड़गिया के अलावा गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का भी करीबी माना जाता है.

बीजेपी से निकलने के बाद झड़ाफ़िया ने महागुजरात जनता पार्टी की स्थापना की थी. बाद में अपनी पार्टी का उन्होंने मोदीविरोधी कहे जाने वाले केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी में विलय कर दिया था.

इस दौरान उन्होंने मोदी के विरोध में कई बयान दिए थे. 2007 में गोर्धन झड़फ़िया ने कहा था, "नरेंद्र मोदी ये सोचते हैं कि वो विपक्ष और लोकतंत्र से भी ऊपर हैं."

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पाटीदारों को एकजुट करने में भूमिका?

ऐसा माना जाता है कि पाटीदार आंदोलन के पीछे भी गोर्धन झड़ाफ़िया की अहम भूमिका रही है.

हालांकि इसके कोई सार्वजनिक सबूत नहीं हैं. लेकिन ये आम धारणा है कि हार्दिक पटेल को कद्दावर नेता बनाने में झड़ाफ़िया ने अहम रोल अदा किया है.

झड़ाफ़िया सौराष्ट्र लेउआ पटेल समाज के कई संगठनों में अहम पदों पर रहे हैं और इस समाज में उनकी ख़ासी पैठ है.

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झड़ाफ़िया की घरवापसी

साल 2014 में केशुभाई और गोर्धन झड़ाफ़िया की गुजरात परिवर्तन पार्टी का बीजेपी में विलय हो गया. कई साल की कोशिश के बाद भी गुजरात परिवर्तन पार्टी चुनावी राजनीति में कुछ ख़ास नहीं कर पाई थी.

गोर्धन झड़ाफ़िया और केशुभाई के ख़ास माने जाने वाले लोगों का भी चुनावों में प्रदर्शन काफ़ी ख़राब रहा था.

बीजेपी में वापसी के बाद झड़ाफ़िया को कोई ख़ास स्थान नहीं दिया गया. उन दिनों ये माना जाने लगा था कि झड़ाफ़िया का सियासी करियर लगभग ख़त्म हो गया है.

लेकिन फिर साल 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रभारियों की सूची आई और गोर्धन झड़ाफ़िया अचानक दिल्ली की सियासी चर्चाओं का हिस्सा बन गए.

भाजपा की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज़ में उत्तर प्रदेश प्रभारियों में झड़ाफिया का नाम सबसे ऊपर है. उनके बाद दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा का नाम है.

ख़ास बात यह है कि इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश का प्रभार अमित शाह के पास था.

साल 2002 में गोर्धन झड़ाफ़िया को हटाने के बाद अमित शाह को गुजरात के गृह मंत्री बनाया गया था और अब 2014 में अमित शाह के पद पर 2019 के लिए गोर्धन झड़ाफ़िया को लाया गया है.

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