तीन तलाक़ बिल लोकसभा में पास, कांग्रेस का बहिष्कार

  • 27 दिसंबर 2018
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लोकसभा ने तीन तलाक़ पर लाए गए संशोधित विधेयक को पारित कर दिया है.

इस बिल में एक बार में तीन तलाक़ को ग़ैर-क़ानूनी क़रार देने और इसे तोड़नेवाले पति को तीन साल की सज़ा दिए जाने का प्रस्ताव पास किया गया है. लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 245 और विपक्ष में 11 वोट पड़े.

इस बिल को कानून की शक्ल देने के लिए राज्यसभा में पास करवाना होगा.

लोकसभा में तीन तलाक़ बिल पर वोटिंग का कांग्रेस और AIADMK ने बहिष्कार किया. वे इस बिल को विचार के लिए संसद की संयुक्त चयन समिति के पास भेजने की मांग कर रहे थे. विपक्ष इस कानून में सज़ा का प्रावधान रखने का विरोध भी कर रहा था.

विपक्ष की दलील थी कि ये विधेयक सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संविधान के ख़िलाफ़ है. ऐसे में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.

मगर सरकार का कहना था कि ये विधेयक महिलाओं के अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए लाया गया है और सरकार विपक्ष की आपत्तियों को सुनने और उन पर चर्चा के लिए तैयार है.

कांग्रेस समेत ज़्यादातर विपक्षी पार्टियाँ तीन तलाक़ को अपराध क़रार दिए जाने का ये कहते हुए विरोध कर रही हैं कि किसी और धर्म में तलाक़ के मामले में ऐसा नहीं होता.

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तीन तलाक़ बिल: अब तक कब-क्या

पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ को अवैध क़रार दे दिया था.

इसके बाद सरकार तीन तलाक़ पर संसद में एक विधेयक लेकर आई.

लोकसभा में ये बिल पास हो गया था मगर राज्यसभा में इसके पारित नहीं होने से इसे क़ानून नहीं बनाया जा सका.

इसके बाद सरकार इसी साल सितंबर महीने में तीन तलाक़ पर अध्यादेश ले आई, जिसे राष्ट्रपति ने भी मंज़ूरी दे दी.

ये अध्यादेश संसद के शीत सत्र शुरू होने के छह हफ़्तों तक मान्य रहता और इसलिए सरकार इससे पहले इसे लोकसभा से पारित करवाना चाहती थी.

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कानून के प्रावधानों पर एक नज़र

  • तीन तलाक़ कानून में तीन साल जेल का प्रावधान किया गया है.
  • इसके तहत तीन तलाक़ गैरज़मानती होगा और अभियुक्त को ज़मानत थाने में नहीं दी जा सकती.
  • सुनवाई से पहले ज़मानत के लिए उसे मजिस्ट्रेट के पास जाना होगा. यहां पत्नी की सुनवाई के बाद ही पति को ज़मानत मिल सकेगी.
  • मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि ज़मानत तभी दी जाए जब पति विधेयक के अनुसार पत्नी को मुआवज़ा देने पर सहमत हो. विधेयक के अनुसार मुआवज़े की राशि मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी.

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'इंस्टेट ट्रिपल तलाक़' क्या है?

तलाक़-ए-बिद्दत या इंस्टेंट तलाक़ दुनिया के बहुत कम देशों में चलन में है, भारत उन्हीं देशों में से एक है.

एक झटके में तीन बार तलाक़ कहकर शादी तोड़ने को तलाक़-ए-बिद्दत कहते हैं.

ट्रिपल तलाक़ लोग बोलकर, टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए या व्हॉट्सऐप से भी देने लगे हैं.

एक झटके में तीन बार तलाक़ बोलकर शादी तोड़ने का चलन देश भर में सुन्नी मुसलमानों में है लेकिन सुन्नी मुसलमानों के तीन समुदायों ने तीन तलाक़ की मान्यता ख़त्म कर दी है.

हालांकि देवबंद के दारूल उलूम को मानने वाले मुसलमानों में तलाक़-ए-बिद्दत अब भी चलन में है और वे इसे सही मानते हैं.

इस तरीक़े से कितनी मुसलमान महिलाओं को तलाक़ दिया गया इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है.

तीन तलाक़ के बारे में ज़रूरी बातें जो आपको जाननी चाहिए

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भारत में सभी मुसलमान ट्रिपल तलाक़ को मानते हैं?

एक झटके में तीन बार तलाक़ बोलकर शादी तोड़ने का चलन देश भर में सुन्नी मुसलमानों में है लेकिन सुन्नी मुसलमानों के तीन समुदायों ने तीन तलाक़ की मान्यता ख़त्म कर दी है.

हालांकि देवबंद के दारूलउलूम को मानने वाले मुसलमानों में तलाक़-ए-बिद्दत अब भी चलन में है और वे इसे सही मानते हैं.

इस तरीक़े से कितनी मुसलमान महिलाओं को तलाक़ दिया गया इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है.

अगर एक ऑनलाइन सर्वे की बात करें तो एक प्रतिशत से भी कम महिलाओं को इस तरह तलाक़ दिया गया, हालांकि सर्वे का सैम्पल साइज़ बहुत छोटा था.

भारत के ग्रामीण इलाक़ों में तीन तलाक़ का चलन शहरों के मुक़ाबले ज़्यादा है.

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