कोटा: कोचिंग सेंटरों में छात्र क्यों कर रहे आत्महत्या

  • 27 दिसंबर 2018
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कोई स्तब्ध है और कोई शोकमग्न. राजस्थान के कोटा में पिछले चार दिन में कोचिंग ले रहे तीन छात्रों ने ख़ुदकुशी कर ली.

पुलिस के अनुसार कोटा में कोचिंग विद्यार्थियों की आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. इस साल अब तक 19 छात्र मौत को गले लगा चुके है. मनोचिकित्सक कहते हैं कि तनाव के चलते प्रतियोगी छात्र ऐसे कदम उठा रहे है.

इन घटनाओं से कोचिंग इंडस्ट्री में उदासी का आलम है. अभिभावक मानते हैं कि इंजीनियर और डॉक्टर बनने का रास्ता कोटा होकर जाता है. इसीलिए देश भर से छात्र कोटा में इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश की तैयारी के लिए कोटा पहुंचते है. हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख छात्र-छात्राएं चंबल नदी के तट पर बसे कोटा का रुख करते है.

जानकारों के मुताबिक कोटा में कोचिंग इंडस्ट्री दो हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का उद्योग है. मगर अब छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. कोचिंग संस्थान चलाने वालों को समझ में नहीं आ रहा है कि इन घटनाओं को कैसे रोकें.

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कोटा में पुलिस, प्रशासन, कोचिंग संस्थान और अन्य संगठनों ने छात्र-छात्राओं में पढ़ाई का तनाव कम करने के बहुत से प्रयास किए. मगर घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही.

कोटा में एक बड़े संस्थान से जुड़े नितेश शर्मा कहते है, ''हम भी उतने ही चिंतित है जितने अभिभावक. संस्थानों ने बच्चों में सकारात्मक भाव बनाए रखने के लिए काफी कुछ किया है. संस्थानों ने अध्यात्म और योग गुरुओं से भी मदद ली है.''

वे बताते है कि श्री श्री रविशकर और बाबा रामदेव भी कोटा में विद्यार्थियों से सवांद कर चुके है. अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मैरी कॉम भी कोटा में छात्र-छात्राओं के बीच आ चुकी है. आगे भी प्रयास जारी है.

कोटा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मील ने बीबीसी से कहा, ''इन घटनाओं की संख्या बढ़ी है. हालांकि पुलिस और प्रशासन कोचिंग संस्थानों के साथ मिल कर बच्चों में नकारात्मकता को दूर करने का यत्न कर रहे हैं. लेकिन यह समस्या एक चुनौती बनी हुई है.''

कोटा के अन्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा ने बताया कि वर्ष 2017 में ख़ुदकुशी के सात मामले सामने आये थे. इसके पहले वर्ष 2016 में आत्महत्या की 16 घटनाएं हुई और इस साल अब तक 19 घटनाएं दर्ज़ की जा चुकी है.

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इसी में आगे जोड़ते हुए मील कहते है, ''हाल ही में पुलिस प्रशासन ने संबंधित पक्षों के साथ बैठकें की है. हमने इज़ी एग्ज़िट पॉलिसी शुरू करवाई है. ताकि अगर कोई छात्र कोर्स के बीच में ही छोड़कर जाना चाहता है या उसका मन कोर्स करने का नहीं है तो वो आसानी से जा सकता है.''

मील बताते हैं कि इसके तहत छात्र जितने कोचिंग से जुड़ा होगा उतना ही पैसा लिया जाएगा और बाकि का एडवांस पैसा वापस कर दिया जायेगा. क्योंकि कई बार छात्र एडवांस फीस जमा होने के दबाव में कोर्स को बीच में छोड़ने की हिम्मत नहीं कर पाते.

पुलिस बताती है कि कई बार आत्महत्या करने वाले छात्र सुसाइड नोट में सब बयां कर के जाते हैं लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता.

पुलिस ने संस्थानों, हॉस्टल और संबंधित पक्षों से संपर्क बनाया हुआ है. इनके साथ-साथ समय-समय पर बैठक की जाती है और संस्थानों में छात्रों के लिए काउंसलर रखे गए हैं ताकि वे छात्रों से तनाव के समय बात कर सके.

हॉस्टल बचा सकते हैं जान!

हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष जैन बीबीसी को बताते हैं कि हाल की घटनाओ में यह देखा गया है कि छात्र-छात्राओं ने पंखे से लटक की जान दी है. इसे रोकने के लिए हमने हैंगिग फ्री डिवाइस तैयार की है. हम चाहते कि सभी हॉस्टल इसका इस्तेमाल करें और ये महज साढ़े चार सौ रुपये का ही है.

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जैन बताते है कि ये डिवाइस पंखे पर लगाई जाती है. इसमें बीस किलो से ज्यादा का वज़न लटकते ही पंखा नीचे की तरफ़ आ जायेगा. और पंखे से लटकने वाला व्यक्ति या छात्र हादसे से बच जायेगा.

मनीष जैन का कहना है कि उनके संगठन में दो हज़ार हॉस्टल पंजीकृत हैं. लेकिन पीजी (पेइंग गेस्ट) की संख्या और भी अधिक है. यहां बिहार और यूपी के छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है. घर से दूरी और परिवार से कई दिनों तक बात न होने पर छात्र निराश हो जाते हैं और उनके मन में अपने आप को ख़त्म करने के विचार आते हैं.

कोटा में एक कोचिंग संस्थान के प्रमोद महेश्वरी बताते हैं कि हम छात्रों के सामने डॉक्टर और इंजीनियरिंग के अलावा भी विकल्प रखते हैं. ताकि छात्र अगर इन क्षेत्र में सफल नहीं हो पाता तो उसके पास एक अन्य विकल्प भी हो और उसे असफल होने की निराशा भी न हो.

छात्रों के आत्महत्या करने के कारण

कोटा मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा में सीनियर प्रोफ़ेसर डॉक्टर भरत सिंह शेखावत ने बीबीसी से कहा, ''छात्र-छात्राओं की आत्महत्या जैसे कदम उठाने के पीछे कई कारण है. इन कारणों की तह में जाकर बहुत कुछ किया जा सकता है. उनके पास अब भी हर दिन दो-तीन विद्यार्थी तनाव और उलझन की शिकायत लेकर आते हैं.''

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कुछ समय पहले डॉक्टर शेखावत ने 'होप सोसाइटी प्रोजेक्ट' भी शुरू किया था. इसके साथ एक हेल्पलाइन भी है. ताकि छात्र तनाव की सूरत में फ़ोन पर बात कर सहज हो सके.

डॉक्टर शेखावत कहते हैं, ''ऐसे माहौल में यह ज़रूरी है कि छात्र को कोई ऐसा मिले जिससे वो दिल खोल कर अपनी बात कह सके. परिवार या माता-पिता की पसंद के कारण कई बार छात्र ऐसा क्षेत्र चुन लेते हैं जिनमें उनकी रुचि नहीं होती. दूसरा ये कि कई बार छात्र ज्यादा महंगी फ़ीस के बारे में सोचने लगते हैं, जिसके लिए उनके घरवालों ने काफ़ी खर्च किया होता है. इन सब के कारण बच्चे तनाव में आ जाते हैं.''

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भारतीय छात्र की याद में स्कॉलरशिप

डॉक्टर शेखावत का कहना था कि कोचिंग संस्थानों को प्रवेश के वक्त छात्र को जांचना चाहिए कि वे उस क्षेत्र के लिए सही हैं या नहीं. अगर छात्र की उसमें रुचि न हो तो वो उन्हें दाखिला न दें या कोई और विकल्प बताएं.

कोचिंग संस्थान से जुड़े नितेश शर्मा कहते हैं, ''हम अच्छा माहौल देने का प्रयास कर रहे है. सप्ताह में एक दिन छात्र के लिए अवकाश भी रखा जाता है. उन्हें डॉक्टर या इंजीनियर के आलावा भी विकल्प बताते हैं कि अन्य विकल्पों में भी अच्छा भविष्य बना सकते हैं.''

कोटा का कारोबार

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कोटा में कोचिंग इंडस्ट्री लगभग ढाई दशक पुरानी है. किसी समय में कोटा बड़े कल-कारखानों और धुआं निकालती फैक्ट्रियों की चिमनियों के लिए जाना जाता था. मगर जब इन कारखानों में मंदी आई और मशीनें बेजान हो गई तो कोचिंग इंडस्ट्री का कारोबार बढ़ा.

अब कोटा में कोचिंग संस्थानों की बहार है. कमोबेश हर राज्य के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कोटा में एक मुकम्मल भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है. जानकर कहते हैं कि आईआईटी में प्रवेश के लिए लगभग बारह लाख छात्र-छात्राओं के इम्तिहान की राह यहां से गुजरती है. लेकिन यहां कुल सीट लगभग ग्यारह हजार ही है.

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