बुलंदशहर हिंसा का बदल गया मुख्य अभियुक्तः पांच बड़ी ख़बरें

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार

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बुलंदशहर हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध की गोली मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने एक नई गिरफ़्तारी की है.

गिरफ़्तार प्रशांत नट नामक इस शख्स का नाम पहले से दर्ज एफ़आईआर में नहीं था.

अब तक हत्या के इस मामले में मुख्य संदिग्ध के रूप में बजरंग दल के स्थानीय प्रमुख योगेश राज का नाम आ रहा था लेकिन अब पुलिस ने प्रशांत नट की गिरफ़्तारी कर उसे मुख्य अभियुक्त बताया है.

पुलिस ने बताया कि प्रशांत को गिरफ़्तार करने के बाद उसे घटनास्थल ले जाया गया और सीन को रीक्रिएट भी किया.

प्रशांत नट को सिकंदराबाद-नोएडा बॉर्डर दनकौर रोड से गिरफ़्तार किया गया है.

तीन दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर में गुस्साई भीड़ के हमले में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक स्थानीय युवक सुमित की मौत हो गई थी. यह भीड़ उस क्षेत्र में कथित गो हत्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रही थी.

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'तीन तलाक़ बिल महिलाओं के ख़िलाफ़'

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने तीन तलाक़ बिल को मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ बताया है.

उन्होंने कहा कि लाखों मुस्लिम महिलाओं के सड़क पर उतर कर तीन तलाक़ बिल का विरोध किया, विपक्षी पार्टियों और मुस्लिम संगठनों ने सेलेक्ट कमेटी को भेजने और उनके फ़ैसले के मुताबिक क़ानून बनाने की बात की थी लेकिन सरकार ने इन सभी चीज़ों को नज़रअंदाज किया जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि लोकसभा से पारित होने के बाद यह बिल अगर राज्यसभा से भी पास होता है तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी इस पर गौर करेगी और उसके बाद इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

दूसरी तरफ़ इस बिल को लेकर समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आज़म खां ने कहा है कि मुसलमानों को लिए क़ुरान ही मान्य है, तीन तलाक़ क़ानून क्या कहता है इससे उनका कोई लेना देना नहीं है.

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उन्होंने कहा, "मुसलमान जानते हैं कि तलाक़ लेने के लिए क्या करना है. क़ुरान में तलाक़ के बारे में सबकुछ लिखा है. क़ुरान की बातों के अलावा तलाक़ के लिए कोई क़ानून मान्य नहीं है. तलाक़ के लिए मुसलमानों को सिर्फ़ क़ुरान का क़ानून ही मानना चाहिए."

उन्होंने कहा कि यह हमारा मजहबी मामला है. मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड है. यह हमारा व्यक्तिगत मामला है कि मुसलमान कैसे शादी करेगा और कैसे तलाक़ लेगा.

हालांकि भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सदस्य जाकिया सोमन ने विधेयक का स्वागत किया और हिंदू विवाह अधिनियम की तर्ज पर मुस्लिम विवाह अधिनियम की मांग की जो बहुविवाह और बच्चों के संरक्षण जैसे मुद्दों से निपटेगा.

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मेघालयः मजदूरों को बचाने किर्लोस्कर मैदान में

मेघालय की खदान में पिछले 15 दिनों से फंसे 15 मजदूरों को बचाने के लिए पंप सेट बनाने वाली दिग्गज कंपनी किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड ने मदद की पेशकश की है.

पीटीआई के मुताबिक कंपनी मौके पर पहुंच गई है और खदान से पानी निकालने के लिए औजार मुहैया करा रही है.

ज़िला प्रशासन ने राज्य सरकार को उच्च शक्ति वाले पंप की मांग करते हुए पत्र लिखा था क्योंकि इस काम में लगे 25 हॉर्स पावर के पंप पर्याप्त साबित नहीं हो पा रहे थे.

साथ ही खदान से पानी निकालने का काम शनिवार को रोक दिया गया था क्योंकि खदान में पानी का स्तर कम नहीं हो रहा था.

उधर एनडीआरएफ ने मीडिया में आई उन ख़बरों का खंडन कर दिया जिसमें यह कहा गया था कि खदान में फंसे मजदूरों की मौत हो जाने का संदेह है क्योंकि एनडीआरएफ के गोताखोर जब खदान में उतरे थे उन्होंने 'दुर्गंध' महसूस की थी.

बचाव अभियान चला रहे गुवाहाटी की एनडीआरएफ बटालियन ने एक बयान में कहा कि सहायक कमांडेंट संतोष कुमार सिंह के 'दुर्गंध' वाले बयान को मीडिया ने ग़लत तरीके से लिया जिसे उन्होंने 'ठहरे हुए पानी' के संबंध में किया था.

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'पुजारा के कारण भारत गंवा सकता है मेलबर्न टेस्ट'

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने कहा है कि भारतीय टीम को चेतेश्वर पुजारा की धीमी बल्लेबाज़ी का खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है. चेतेश्वर पुजारा ने मेलबर्न में शतक तो जड़ा लेकिन उन्होंने 319 गेंदों में 106 रनों की बेहद धीमी पारी खेली. इसकी वजह से भारत ने पहले दो दिन ढाई रन प्रति ओवर की गति से रन बनाए, जो 3 दशक में ऑस्ट्रेलिया में पहली पारी का सबसे धीमा स्कोर है.

पुजारा ही नहीं, भारत के किसी भी बल्लेबाज का स्ट्राइक रेट 50 से अधिक नहीं था. कप्तान विराट कोहली ने 204 गेंदों में 82 रन बनाए.

पोंटिंग ने cricket.com.au से कहा कि भारत अगर यह मैच जीतता है तो यह अच्छी पारी है लेकिन संभव है कि उसे ऑस्ट्रेलिया को दो बार आउट करने के लिए समय कम पड़ जाए.

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राष्ट्रपति बशर अल असद

सीरिया को मिली अहम कूटनीतिक जीत

संयुक्त अरब अमीरात ने सीरिया में अपना दूतावास फिर से खोल दिया है. सात साल से गृह युद्ध से जूझ रहे सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के लिए इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है.

संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि इस कदम का मकसद जंग खत्म करने में मदद करना और दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार लाना है. ये ताज़ा संकेत बताते हैं कि सीरिया ने अपने पड़ोसियों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते फिर से बहाल करने की पहल करनी शुरू कर दी है.

सीरिया में इराक के राजदूत साद मोहम्मद ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि दूसरे देश भी ऐसा ही कदम उठाएं.

उन्होंने कहा, "सीरिया अरब जगत का दिल है और सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है. इसलिए अरब देश सीरिया की अनदेखी नहीं कर सकते. अब समय आ गया है कि अरब देश दमिश्क में फिर से अपने दूतावास खोलें."

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