अमरोहा से ग्राउंड रिपोर्ट: एनआईए की गिरफ़्तारी पर परिजनों के सवाल

  • दिलनवाज़ पाशा
  • बीबीसी संवाददाता, अमरोहा से
ट्रॉली का जैक

भारत की राजधानी दिल्ली से क़रीब 140 किलोमीटर दूर बसा अमरोहा अब तक अपने आमों और अमन के लिए जाना जाता रहा था.

1980 में जब मुरादाबाद में दंगे हुए तब भी अमरोहा इनसे अछूता रहा और 2013 में जब मुजफ़्फरनगर दंगों की आग में जला तो आंच अमरोहा तक नहीं पहुंची.

मुस्लिम बहुल आबादी वाला ये शहर ख़बरों में कम ही रहता है. लेकिन मंगलवार को जब भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी संगठन आईएसआईएस से प्रभावित एक नए चरमपंथी माड्यूल से जुड़े संदिग्धों की गिरफ़्तारी की घोषणा की तो अमरोहा अचानक सुर्खियों में आ गया.

एनआईए ने बुधवार को दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 17 जगहों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ़्तार किया था और अमरोहा की एक मस्जिद में मौलवी मुफ़्ती सोहेल को इस चरमपंथी समूह का सरगना बताया था. NIA का दावा है कि ये समूह आत्मघाती हमलों की तैयारी कर रहा था, वो आत्मघाती जैकेट बना रहे थे.

एनआई प्रवक्ता ने कहा था, ''ये लोग बम बनाने की एडवांस स्टेज पर थे.''

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अमरोहा में NIA की छापेमारी पर क्या बोले वहां के लोग?

शहर की जामा मस्जिद के आस-पास भीड़ पहले जैसी ही है लेकिन लोग बात करने से कतराते हैं. हाथ में रिपोर्टिंग माइक देखते ही लोग दुबक जाते हैं.

यही से निकलने वाली एक गली शहर के चर्चित हकीम चांद मिया के अस्पताल तक पहुंचती हैं. यहीं एक पतली गली में मुफ़्ती मोहम्मद सुहैल का पैतृक निवास है.

सुहैल को चरमपंथ के आरोप में इसी आवास से गिरफ़्तार किया गया. हमने दो बार इस घर के लोगों से बात करने की कोशिश की लेकिन किसी ने कोई बात नहीं की. दरवाज़े के पीछे से एक महिला ने बस इतना ही कहा- वो डेढ़ महीने पहले ही दिल्ली से आकर यहां रह रहे थे. नया काम शुरू करने की बात कर रहे थे. शायद जैकेट बनाने का काम शुरू करने वाले थे.

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अमरोहा की जामा मस्जिद

क्या कहते हैं पड़ोसी

आसपास के लोग मुफ़्ती सुहैल को सरल-सीधा नौजवान बताते हैं जिसका पहले से कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है.

उनके एक पड़ोसी ने बताया, "मुफ़्ती सुहैल और उनका पूरा परिवार तीस साल पहले दिल्ली के जाफ़राबाद चला गया था. वो भी वहीं रहते थे. एक साल पहले ही उनकी शादी अमरोहा की ही एक लड़की से हुई थी."

उनके एक पड़ोसी ने अपना नाम बताए बिना कहा, मुफ़्ती सुहैल का परिवार दीनी तालीम से जुड़ा हुआ है. इस परिवार की इस मुहल्ले में काफ़ी इज़्ज़त है.

यहां के लोगों के लिए ये यक़ीन करना मुश्किल है कि सुहैल के इतने ख़तरनाक इरादे हो सकते हैं. हालांकि लोग ये भी कहते हैं कि अगर सुहैल पर इल्ज़ाम साबित होता है तो उन्हें सज़ा ज़रूर हो.

भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी का कहना है कि सुहैल ही कथित मॉड्यूल हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम के मास्टरमाइंड हैं और उन्होंने ही बाक़ी लोगों को इस संगठन से जोड़ा.

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इरशाद की पत्नी

'मेरा सब्ज़ी काटने का चाकू भी ले गए'

जहां सुहैल रहते हैं उससे थोड़ी ही दूर मोहल्ला काज़ीजादा के एक कमरे के घर में ऑटोरिक्शाचालक मोहम्मद इरशाद रहते हैं. मोहम्मद इरशाद को भी एनआईए ने गिरफ़्तार किया है. उन पर सुहैल की मदद करने और उनके बनाए विस्फोटकों और अन्य सामान को सुरक्षित स्थान पर रखने में मदद करने के आरोप हैं.

मंगलवार देर शाम जब हम इरशाद के घर पहुंचे तो उनकी पत्नी अपने कमरे में अकेले बैठे हुए थीं. उन्हें तब तक ये पता नहीं था कि उनके पति को किन आरोपों में गिरफ़्तार किया गया है.

वो बताती हैं, "पुलिस की टीम सुबह पांच बजे दरवाज़ा तोड़कर घर में दाख़िल हुई. उन्होंने इरशाद के बारे में पूछा और उन्हें बिस्तर से उठाकर बंधक बना लिया."

"उन्होंने पूरे घर में सामान की तलाशी ली. सारा सामान इधर-उधर कर दिया. मेरा सब्ज़ी काटने का चाकू उन्हें मिला वो उसे ही ले गए."

"इरशाद बार-बार उनसे पूछते रहे कि मेरा ग़ुनाह क्या है तो उन्होंने कहा कि पता चल जाएगा."

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मोहम्मद इरशाद

जब इस संवाददाता ने उन्हें बताया कि इरशाद पर देश में हमले करने की साज़िश में शामिल होने के आरोप हैं तो परिजनों ने कहा कि वो ऑटोरिक्शा चलाते हैं, ऐसे इल्ज़ाम ग़लत हैं.

इरशाद के बड़े भाई औरंगज़ेब ने कहा, "अगर वो ग़ुनाहगार है तो सज़ा है और बेक़सूर है तो उसके साथ इंसाफ़ हो."

इरशाद के आसपास रहने वाले लोगों ने यही बताया को रिक्शा चलाने का काम करते हैं और सामान शहर में इधर-उधर ढोते हैं.

इरशाद को दो साल पहले ऑटो रिक्शा में मांस ले जाने के आरोप में गिरफ़्तार भी किया गया था.

उनके भाई औरंगज़ेब कहते हैं, "वो रिक्शा चलाता है, जो सामान मिलता है पहुंचा देता है. उसे मांस ले जाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था, बाद में ज़मानत हो गई थी."

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एनआई की ओर से ज़ब्त किया गया सामान दिखाया गया था, सबसे दाईं ओर कथित रॉकेट लॉन्चर दिख रहा है

गांव वालों का दावा, वो रॉकेट लॉन्चर नहीं ट्रॉली का जैक था

एनआईए ने अमरोहा के ही गांव सैदपुर इम्मा से दो भाइयों सईद अहमद और रईस अहमद को भी हमले की साज़िश में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया है. ये दोनों ही भाई पेशे से वेल्डर हैं.

इन पर आरोप है कि इन्होंने देसी रॉकेट लांचर बनाने में मुफ़्ती सुहैल की मदद की. एनआईए ने अपने प्रेस रिलीज़ में कहा है कि दोनों भाइयों के पास भारी मात्रा में विस्फोटक/गन पाउडर बरामद किया गया और उन्होंने देसी सामान से रॉकेट लॉन्चर बनाने की कोशिश की थी.

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NIA की प्रेस रिलीज़

सईद और रईस की वेल्डिंग शॉप पर अब एनआईए की सील लगी है.

सैदपुर इम्मा गांव में क़रीब ढाई हज़ार लोग रहते हैं और ये पूरा गांव इन दोनों को बेग़ुनाह मानता है. इस गांव के अधिकतर लोग मिट्टी डालने का काम करते हैं.

उनके एक पड़ोसी मोहम्मद शमशाद ने बीबीसी को बताया, "पुलिस जिसे रॉकेट लांचर बता रही है वो ट्रॉली में लगने वाला जैक है जिससे ट्राली को मिट्टी डालने के लिए ऊपर उठाया जाता है. अगर ये रॉकेट लांचर है तो फिर तो सभी किसानों को गिरफ़्तार कर लेना चाहिए क्योंकि ये तो सभी ट्रॉलियों में लगी है."

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सईद और रईस की वेल्डिंग शॉप

'बारूद नहीं बुरादा'

एनआईए ने रईस और सईद के घर से विस्फ़ोटक भी बरामद करने का दावा किया है. शमशाद कहते हैं, "जिसे बारूद बताया जा रहा है वो बुरादा है जो लोहे की घिसाई और कटाई में निकलता है." ये बताते हुए वो एक बोरी से लोहे का बुरादा गिराते हैं.

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सईद और रईस के पड़ोसी शमशाद का कहना है कि एनआईए इसे बारूद बता रही है, जबकि यह बुरादा है

इन दोनों भाइयों के परिवार का आरोप है कि एनआईए की टीम ने उनके सभी दस्तावेज़ भी जला दिए. घर के किसी भी सदस्य का किसी भी तरह का कोई दस्तावेज़ अब मौजूद नहीं है.

दबिश के दौरान आसपास के सभी घरों को भी बंद कर दिया गया था और किसी की भी मौके पर आने नहीं दिया गया था.

अपने घर के बंद दरवाज़े की झिर्री से देखने वाली एक महिला ने बीबीसी से कहा, "वो अपने साथ बोरे में सामान लाए, उसे डिब्बों में बंद किया और मोमबत्ती जलाकर सील लगा दी. उसके बाद सामान आंगन में रखकर पड़ोसियों को बुलाया और बताया कि ये बरामद किया है. विरोध करने पर पीटा."

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रईस और सईद की मां

परिजनों के आरोप

रईस और सईद की मां का भी यही कहना था कि जो सामान उनके घर से बरामद दिखाया है उसे कार से उतारा गया था. हालांकि इस दावे को साबित करने के कोई सबूत उनके पास नहीं थे.

इन दोनों भाइयों के पड़ोसी उन्हें बार-बार बेग़ुनाह बता रहे थे और मदद की गुहार लगा रहे थे.

एनआईए ने इन चारों ही युवकों को अब अदालत में पेश करके 12 दिनों की रिमांड ले ली है. भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत कई मंत्रियों ने एनआईए को इन गिरफ़्तारियों पर बधाई दी है.

लेकिन गांव के लोग इन पर कई गंभीर सवाल उठा रहे हैं इनकी स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं.

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