NIA ने अमरोहा और दिल्ली के जाफ़राबाद के बीच क्या कनेक्शन पाया? - ग्राउंड रिपोर्ट

  • 30 दिसंबर 2018
छापेमारी के दौरान एनआईए के कर्मचारी इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption जाफ़राबाद में छापेमारी के दौरान एनआईए के कर्मचारी

सर्दियां आते ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़े जाफ़राबाद में चहल-पहल बढ़ जाती है क्योंकि यह भारत का जैकेट का मशहूर मार्केट है.

बुधवार तड़के 26 दिसंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के छापों ने इस इलाक़े को चर्चा में ला दिया.

एनआईए ने सुबह क़रीब साढ़े चार बजे छापेमारी करके इस इलाक़े से पांच लोगों को गिरफ़्तार किया. बाद में एनआईए ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कहा कि उसने उत्तर प्रदेश और दिल्ली की तकरीबन 17 जगहों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

एनआईए का कहना है कि ये सभी लोग आईएसआईएस से प्रभावित संगठन हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम नामक मॉड्यूल से जुड़े हुए थे जिसका मास्टरमाइंड मुफ़्ती सुहैल है और यह देश भर में हमले की तैयारी कर रहा था.

मुफ़्ती सुहैल को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से गिरफ़्तार किया गया है.

Image caption मुफ़्ती सुहैल के घर के बाहर खड़े लोग

जाफ़राबाद से अमरोहा का कनेक्शन

29 साल के मुफ़्ती सुहैल जिन्हें लोग 'हज़रत' कहते हैं, वे यहीं जाफ़राबाद में पले-बढ़े थे और तकरीबन डेढ़ महीने पहले वो अमरोहा अपने पुश्तैनी घर में रहने चले गए थे.

जाफ़राबाद के चौहान बांगर में जब हम उनके घर पहुंचे तो तीन मंज़िला इमारत की पहली मंज़िल से झांकते हुए एक शख़्स ने हमारे सामने हाथ जोड़ लिए.

उनसे पूछा तो पता चला कि वह मुफ़्ती सुहैल के बड़े भाई मोहम्मद जुनैद हैं. जुनैद ने कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं बोलेंगे और वह बेहद परेशान हैं. इस दौरान पड़ोस के कुछ लोग भी इकट्ठा हो गए और नाराज़गी के साथ पूछने लगे कि इस घर के लोगों को क्यों परेशान किया जा रहा है.

मुफ़्ती सुहैल के पड़ोसियों का कहना है कि वह बेहद शरीफ़ हैं और गली में कभी भी उनका किसी से कोई झगड़ा नहीं हुआ.

सुहैल के पिता और उनके भाइयों का इन्वर्टर बनाने का काम है. सिर्फ़ घर में सुहैल ही थे जो अपने पारिवारिक धंधे को छोड़कर मुफ़्ती बने थे.

सुहैल के पड़ोसी मोहम्मद रिज़वान मीडिया पर अपना गुस्सा उतारते हुए कहते हैं, "हमारी गली के शरीफ़ बच्चे को आप मीडिया वालों ने बदनाम कर दिया. हमने उसे कभी ग़लत बात करते हुए नहीं सुना. घर से जो बैटरी बरामद होने की बात कही जा रही है, वह उनके काम से जुड़ी है क्योंकि उनके घर में इन्वर्टर का काम होता है जिसमें बैटरी इस्तेमाल होती है."

रिज़वान बताते हैं कि बुधवार तड़के अधिकारी यहां भी आए थे और सुहैल के घर की तलाशी ली थी. वह कहते हैं कि वे बाक़ायदा सोची-समझी रणनीति के तहत आए और उन्होंने वीडियोग्राफ़ी भी की.

एनआईए का आरोप है कि सुहैल ही विदेशी हैंडलर के साथ संपर्क में थे और वह लोगों को उनके समूह में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे. एनआईए के अनुसार, उन्होंने ग्रुप के दूसरे सदस्यों को हथियार और बारूद के इंतज़ाम का ज़िम्मा सौंपा था ताकि आईइडी और पाइप बम तैयार किए जा सकें.

Image caption मोहम्मद आज़म के घर पर ताला लगा हुआ है

गिरफ़्तार सबसे उम्रदराज़

गिरफ़्तार किए गए अधिकतर लोग 30 से कम ही उम्र के हैं लेकिन इनमें मोहम्मद आज़म की उम्र सबसे अधिक है. 35 वर्षीय आज़म जाफ़राबाद में ही एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं जो उन्होंने पांच साल पहले ही शुरू किया था.

जाफ़राबाद के एक फ़्लैट में जब हम उनके घर पर गए तो वहां ताला लटका हुआ मिला. पड़ोसियों ने बताया उनकी पांच वर्षीय बेटी और बीवी अपने मायके चली गई हैं.

जब हम आज़म के मेडिकल स्टोर पर गए तो वह बंद मिला लेकिन स्टोर जिस घर में था उसमें रहने वाले मोहम्मद सारिब ने कहा कि उन्हें इस घटना पर विश्वास ही नहीं हो रहा है क्योंकि आज़म बहुत शांत किस्म के थे और उन्होंने हमेशा हमसे प्यार से बात की.

Image caption मोहम्मद आज़म का बंद पड़ा मेडिकल स्टोर

आज़म पास में ही एक दूसरे मेडिकल स्टोर चलाने वाले मोहम्मद सलमान के जीजा हैं. मोहम्मद सलमान भी बाकियों की तरह अपने बहनोई को बेकसूर बताते हैं.

पड़ोसी उन्हें बेगुनाह बता रहे हैं और उनका कहना है कि यह गिरफ़्तारी केवल व्हाट्सऐप ग्रुप की वजह से हुई है. उनका कहना है कि वह भी उस ग्रुप में शामिल थे जो मुफ़्ती सुहैल चला रहे थे.

तकरीबन दो महीने पहले आज़म अपने परिवार के साथ उमरा करने सऊदी अरब की यात्रा पर गए थे. लोगों का कहना है कि इस दौरान उन्होंने धार्मिक रीति-रिवाजों के बारे में पता लगाने के लिए सऊदी अरब से सुहैल को कई बार कॉल किया था.

आज़म के रिश्तेदारों का कहना है कि इसी के आधार पर उन्हें गिरफ़्तार किया गया है. वहीं, एनआईए का कहना है कि वह हथियारों का इंतज़ाम करने में मदद कर रहे थे.

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Image caption अनस के घर का दरवाज़ा

'मेरा बेटा बेकसूर'

एनआईए की कार्रवाई में ऑटोचालक से लेकर इंजीनियरिंग छात्र तक गिरफ़्तार किए गए हैं. गिरफ़्तार इंजीनियरिंग के छात्र हैं, अनस यूनुस.

24 साल के अनस नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र हैं. पड़ोसियों से जब उनको लेकर बात की तो उनका कहना था कि उन्होंने आज तक अनस को आवारा घूमते नहीं देखा.

एक परचून की दुकान पर बैठे 23 साल के आदिल कहते हैं कि उन्होंने अनस को केवल कॉलेज से आते और जाते ही देखा, उनके बहुत ज़्यादा दोस्त भी नहीं हैं.

अनस के तीन मंज़िला मकान का दरवाज़ा खटखटाने पर उनकी मां पहली मंज़िल से झांकती हैं. मेरा परिचय देने पर उन्होंने कहा कि उनके बेटे के बारे में मैं पड़ोसियों से पूछूं.

आंसुओं से सूजी आंखें और सिर पर दुपट्टा डाले अनस की मां ने कहा, "मेरा बेटा बेकसूर है और आप पूरी गली में मेरे बेटे के अख़लाक़ (आचार-व्यवहार) के बारे में पूछ लीजिए. मुझे इस बारे में और कुछ नहीं कहना है."

पड़ोसी और घरवाले अनस के बारे में जो कुछ भी कहें लेकिन एनआईए के आईजी आलोक मित्तल प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कह चुके हैं कि अनस बिजली का सामान, अलार्म घड़ी और बैटरी आदि ख़रीदने में शामिल था, और उनका इरादा धमाके करने का था.

Image caption मुफ़्ती सुहैल का अमरोहा स्थित पुश्तैनी मकान

केंद्र में व्हाट्ऐप ग्रुप

आज़म और अनस के अलावा जाफ़राबाद से 23 वर्षीय राशिद ज़फ़र, 20 वर्षीय ज़ुबैर अहमद और 22 वर्षीय ज़ैद मलिक को भी गिरफ़्तार किया गया है.

बाकियों की तरह इनके परिजनों ने भी हमसे बात नहीं की और उनके पड़ोसियों ने भी वही बात दोहराई जो बाकियों के पड़ोसी दोहराते रहे कि 'वह निर्दोष है.'

राशिद की जाफ़राबद में ज़फ़र गार्मेंट्स नाम से दुकान है जिसमें वह रेडिमेड गार्मेंट्स का कारोबार करते हैं. एनआईए के अनुसार, उन्होंने अपने दोस्त की मदद से 134 सिम कार्ड्स की व्यवस्था की थी.

वहीं, ज़ुबैर और ज़ैद भाई हैं. जुबैर दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए के तीसरे वर्ष के छात्र हैं. एनआईए का दावा है कि ज़ैद ने ज़ुबैर की मदद से घर के ज़ेवरात चुराए और उन्हें सात लाख रुपये में लखनऊ की महिला की मदद से बेच दिया.

एनआईए ने लखनऊ की महिला को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया हुआ है. वहीं, एनआईए का कहना है कि दोनों भाई बम बनाने की सामग्री इकट्ठा करने के लिए फ़ंड जुटा रहे थे.

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Image caption एनआईए ने छापे के दौरान बरामद सामान को दिखाया था

जाफ़राबाद से गिरफ़्तार हुए सभी लोगों में एक बात सामान्य है कि वह सभी मुफ़्ती सुहैल के व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े हुए थे. इसको लेकर इलाक़े के लोगों को शक है कि इस ग्रुप में धार्मिक बातें होती थीं जिसके कारण सभी लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

हालांकि, विस्फोटक सामग्री मिलने के सवाल पर कोई भी सटीक जवाब देता नहीं मिलता. जाफ़राबाद में एक क्लीनिक चलाने वाले डॉ. फ़हीम बेग कहते हैं कि "यह केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि आम चुनाव नज़दीक हैं."

एनआईए का दावा है कि यह मॉड्यूल कई विस्फोट करने की स्थिति में था और उसने इनसे 25 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, 112 अलार्म घड़ियां, 134 सिम कार्ड जैसी चीज़ें बरामद की हैं.

अब इस मामले में आगे क्या होगा वह तो अदालती कार्यवाही के बाद ही तय होगा. फ़िलहाल दिल्ली की एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दसों अभियुक्तों को एनआईए की 12 दिन की हिरासत में भेज दिया है.

इस मामले की अगली सुनवाई आठ जनवरी को होनी है.

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