ग़ाज़ीपुर में मोदी की सभा से लौटते पुलिसकर्मियों पर पथराव, एक सिपाही की मौत

  • 30 दिसंबर 2018
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उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में ड्यूटी से लौट रहे पुलिसकर्मियों पर कुछ लोगों ने पथराव किया जिसमें एक सिपाही की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए.

ग़ाज़ीपुर सदर के क्षेत्राधिकारी महिपाल पाठक ने बीबीसी को बताया, "सिपाही सुरेश वत्स पीएम की सभा में ड्यूटी पूरी करके लौट रहे थे. निषाद समुदाय के कुछ लोग नौनेरा इलाके में अटवा मोड़ पुलिस चौकी पर प्रदर्शन कर रहे थे. यहीं कुछ लोगों ने पत्थरबाज़ी की जिसमें उन्हें ज़्यादा चोट लग गई. अस्पताल में उनकी मौत हो गई."

घटना के बाद ग़ाज़ीपुर के डीएम के बालाजी और एसपी यशवीर सिंह समेत ज़िले के सभी आला अधिकारी पहले घटनास्थल और उसके बाद अस्पताल पहुंचे. घटना में दो अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हैं जिनका इलाज चल रहा है जबकि कई पुलिसकर्मियों को भी मामूली चोटें आई हैं.

बताया जा रहा है कि आरक्षण की मांग को लेकर निषाद समाज के लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे थे. पीएम की सभा समाप्त होने के बाद शनिवार की शाम कठवामोड़ पुल पर जाम लग गया. जाम देखकर पीएम की सभा से वापस लौट रही करीमुद्दीनपुर थाने की पुलिस जाम ख़त्म कराने की कोशिश करने लगी.

पुलिस पर पथराव

Image caption सांकेतिक तस्वीर

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) सदर महिपाल पाठक के मुताबिक, उसी समय धरने पर बैठे लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया. इस बीच कई वाहनों के शीशे भी टूट गए. प्रदर्शनकारियों ने सिपाही सुरेंद्र वत्स पर हमला बोल दिया जिससे बाद में उनकी मौत हो गई.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, ज़िले के नोनहरा थाना क्षेत्र में आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर चल रहे निषाद समाज के धरने को शनिवार को अनुमति नहीं दी गई थी. इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में अशांति फैलाने की आशंका पर पुलिस ने निषाद पार्टी के एक नेता को रैली से पहले ही हिरासत में ले लिया था.

बताया जा रहा है कि अपने साथी को हिरासत में लेने पर प्रदर्शनकारियों का ग़ुस्सा भड़क गया. घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उमेश श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया, "शनिवार सुबह जब निषाद समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे थे, उसी समय उनकी रैली में भाग लेने आ रहे बीजेपी नेताओं से झड़प हो गई. इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने निषाद समाज के कई नेताओं को पुलिस के हवाले कर दिया. निषाद समाज के लोग इस बात पर भी बहुत भड़के हुए थे. सभा के बाद पुलिसवालों से जब उनकी फिर भिड़ंत हुई तो कुछ लोगों ने पत्थरबाज़ी शुरू कर दी."

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आर्थिक मदद

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मारे गए सिपाही सुरेश वत्स प्रतापगढ़ ज़िले के रानीगंज के रहने वाले थे और इन दिनों ग़ाज़ीपुर के करीमुद्दीनपुर थाने में तैनात थे. मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताते हुए सुरेश वत्स के परिवार वालों को चालीस लाख रुपये और उनके माता-पिता को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पत्नी को असाधारण पेंशन और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की तत्काल घोषणा की है.

मुख्यमंत्री ने ग़ाज़ीपुर के डीएम और एसपी को दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं. पुलिस ने फिलहाल कुछ लोगों को हिरासत में लिया है लेकिन अभी कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

ग़ाज़ीपुर के पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह का कहना है कि निषाद पार्टी के लोग शनिवार सुबह से ही अनुमति न मिलने के बावजूद शहर भर में जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे थे. दिन में भी जब उन्हें रोकने की कोशिश की गई तो उन लोगों ने पुलिस से भिड़ने की कोशिश की थी.

निषादों का इनकार

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वहीं, प्रदर्शन कर रहे निषाद पार्टी के नेताओं ने घटना में उनकी पार्टी के लोगों के शामिल होने से इनकार किया है. घटना के संबंध में कुछ भी पूछे जाने पर पार्टी के नेताओं ने फ़िलहाल इस मामले में आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने से मना कर दिया है.

निषाद समाज के लोग आरक्षण की मांग को लेकर ज़िले में कई जगहों पर पिछले कुछ दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. निषाद पार्टी के नेता छत्रपति निषाद शनिवार को सुबह पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "हम निषादों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं और अपने लोगों के बीच आरक्षण का संदेश फैला रहे हैं. इलाहाबाद से शुरू करके हम पूरे राज्य में प्रदर्शन करेंगे. चार साल हो गए, लेकिन हमारी मांगें कोई सुन नहीं रहा है."

बताया जा रहा है कि घटना के बाद से ही निषाद पार्टी के तमाम नेता भूमिगत हो गए हैं.

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