जमाल ख़ाशोज्जी हत्याः 11 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू

  • 4 जनवरी 2019
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सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले में रियाद में 11 अभियुक्तों पर मुक़दमें की सुनवाई शुरु हो चुकी है. अभियोजकों ने इनमें से पांच लोगों के लिए मौत की सज़ा की मांग की है.

अभियोजकों का कहना है, ''उनकी (जमाल) एक ऑपरेशन के तहत हत्या कर दी गई. एजेंटों को उन्हें स्वदेश लौटने को लेकर मनाने के लिए इंस्ताबुल सऊदी दूतावास में भेजा गया था.''

दो अक्तूबर को जमाल ख़ाशोज्जी इंस्ताबुल स्थित सऊदी वाणिज्यिक दूतावास में गए थे जहां से वे वापस नहीं लौटे. इस मामले में सऊदी अरब से तुर्की ने 18 संदिग्धों को प्रत्यार्पित करने की बात कही थी. इनमें से 15 वो एजेंट हैं जो हत्या को अंजाम देने सऊदी से तुर्की पहुंचे थे. हालांकि सऊदी अरब ने तुर्की की इस मांग को ख़ारिज कर दिया.

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स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ इस मामले की पहली सुनवाई में सभी 11 अभियुक्त अपने वकील के साथ मौजूद थे. मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख़ अभी तय नहीं की गई है. सऊदी के अटर्नी जनरल ने बताया है कि अब तक तुर्की की ओर सबूत उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इन 11 अभियुक्तों में से किसी के नाम की जानकारी नहीं दी गई है.

क्या है पूरा मामला?

2 अक्तूबर को इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में ख़ाशोज्जी की हत्या हो गई थी. लेकिन उनकी लाश नहीं मिली.

तुर्की ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हत्या का आदेश ऊपर से आया था. यह दावा उस वक़्त आया जब सऊदी अरब में पत्रकार ख़ाशोज्जी की हत्या पर शोक सभा का आयोजन किया जा रहा था.

अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट, जिसके लिए ख़ाशोज्जी काम करते थे, उसका कहना है कि सीआईए के आंकलन के मुताबिक़ क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का नाम सामने आ रहा है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक़ जितने भी सबूत मिले हैं उनमें से कोई भी इस हत्या के लिए सीधे तौर पर प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ओर इस इशारा नहीं करते हैं.

हालांकि न तो व्हाइट हाउस और न ही अमरीकी विदेश विभाग ने सीआईए की इस रिपोर्ट पर टिप्पणी की हैं.

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क्या कहता है सऊदी अरब?

गुरुवार को रियाद में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के डिप्टी सरकारी अभियोजक शालान बिन राज़ी शालान ने कहा कि पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या एक वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी के आदेश पर हुई थी और इसमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ नहीं था.

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हालांकि, उन्होंने इतना ज़रूर बताया कि जिस व्यक्ति ने ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश दिया था वह उस टीम के प्रमुख थे. साथ ही उन्होंने कहा कि क्राउन प्रिंस को इस हत्या की कोई जानकारी नहीं थी.

उनका कहना है कि ख़ाशोज्जी 2 अक्तूबर के दिन इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में पहुंचे थे जहां कुछ लोगों के साथ हुई हाथापाई के बाद उन्हें जानलेवा इंजेक्शन लगा दिया गया था.

सरकारी अभियोजक ने कहा कि हत्या के बाद ख़ाशोज्जी के शरीर को अलग-अलग हिस्सों में बिल्डिंग के बाहर लाया गया.

इस मामले में अब तक कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया गया है जबकि दो उच्च अधिकारियों को उनके पद से हटाया गया है.

अभियोजक ने इसमें 11 लोगों पर हत्या का मामला दर्ज किया है और जिसमें से पांच को मौत की सज़ा देने की गुज़ारिश की है.

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