सामान्य वर्ग को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने का बिल राज्यसभा में पास

  • 10 जनवरी 2019
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सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन संबंधी विधेयक राज्यसभा में पारित हो गया है.

यह बिल जिस तरह से मंगलवार को लोकसभा में लगभग सर्वसम्मति से पारित हुआ था, उसी तरह से राज्यसभा में यह बिल आसानी से पारित हो गया.

राज्यसभा में इस बिल के समर्थन में कुल 165 मत पड़े जबकि सात लोगों ने इसका विरोध किया. इस बिल पर साढ़े दस घंटे तक पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने चर्चा की.

इस बिल में संशोधन के तमाम प्रस्ताव गिर गए, यानी ये बिल उसी रूप में पारित हुआ है, जिस रूप में सरकार ने इसे पेश किया था.

अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा.

वहीं, कल लोकसभा में बिल पारित होने के बाद जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किए थे. वैसे ही उन्होंने राज्यसभा से बिल पास होने के बाद भी तीन ट्वीट किए.

उन्होंने पहले ट्वीट में लिखा, "वह प्रसन्न हैं कि राज्यसभा ने संविधान (124वां संशोधन) विधेयक, 2019 पास कर दिया. इस विधेयक का व्यापक समर्थन देखकर वह ख़ुश हैं. सदन ने एक जीवंत बहस को देखा जहां कई सदस्यों ने अपनी राय व्यक्त की."

इसके बाद किए गए ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि दोनों सदनों से इस बिल का पास होना सामाजिक न्याय की जीत है. साथ ही उन्होंने लिखा कि यह देश की युवा शक्ति को अपना कौशल दिखाने में एक व्यापक अवसर देगा.

तीसरे ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बिल के पास होने को संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए श्रद्धांजलि बताया है. उनका कहना है कि वे लोग ऐसे भारत की कल्पना करते थे जो मज़बूत और समावेशी हो.

राज्य सभा से विधेयक को पारित करवाने के लिए सत्र का कार्यकाल एक दिन बढ़ाया गया था.

बुधवार को बिल पेश किए जाने के बाद विपक्ष ने ज़ोरदार हंगामा किया जिसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया था. दोपहर बाद दोबारा चर्चा शुरू हुई.

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शुरुआत बीजेपी सांसद प्रभात झा ने की. उनके बाद राज्य सभा में कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा और फिर बारी-बारी से विभिन्न दलों के सांसदों ने संसद में बिल पर अपनी बातें रखीं.

बहुजन समाज पार्टी के सतीश मिश्रा ने इस बिल का स्वागत किया है. लेकिन उन्होंने इस बिल पर सवाल भी उठाए हैं.

सतीश मिश्रा के भाषण की मुख्य बातें-

  • रिज़वर्शेन इन प्रमोशन बिल किस हाल में है, पांच साल में सरकार ने इस पर कुछ नहीं किया है.
  • संविधान में संशोधन करके पिछड़े और दलितों की संख्या को आबादी के हिसाब से आरक्षण कब देंगे, ये बताइए.
  • ये आरक्षण क्या वाक़ई में ग़रीब सवर्णों के लिए है, सरकार का क्राइटेरिया क्या है, आपने कह दिया कि राज्य सरकार प्रावधान करेगी. इसे अमीरों के लिए मत बनाइए, ग़रीबों के लिए बनाइए, बिल में सुधार लाइए.
  • सरकार कह रही है कि अंतिम बॉल पर छक्का लगाया है, लेकिन मैं कह रहा हूं कि गेंद बाउंड्री के पार नहीं जाएगी. आपको आउट होना ही है.
  • सरकार के पास नौकरियां नहीं हैं, लेकिन सरकार करोड़ों लोगों को नौकरी देने का वादा कर रही है. ये सरकार छलावा कर रही है.

कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने इस बहस में कहा-

  • सरकार को जल्दी क्यों है, ये वही जानते हैं.
  • बिल लाने के लिए सरकार ने क्या कोई डेटा कलेक्ट किया है.
  • मंडल कमीशन के बिल को पास करने में दस साल लगे थे, अभी सरकार संविधान में संशोधन एक दिन में करने जा रही है.
  • हिंदुस्तान में कितने लोगों के पास 5 एकड़ ज़मीन है, इसका क्या कोई डेटा सरकार ने जमा किया है.
  • आठ लाख से कम वाला ग़रीब माना जा रहा है, दूसरी ओर 2.5 लाख से ज़्यादा आमदनी वाले को टैक्स देना पड़ रहा है, सरकार टैक्स में छूट की सीमा 8 लाख रुपये सालाना क्यों नहीं कर रही है.
  • हम लोग आरक्षण पर बहस कर रहे हैं, लेकिन देश में नौकरियों पर बहस की ज़रूरत है. सरकारी और निजी कंपनियों में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं.
  • बिना किसी तैयारी और प्रावधान के इसे लागू करने पर नोटबंदी जैसा हाल होगा इस प्रावधान का.
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बीजेपी के रविशंकर प्रसाद ने इस बहस में बोलते हुए कहा-

  • ज़्यादातर लोगों ने समर्थन किया है.
  • इस सदन के अधिकार के बारे में कुछ सदस्यों को आशंका क्यों है, हम संसद हैं, हमें क़ानून बनाने और संविधान में संशोधन का अधिकार है.
  • मूलभूत अधिकार में बदलाव के लिए राज्यों की विधानसभा के पास जाने की ज़रूरत नहीं है. ऐसा संविधान की धारा 368 में कहा गया है.
  • आरक्षण की सीमा 50 फ़ीसदी संविधान में कहीं नहीं है, ये सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में आया है.
  • हम संविधान की धारा 15 में इकोनॉमिक वीकर सेक्शन को जगह दे रहे हैं. नौकरियों में आरक्षण दे रहे हैं.
  • इस प्रावधान के लिए ओबीसी और एससी-एसटी आरक्षण के प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

सपा के सांसद राम गोपाल यादव के भाषण की मुख्य बातेंः

  • नौकरियों में आरक्षण बहुत बड़ी बात नहीं रह गई है क्योंकि नौकरियां हैं ही नहीं. नोटबंदी ने तो नौकरियां लोगों से छीनने का काम किया. पहले मज़दूर नहीं मिलते थे लेकिन अब एक मज़दूर के लिए जाइए तो चार लोग साथ आते हैं.
  • हमने देखा है ये ऊंच-नीच की भावना देश में धंसी हुई है. हालांकि धीरे-धीरे ये कम हो रही है लेकिन ख़त्म नहीं हुई. एक बार बाबू जगजीवन राम बनारस गए तो लोगों ने उस तस्वीर को गंगाजल से धोया जिस पर उन्होंने माल्यार्पण किया था. अभी भी दलित किसी ऊंची जाति के घर के सामने से घोड़ी से सवार होकर जाता है तो उसका अपमान और मारपीट की जाती है.
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कांग्रेस के आनंद शर्मा के भाषण की मुख्य बातेंः

  • हम सभी राजनीतिक दलों से आते हैं. अगर ये फ़ैसला राजनीति से प्रेरित नहीं होता और आपका अच्छा दिन का वादा पूरा हो जाता तो आप ये बिल कभी नहीं लाते.
  • आप सोचते हैं कि देश एक आवाज़ में आपके साथ खड़ा है लेकिन आपने देश के साथ वादा ख़िलाफ़ी की है. आपने देश को सपना दिखाने का काम किया. आपने किसानों से 50 फ़ीसदी ज़्यादा एमएसपी का वादा किया लेकिन ये किसान को मिल रहा है? नहीं , मंडी में किसान की क्या हालत है ये सबको पता है.
  • आपने महिलाओं के आरक्षण का बिल क्यों नहीं लाया. आप तीन तलाक़ पर राजनीति करते हैं लेकिन बाक़ी महिलाओं के लिए आप कुछ नहीं कर पाते. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया लेकिन किया क्या? आप महिला आरक्षण बिल लाइए हम आज रात में ही उसे पास कराएंगे.
  • ये सबका देश है इसे बनाने में जो भी लोग शामिल रहे अगर सबका सम्मान नहीं होगा ये ग़लत होगा. ये कहना कि साल 2014 से पहले कुछ नहीं हुआ था तो ये बताएं कि इससे पहले क्या कुछ था ही नहीं. इन लोगों ने कई वादे किए गए थे. बाक़ी अच्छे दिन कब आएंगे उसका इंतज़ार तो है ही अब तक.
  • प्रश्न ये है कि क्यों अचानक इस विधेयक को लाया गया. संविधान का संशोधन जब आता है तो ये व्यापक विषय होता है. 2006 में इस पर एक कमीशन बैठाया गया था. सिन्हा कमीशन जिसकी रिपोर्ट भी आई थी. तो ये कई लोगों की सोच रही. हमने अपने घोषणा पत्र में भी इसका ज़िक्र किया. लेकिन सवाल ये है कि आपको चार साल सात महीने लगे. अब आख़िरी सत्र में आप ये बिल लेकर आए हैं.
  • सच्चाई सुनना ज़रूरी है. अभी तो आपने 5-0 से चुनावी सीरिज़ हारी. आपको लगा कि आप सही रास्ते पर ही नहीं हैं.
  • पब्लिक सेक्टर में नौकरी कम हो रही है. पीएसयू में 2017-17 में नौकरी घटकर 11.85 लाख से 11.31 लाख हो गई. ये आंकड़े तीन साल में पिछड़ते ही गए हैं. आप विकास की पटरी पर तो देश को लाओ. आपने बस देश को सपना दिखाया.
  • जातिवाद इस देश में बड़ा विषय है. हम इसके पक्षधर नहीं हैं, पिछड़ों को मेनस्ट्रीम से जोड़ना ही हमारा और हर भारतीय का कर्तव्य है.
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मध्य प्रदेश से बीजेपी के सांसद प्रभात झा के भाषण की मुख्य बातें:

  • सामान्य वर्ग के ग़रीब लोग हमेशा ये चर्चा करते थे कि उन्हें कब आरक्षण मिलेगा. मैं नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने ऐसे लोगों के लिए सोचा. उन्होंने कहा ही नहीं करके दिखाया.
  • 70-72 साल बाद ऐसे लोगों की आवाज़ नरेंद्र मोदी ने उठायी है. हमारा साथ नहीं देश के युवाओं का साथ दीजिए.
  • देश की 95 फ़ीसदी आबादी इस दायरे में आती हैं क्या ऐसे में सदन को इस पर विचार नहीं करना चाहिए. देश का 5 फ़ीसदी परिवार ही इस दायरे से बाहर होगा.
  • लोकसभा में तीन लोगों को छोड़कर सभी लोगों ने इस विधेयक का साथ दिया . इस तरह की प्रतिक्रिया हम इस सदन में चाहते हैं. आने वाली तरूणाई के लिए हम सबको एक होना होगा.
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विपक्ष ने उठाया सवाल

विपक्ष ने बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप मढ़ते हुए विधेयक को लाने के समय पर सवाल उठाया है.

उन्होंने इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग भी की है.

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सरकार पर संवेदनशील मामलों में न्यायिक जांच से गुज़रने की प्रक्रिया को दरकिनार करने की आदत बनाने का आरोप लगाया.

केंद्र सरकार ने राज्यसभा के वर्तमान शीत सत्र को एक दिन के लिए बढ़ा कर नौ जनवरी तक के लिए कर दिया है.

इस पर आनंद शर्मा ने कहा कि, "जिस तरह सदन की कार्यवाही को विपक्षी पार्टियों की सहमति के बिना बढ़ाया गया, वह सही नहीं है... अब स्थिति ऐसी है कि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद होता ही नहीं है... अगर सदन नहीं चल पा रहा है, तो उसके लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारी सरकार की है."

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इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जब महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होनी है तो सरकार के पास सदन की कार्रवाई को बढ़ाने का अधिकार है.

उन्होंने कहा, "देश को उम्मीद है कि सदन अपना काम करेगा."

संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल ने भी विपक्ष के सहयोग का अनुरोध किया.

राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल और डीएमके ने इस बिल का विरोध किया है. राष्ट्रीय जनता दल के राज्य सभा सदस्य मनोज झा ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार की मंशा ठीक नहीं है.

वहीं डीएमके की ओर से कनिमोई ने राज्यसभा में कहा कि इस बिल को रातोंरात सदन के सदस्य को थोपने की कोशिश हो रही है, इस बिल को लाने के लिए सरकार ने कितनी तैयारी की है, ये बिल ना तो स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा गया है और ना ही सेलेक्ट कमेटी के पास.

कनिमोई ने ये भी कहा कि आरक्षण का प्रावधान आर्थिक आधार पर नहीं किया गया था, ऐसे में ये प्रावधान आर्थिक आधार पर कैसे किया जा रहा है.

ग़ौरतलब है कि कोटा बिल और ट्रिपल तलाक़ बिल दोनों पर बहस के लिए उच्च सदन की कार्यवाही एक दिन के लिए बढ़ा दी गई थी.

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