बर्फ़ में ढके ‘भारतीय सैनिकों’ की वायरल तस्वीरों का सच

  • 10 जनवरी 2019
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ऐसी कई तस्वीरें जिनमें दावा किया गया है कि वो भारतीय सैनिकों की बेहद विषम परिस्थितियों में काम करने की तस्वीरें हैं, सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं.

ट्विटर और इंस्टाग्राम समेत फ़ेसबुक पर ऐसे कई पेज हैं जिन्होंने इन तस्वीरों को शेयर किया है.

इन तस्वीरों को सही मानकर एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर और सांसद किरण खेर जैसे लोग भी इन्हें शेयर कर चुके हैं.

इसमें कोई शक नहीं है कि भारत की फ़ौज बहुत ही ख़राब परिस्थितियों में भी अपनी सेवाएँ दे रही है. दुनिया के सबसे मुश्किल युद्धस्थल कहे जाने वाले सियाचीन ग्लेशियर में भी भारतीय फ़ौज तैनात है.

13,000 से 22,000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित इस ग्लेशियर में ठंड से जमने के कारण भी कई बार सैनिकों की मौत हो जाती है.

लेकिन जिन तस्वीरों की यहाँ बात हो रही है, वो भारतीय सैनिकों की तस्वीरें नहीं हैं.

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया कि कई विदेशी सैनिकों की तस्वीरों को भारतीय सैनिकों का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है.

इन तस्वीरों के साथ जो बातें लिखी गई हैं, उन्हें देखकर लगता है कि सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक लाइक और शेयर पाने के लिए जानबूझकर ग़लत सूचना उन तस्वीरों के साथ जोड़ी गईं.

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दावा:

  • ये फ़िल्मों की हीरोइनों से कम नहीं. पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात भारत की जांबाज़ लड़कियाँ. इनके लिए 'जय हिंद' लिखने से परहेज़ न करें.

हाथ में ऑटोमेटिक राइफ़ल लिए खड़ीं दो महिला सैनिकों की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर काफ़ी शेयर की जा रही है.

इस तस्वीर में दाहिनी ओर खड़ी महिला सैनिक के सीने पर भारतीय तिरंगे से मिलता-जुलता एक झंडा भी लगा हुआ है.

बांग्ला भाषी फ़ेसबुक पेज @IndianArmysuppporter पर भी हाल ही में इस तस्वीर को शेयर किया गया है जहाँ से तीन हज़ार से अधिक लोगों ने इस तस्वीर को शेयर किया है.

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Image caption साल 2018 में उत्तरी इराक़ के दोहुक इलाक़े में ट्रेनिंग के दौरान ली गई पशमर्गा फ़ीमेल फ़ाइटर्स की तस्वीर. (फ़ाइल)

सच:

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर असल में कुर्दिस्तान की पेशमर्गा फ़ोर्स में शामिल महिला फ़ाइटर्स की है.

कुर्द सेना ने इन महिला फ़ाइटर्स को तथाकथित चरमपंथी संगठन आईएसआईएस के लड़ाकों से टक्कर लेने के लिए तैयार किया है.

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि कई अतंरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान इस ख़ास फ़ोर्स पर फ़ीचर लिख चुके हैं और जो झंडा देखने में तिरंगे जैसा लगता है, वो कुर्दिस्तान का झंडा है.

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दावा:

  • हमारे जवान -5 डिग्री में भी अपना फ़र्ज़ निभाते हैं, हम आराम से सो पाते हैं, ये अपना वतन बचाते हैं. जय हिन्द, जय भारत.

समुद्र के किनारे खड़े इस कथित सैनिक की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर बहुत शेयर की जा रही है.

तस्वीर में जो शख़्स है, उसका चेहरा पूरी तरह से बर्फ़ में ढका हुआ है.

'भारतीय योद्धा' नाम के इस फ़ेसबुक पेज के अलावा भी कुछ फ़ेसबुक पन्नों और ट्विटर हैंडल्स पर ये तस्वीर सैकड़ों बार शेयर की गई है.

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सच:

ये किसी भारतीय सैनिक की नहीं, बल्कि अमरीकी सर्फ़र व तैराक डेन (Dan Schetter) की तस्वीर है.

जिस वीडियो को एडिट करके ये तस्वीर निकाली गई है, उसे 29 दिसंबर 2017 को संगीतकार व लेखक जैरी मिल्स ने अपने पर्सनल यू-ट्यूब पेज पर शेयर किया था.

इस वीडियो को पोस्ट करते समय जैरी ने लिखा था, "मिलिए मशहूर सर्फ़र डेन से जो विषम से विषम परिस्थिति में भी मिशिगन स्थित सुपीरियर नाम की इस झील में सर्फ़िंग करते हैं. जिस वक़्त मैंने ये वीडियो शूट की, उस वक़्त तापमान -30 डिग्री था. वीडियो बनाते वक़्त मेरे हाथ सुन्न पड़ रहे थे और डेन की हालत कैसी थी, ये आप वीडियो में देख ही सकते हैं."

जैरी मिल्स के इस वीडियो को यू-ट्यूब पर अब तक क़रीब एक लाख बार देखा जा चुका है.

ये कोई पहली बार नहीं है जब इस तरह की तस्वीरों को भारतीय सैनिकों का बताकर शेयर किया गया. ऐसी तस्वीरें पहले भी शेयर की जाती रही हैं जिन्हें लोग सच मान लेते हैं.

साल 2016-17 में वायरल हुई एक ऐसी ही तस्वीर ये है:

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दावा:

  • भारत के सच्चे हीरो को दिल से सलाम
  • सियाचीन ग्लेशियर में -50 डिग्री में ड्यूटी करते भारतीय जवान

इस तस्वीर को भारतीय जनता पार्टी की सांसद किरन खेर ने भी ट्वीट किया था.

बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर ने भी ये तस्वीर 17 दिसंबर 2017 को ट्वीट की थी.

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यही तस्वीर साल 2014 में यूक्रेन में भी वायरल रह चुकी है.

सोशल मीडिया पर इसे यह कहते हुए पोस्ट किया गया था कि "-20 डिग्री तापमान में हथियारों को हाथ में लिए ड्यूटी पर तैनात यूक्रेन के जांबाज़ लड़ाके".

लोगों ने इस तस्वीर और दावे को भी सच माना था क्योंकि पूर्वी यूक्रेन के कुछ इलाक़ों में साल के एक हिस्से में तापमान -20 डिग्री तक गिर जाता है. लेकिन ये सच नहीं है.

सच:

ये दोनों तस्वीरें रूस के सैनिकों की हैं.

साल 2013 में रूस की स्पेशल फ़ोर्स की एक ख़ास ट्रेनिंग के दौरान इस तस्वीरों को खींचा गया था.

रूस की कुछ आधिकारिक साइट्स पर ये तस्वीर उपलब्ध है. साथ ही यूक्रेन की फ़ैक्ट चेक वेबसाइट 'स्टोप फ़ेक' भी साल 2014 में इन तस्वीरों को रूस का बताते हुए एक आर्टिकल लिख चुकी है.

'फ़ैक्ट चेक' की अन्य कहानियाँ:

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