क्या कमाल दिखाएंगे मोदी के तरकश से निकले ये तीर?

  • 10 जनवरी 2019
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आगरा में अपने भाषण के दौरान सामान्य वर्ग को दिए गए आरक्षण का चुनावी इस्तेमाल शुरू कर दिया है.

आगरा में आयोजित जनसभा में उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि अब तक लोग राजनीतिक दल चुनाव से पहले वादे किया करते थे लेकिन कोई भी इसके लिए गंभीर नहीं था. और उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते हुए इस फ़ैसले को कानूनी जामा पहना दिया है.

आम चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे पर फ़ैसला करके बीजेपी ने ये बता दिया है कि वह आगामी चुनाव जीतने के लिए तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

इससे पहले मोदी सरकार तीन तलाक, एनआरसी, राम मंदिर और भ्रष्टाचार विरोधी तमगे के दम पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर चुकी है.

लेकिन सवाल ये है कि ये पांच मुद्दे मोदी सरकार को चुनावी मौसम में क्या दे पाएंगे?

सामान्य वर्ग को आरक्षण बीजेपी को क्या देगा?

पीएम मोदी ने आगरा में रैली के दौरान लोगों को ज़ोर-शोर से ये बताने की कोशिश की कि इस मुद्दे को लेकर पूर्ववर्ती सरकारें गंभीर नहीं थीं लेकिन उनकी सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करते सामान्य वर्ग के गरीबों को ये आरक्षण दिया.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसा करते हुए वंचित और शोषित वर्गों का हक़ नहीं छीना है.

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जब राजनीतिक विश्लेषक राधिका रामाशेषन से ये सवाल किया गया कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ कैसे ले पाएगी तो उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला चुनाव के मैदान में भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के साथ बातचीत में वह कहती हैं, "बीजेपी सरकार को हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ है. नोटबंदी और जीएसटी जैसे तमाम मुद्दों के चलते इन्हें सामान्य वर्ग के वोट नहीं मिले और छात्रों ने बेरोजगारी के चलते इन्हें नकार दिया. इसके बाद इन्हें लगा कि सामान्य वर्ग को आरक्षण देकर ये अपने से दूर जाते सामान्य वर्ग को भी संभाल लेंगे और दूसरे तबकों को भी अपने करीब ले आएंगे."

"आम चुनाव की बात करें तो बीजेपी को इस फैसले से फायदा ज़रूर मिलेगा क्योंकि बीजेपी प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर पार्टी है"

राम मंदिर मुद्दा

अगर राम मंदिर मुद्दे की बात करें तो बीजेपी ने फिलहाल इस मुद्दे पर किसी तरह की बयानबाजी से खुद को दूर रखा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हालिया इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार राम मंदिर के मुद्दे पर कोई फ़ैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लेना चाहेगी.

लेकिन मोदी सरकार के पास कोई मजबूत फ़ैसला लेने के लिए ज़्यादा समय नहीं है. क्योंकि मार्च से पहले ही अगले चुनावों के लिए आचार संहिता लागू हो जाएगी.

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आगामी दस जनवरी को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. और अगर कोर्ट में ये सुनवाई लगातार नहीं चलती है तो इसका फ़ैसला आम चुनाव से पहले आने के संकेत नहीं मिलते हैं.

और मार्च में आचार संहिता लागू होने के बाद मोदी सरकार राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश नहीं ला पाएगी. ऐसे में वक्त ही बताएगा कि बीजेपी को इससे कितना फायदा मिल पाएगा.

नागरिकता संशोधन अधिनियम का विषय

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से लेकर पार्टी के तमाम नेता बीते काफ़ी समय से इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.

अमित शाह जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कह चुके हैं कि सिटिज़न रजिस्टर बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया और पहली सूची में 40 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं.

इससे पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी कह चुके हैं कि देश के बाकी हिस्सों में भी एनआरसी लागू की जानी चाहिए, जिससे देश में दाखिल हो गए घुसपैठियों को पहचान कर बाहर निकाला जा सके.

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इससे संकेत मिलेत हैं कि सीमा से लगने वाली लोकसभा सीटों में बीजेपी इस मुद्दे पर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर सकती है.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर बीजेपी एनआरसी के तहत वोट पाने की उम्मीद कर रही है.

बीबीसी से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, ''लोकसभा चुनाव की दृष्टि से भाजपा को लगता है कि एनआरसी के मुद्दे पर वोट प्राप्त किए जा सकते हैं, क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू को सामने लाता है साथ ही इसमें एक तरह का धार्मिक पुट भी छिपा हुआ है. हालांकि, धर्म की बात बीजेपी को बोलने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती. बाहरी घुसपैठियों के मुद्दे को भावनात्मक रूप से पेश कर बीजेपी इसका फ़ायदा उठा सकती है.''

तीन तलाक़ का मुद्दा

तीन तलाक के मुद्दे पर अध्यादेश ला चुकी बीजेपी सरकार लगातार कहती आई है कि लैंगिक न्याय और समानता के लिए ये अध्यादेश लाना ज़रूरी था.

इसके बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेरते हुए उसे महिला विरोधी ठहराने की कोशिश भी की.

वहीं, कांग्रेस ने बीजेपी का विरोध करते हुए बीजेपी को महिला सरोकारों से मतलब नहीं है, बल्कि वो इस बिल को एक ज्वलंत राजनीतिक मुद्दा बनाए रखना चाहती है.

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ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा कैसे उठा पाएगी.

अध्यादेश आने के समय वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने बीबीसी हिंदी को बताया था, "राजनीतिक दल कोई कदम उठाता है तो निश्चित रूप से उसमें राजनीतिक हित जुड़ा होता है. दरअसल, बीजेपी को मुस्लिम समुदाय का समर्थन चुनाव में नहीं मिलता. वह पिछले कई सालों से कोशिश में है कि इस समुदाय में अपनी पैठ बनाई जाए. वह इसके जरिए मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है.''

भ्रष्टाचार विरोधी रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते काफ़ी समय से खुद को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने वाला चौकीदार बताते आए हैं.

हालांकि, रफ़ाल विमान सौदे पर सवाल उठने के बाद कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी पर सीधा हमला बोल रहे हैं. और बीजेपी इस मुद्दे पर रक्षात्मक मुद्रा में दिखाई दे रही है.

लेकिन बुधवार को आगरा में आयोजित एक रैली के दौरान मोदी ने एक बार फिर कहा कि वो दल जो एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, वो अब चौकीदार के डर से एक साथ आ रहे हैं.

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इसके साथ ही अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और मायावती के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच शुरू कराकर बीजेपी ये दर्शाने की कोशिश करेगी कि वह भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रही है.

हालांकि, इन मुद्दों पर बात करते हुए बीजेपी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने में कामयाब होगी या नहीं, ये समय ही बताएगा.

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