CBI प्रमुख आलोक वर्मा हटाए गए, पीएम की अध्यक्षता वाली समिति का फ़ैसला

  • 10 जनवरी 2019
आलोक वर्मा, अग्निशमन विभाग, Fire Services इमेज कॉपीरइट Getty Images

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया है. केंद्र सरकार ने उन्हें सीबीआई से हटाकर अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स विभाग का निदेशक नियुक्त किया है. साथ ही अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सीबीआई का कार्यकारी प्रमुख नियुक्त किया है.

दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के केंद्र के फ़ैसले को निरस्त कर दिया था. इसके बाद आलोक वर्मा ने दोबारा कार्यभार संभाल लिया था.

मगर समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों वाली उच्चस्तरीय समिति ने लंबी बैठक के बाद आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने का 2-1 से फ़ैसला किया.

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Image caption मल्लिकार्जुन खड़गे

पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि इस बैठक में लोक सभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की ओर से नियुक्त जस्टिस एक के सीकरी भी शामिल थे.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फ़ैसले का विरोध किया.

आलोक वर्मा को हटाने के फ़ैसले पर कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया,''आलोक वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना पद से हटाया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह जांच से कितने डरे हुए हैं. फिर वो संयुक्त संसदीय समिति की जांच हो या फिर स्वतंत्र सीबीआई निदेशक की जांच हो.'' 

आलोक वर्मा को हटाए जाने पर देर शाम कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जहां तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने सीवीसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और कहा कि वो पीएमओ के इशारे पर काम कर रहे हैं.

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Image caption आनंद शर्मा

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री को क्या घबराहट है. वो किसी भी कीमत पर सीबीआई डायरेक्टर के पद पर अपने पसंद के व्यक्ति को रखना चाहते हैं. कुछ चीज़ें हैं जिनपर प्रधानमंत्री और सरकार पर्दा डालना चाहती है."

उन्होंने कहा, "24 घंटे के अंदर ही कोई मज़बूरी है प्रधानमंत्री जी की कि उन्होंने सीबीआई डायरेक्टर को अपने पद पर नहीं रहने दिया. सीबीआई की साख और विश्वसनीयता का प्रश्न है. कौन ज़िम्मेदारी संभालेंगे, किसका चयन होगा?"

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Image caption प्रशांत भूषण

आनंद शर्मा ने साथ ही कहा, "सीवीसी अपनी विश्वसनीयता ख़त्म कर चुकी है. इस संस्था का दोबारा सेहतमंद होना मुश्किल लगता है. वो केवल प्रधानमंत्री के आदेश पर चलने वाली एजेंसी रह गई है."

वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने बीबीसी से कहा, '' सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल किए जाने के एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कमिटी ने आलोक वर्मा को फिर पद से हटा दिया. वर्मा को बुलाया तक नहीं गया. मोदी को राफेल घोटाले में एफआईआर का डर है. वो किसी भी जांच को रोकना चाहते हैं. ''

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चयन समिति ने लिया फ़ैसला

मंगलवार, 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के सरकार के निर्णय को ग़लत बताया था.

अदालत के फ़ैसले के बाद 75 दिनों के बाद आलोक वर्मा ने अपने पद पर वापसी की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही इस मामले को चयन समिति के पास भेजने का आदेश दिया था जिसके सदस्य प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ़ जस्टिस होते हैं.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजने या उनके अधिकार छीनने के लिए भी चयन समिति ही अंतिम फ़ैसला ले सकती है.

इस समिति की बैठक एक सप्ताह के भीतर होनी थी. अब चयन समिति ने अपना फ़ैसला दे दिया है.

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दो दिन पहले अदालत ने किया था बहाल

सर्वोच्च अदालत ने आलोक वर्मा को पद पर बहाल करते हुए ये भी कहा था वे इस दौरान कोई नीतिगत फ़ैसला नहीं ले पाएंगे. वे केवल प्रशासनिक फ़ैसले ले सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि सरकार ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के मामले में पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया.

ग़ौरतलब है कि छुट्टी पर भेजे जाने के आदेश के ख़िलाफ़ सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

कॉमन कॉज़ नाम की एक ग़ैर-सरकारी संस्था ने भी सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

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