सेना में समलैंगिक रिश्ते स्वीकार्य नहींः प्रेस रिव्यू

  • 11 जनवरी 2019
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Image caption जनरल बिपिन रावत

भारत के सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि सेना में समान सेक्स में रिश्तों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार जनरल बिपिन रावत ने कहा कि 12 लाख की संख्या वाली भारतीय सेना में समान सेक्स के रिश्तों को इजाज़त नहीं दी जाएगी.

15 जनवरी को मनाए जाने वाले सेना दिवस से पूर्व होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग में बिपिन रावत ने कहा कि सेना में एलजीबीटी मुद्दों के लिए कोई जगह नहीं है.

ग़ौर करने वाली बात है कि चार महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को अपराध की श्रेणी से हटाने का ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया था. अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई भी दो वयस्क लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल या ट्रांसजेंडर आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं तो वह अपराध नहीं माना जाएगा.

ख़बर के मुताबिक़ सेना प्रमुख से जब सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, ''हम रूढ़िवादी हैं. हम न तो आधुनिक हुए हैं और ना ही हम पश्चिम से प्रभावित हुए हैं. सेना में एलजीबीटी जैसे मुद्दे स्वीकार नहीं किए जाएंगे और ना ही सेना में एडल्ट्री जैसी चीज़ों के लिए कोई जगह है.''

शिवराज, वसुंधरा और रमन ड़ेंगे लोकसभा चुनाव

हाल ही तीन बड़े राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाली बीजेपी ने अब इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रमन सिंह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.

हिंदुस्तान में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि सूत्रों के अनुसार बीजेपी के ये तीनों नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा गया है. बताया गया है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के साथ ही यह तय हो गया था कि इन तीनों नेताओं को अब राष्ट्रीय राजनीति में लाया जाएगा जिससे इन राज्यों में नया नेतृत्व उभारा जा सके.

बताया गया है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यह नियुक्तियां राष्ट्रीय परिषद की बैठक के ठीक पहले की हैं.

इसके साथ ही शुक्रवार से दिल्ली के रामलीला मैदान में बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरुआत भी होने जा रही है. यह राष्ट्रीय अधिवेशन दो दिन तक चलेगा.

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Image caption शिवराज सिंह चौहान

आयुष्माभारत योजना से बंगाल सरकार हुई अलग

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि उनकी सरकार केंद्र की आयुष्मान भारत योजना से ख़ुद को अलग कर रही है.

इंडियन एक्सप्रेम में प्रकाशित समाचार के अनुसार ममता बनर्जी ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार इस योजना का श्रेय अकेले ले रही है जबकि इसका ख़र्च राज्य सरकारें उठा रही हैं.

बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ''हम आज आयुष्मान भारत योजना से अलग हो रहे हैं. अब केंद्र अकेले इस योजना का पूरा ख़र्च उठाए. क्योंकि हम अब इसमें योगदान नहीं करेंगे. आख़िर हम इस योजना पर ख़र्च क्यों करें जब सारा श्रेय मोदी ही लेते हैं.''

बंगाल सरकार ने इस संबंध में केंद्र को अपनी ओर से ख़त भेज दिया है.

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