सीबीआई को छत्तीसगढ़ में मनमर्जी की छूट नहीं देंगे: बघेल

  • 11 जनवरी 2019
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छत्तीसगढ़ सरकार ने सीबीआई को राज्य में जांच करने और छापा मारने के लिये दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है. राज्य सरकार ने 2001 में यह सामान्य सहमति सीबीआई को दी थी.

अब सीबीआई को अदालत के आदेश से होने वाली जांच और केंद्र सरकार के अधिकारियों के ख़िलाफ़ होने वाली जांच के अलावा किसी भी दूसरी जांच या छापामारी के लिये पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.

राज्य सरकार ने यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटा कर उन्हें अग्निशमन सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड्स के महानिदेशक की ज़िम्मेवारी सौंपी है.

राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीबीसी से कहा, "पिछले कुछ महीनों में केंद्र की एनडीए सरकार ने सीबीआई की विश्वसनीयता को संकट में डाल दिया है. इसलिए अब यह ठीक नहीं लगता कि सीबीआई को हम अपने राज्य में मनमर्ज़ी की कार्रवाई करने की छूट दें."

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उन्होंने सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा, "हम एक संघीय ढांचे में काम करते हैं और सीबीआई को जिस तरह से राज्य में आकर काम करने की छूट दी गई थी, उससे कानून व्यवस्था पर राज्य के अधिकारों का हनन हो रहा था."

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों के अनुभव बताते हैं कि सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी के तौर पर काम करने में असफल रही है.

इससे पहले पिछले साल नवंबर में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने भी अपने-अपने राज्यों में सीबीआई को दी गई सामान्य रजामंदी वापस ले ली थी.

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मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच

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राज्य सरकार ने सीबीआई से सामान्य सहमति ऐसे समय में वापस ली है, जब राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके विशेष सचिव व राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा के ख़िलाफ़ सीबीआई की कार्रवाई अदालत में लंबित है.

इस मामले में भूपेश बघेल और विनोद वर्मा जेल भी जा चुके हैं. सीबीआई ने मामले में कुछ महीने पहले ही आरोप पत्र भी पेश किया था.

27 अक्तूबर 2017 की सुबह छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने ग़ाज़ियाबाद से गिरफ़्तार किया था.

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इस मामले में भाजपा के एक पदाधिकारी प्रकाश बजाज ने ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें एक फ़ोन आया जिसमें उनके 'आका' की सेक्स सीडी बनाने की बात कही गई.

प्रकाश बजाज की एफ़आईआर में विनोद वर्मा के नाम का ज़िक्र नहीं है लेकिन एक दुकान का ज़िक्र था जहां पर कथित तौर पर सीडी की नकल बनाई जा रही थी.

ये एफ़आईआर 26 अक्तूबर की दोपहर साढ़े तीन बजे के आस पास दर्ज की गई थी और इस रिपोर्ट के दर्ज होने के लगभग 11 घंटों के भीतर ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली जाकर कथित दुकानदार, फ़ोन करने वाले की जानकारी, तमाम फुटेज एकत्र कर लिये और फिर वहां से गाज़ियाबाद पहुंचकर विनोद वर्मा को गिरफ़्तार कर लिया था.

एक अन्य मामला तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भूपेश बघेल व अन्य लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज किया गया था कि भूपेश बघेल ने राजनीतिक लाभ के लिये कथित सेक्स सीडी का वितरण किया था.

झीरम घाटी हमले की जांच

दूसरे मामलों की बात करें तो छत्तीसगढ़ में सीबीआई की अधिकांश जांच और कार्रवाई रिश्वतखोरी या गबन के मामलों से जुड़ी रही है. गबन के कई मामले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अपने हाथ में लिये हैं.

बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्या की सीबीआई जांच के दौरान सीबीआई अफसरों द्वारा रिश्वतखोरी का मामला चर्चा में आया था. अफसर के निलंबन और नये सिरे से जांच के बाद भी सीबीआई किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई. यह मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है.

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इसी तरह हाईकोर्ट के आदेश के बाद गरियाबंद के पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या की जांच के दौरान एक आरोपी की सीबीआई की हिरासत में मौत को लेकर भी भारी विवाद हुआ था. यह मामला भी अब तक लंबित है.

बस्तर के झीरम घाटी में हुए माओवादी हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में राज्य की भाजपा सरकार ने सीबीआई जांच कराने की घोषणा की थी. लेकिन जांच शुरु ही नहीं हुई.

पिछले महीने सत्ता में आते ही कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एसआईटी गठित करके झीरम घाटी हमले की जांच शुरू कर दी है.

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