गुरमीत राम रहीम पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में दोषी क़रार

  • 11 जनवरी 2019
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पंचकुला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी क़रार दिया है.

राम रहीम के साथ ही तीन अन्य लोगों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह, और कृष्ण लाल को भी दोषी ठहराया गया है.

सजा का ऐलान 17 जनवरी को किया जाएगा. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या 2002 में हुई थी.

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में सुनवाई के लिए गुरमीत राम रहीम वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए पेश हुए.

अगस्त 2017 में इसी स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को रेप केस में भी दोषी क़रार दिया था. पत्रकार रामचंद्र छत्रपित ने ही साल 2002 में इस रेप केस की जानकारी पहली बार दी थी.

बलात्कार के उस मामले में गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाने वाले जज जगदीप सिंह ने ही इस मामले में फ़ैसला सुनाया.

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Image caption पत्रकार रामचंद्र छत्रपति

रामचंद्र छत्रपति सिरसा के सांध्य दैनिक 'पूरा सच' के संपादक थे. साध्वी के साथ हुए रेप की ख़बर प्रकाशित करने के कुछ महीने बाद ही छत्रपति को अक्तूबर 2002 में गोली मार दी गई थी.

गंभीर रूप से घायल होने के कारण पत्रकार की बाद में मौत हो गई थी और 2003 में इस संबंध में मामला दर्ज़ किया गया था. इस मामले को 2006 में सीबीआई को सौंप दिया गया था.

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20 साल जेल की सजा काट रहे राम रहीम

अगस्त 2017 में राम रहीम को उनकी महिला अनुयायियों के साथ बलात्कार के मामले में जब सजा सुनाई गई थी, तब हरियाणा के सिरसा और पंचकुला में हिंसा भड़क गई थी जिसमें करीब 40 लोगों की मौत हो गई थी लिहाजा शुक्रवार के फ़ैसले के मद्देनज़र हरियाणा और पंजाब के कई क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पंचकुला में धारा 144 लगाई है.

क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य पुलिस, दंगारोधी पुलिस और पुलिस बल की कई कंपनियां तैनात की गई हैं. इसके अलावा डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के समीप भी अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है.

गौरतलब है कि 51 वर्षीय राम रहीम फिलहाल बलात्कार के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल कारावास की सजा काट रहे हैं.

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क्या है पूरा मामला?

बीबीसी हिंदी को सिरसा के स्थानीय पत्रकार प्रभु दयाल ने बताया 'साल 2000 में सिरसा में रामचंद्र छत्रपति ने वक़ालत छोड़कर "पूरा सच" के नाम से अख़बार शुरू किया था.'

प्रभु दयाल आगे बताते हैं, '2002 में उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी हाथ लगी जिसमें डेरे में साध्वियों के यौन शोषण की बात थी. उन्होंने उस चिट्ठी को छाप दिया जिसके बाद उनको जान से मारने की धमकियां दी गईं.'

'आख़िरकार 19 अक्तूबर की रात छत्रपति को घर के आगे गोली मार दी गई. इसके बाद 21 अक्टूबर को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई.'

प्रभु दयाल बताते हैं कि इस दौरान वह होश में आए लेकिन राजनीतिक दबाव कारण छत्रपति का बयान तक दर्ज नहीं किया गया जिसके बाद उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की.

वह बताते हैं कि छत्रपति अपने अख़बार में डेरा सच्चा सौदा की ख़बरों को छापते थे जिसके कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलती रहती थीं.

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Image caption डेरा सच्चा सौदा

सोशल मीडिया पर उठी थी न्याय की मांग

2017 में बलात्कार के मामले में राम रहीम को दोषी क़रार दिए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के लिए न्याय की मांग उठने लगी थी.

Image caption पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति

अंशुल ने यादों में पिता की हत्या

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने बीबीसी से हत्या के दिन की कहानी साझा की.

"उस दिन करवाचौथ का दिन था. मेरी मां को अचानक अपने मायके किसी की मौत का शोक प्रकट करने के लिए जाना पड़ा था."

"मेरे पिता रामचंद्र छत्रपति अक्सर अख़बार का काम करने के बाद घर लेट आते थे. मेरी मां के घर से जाने के कारण उस दिन मेरी छोटी बहन और भाई ने मुझे घर जल्दी आने के लिए कहा इसलिए मैं घर पर था. मेरे पिता भी उस दिन करवाचौथ का दिन होने के कारण जल्दी घर आ गए थे."

24 अक्तूबर, 2002 की घटना को याद करते हुए रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति भावुक हो जाते हैं.

"मेरे पिता मोटर साइकिल आंगन में खड़ा करके अंदर आए ही थे कि किसी ने आवाज़ देकर उन्हें बाहर आने को कहा. जैसे ही वो बाहर गए, अचनाक स्कूटर पर आए दो नौजवानों में से एक ने दूसरे को कहा- मार गोली. और उसने मेरे पिता पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं."

"हम तीनों बहन भाई जितनी देर में यह समझ पाते कि हुआ क्या है, वो नौजवान भाग चुके थे. "

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जान जोखिम में डाल न्याय की उम्मीद क़ायम रखी

अंशुल ने आगे बताया, "हम तीनों ने शोर मचाया और अपने पिता को संभालने की कोशिश की. पिताजी गली में से उठकर घर के दरवाज़े तक तो आ गए लेकिन फिर गिर पड़े. हमारा शोर सुनकर गोली चलाकर भागे एक नौजवान को घर से थोड़ी दूर एक पुलिस चौकी पर तैनात एक सिपाही ने पकड़ लिया. इसकी बाद में पुलिस ने शिनाख़्त भी कर ली."

"अब तक लोग इकट्ठे हो गए थे. हमने पड़ोसियों की कार मांगी और पिताजी को सरकारी अस्पताल ले गए. मेरे पिता को गोली मारे जाने की ख़बर आग की तरह फैली और रिश्तेदारों समेत कई लोग अस्पातल में इकट्ठे हो गए."

उनकी हालात बहुत ख़राब थी इसलिए उन्हें रोहतक मेडिकल कॉलेज रेफ़र कर दिया गया. वहां उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ पर फिर बिगड़ने पर दिल्ली के एक निजी अस्पातल ले जाया गया. वहां उनकी मौत हो गई.

अंशुल ने आरोप लगाया कि उनके पिता बयान देने की स्थिति में थे पर पुलिस ने उनके बयानों को मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज नहीं करवाया.

अंशुल कहते हैं, "हमारे ऊपर कई नेताओं ने दबाव डाला कि हम इस मामले में पीछे हट जाए. हमारे लिए डेरा जैसी बड़ी ताक़त से लड़ना बहुत मुश्किल था. जब ये हुआ तब मेरी उम्र महज़ 22 साल थी और मैं बीए फ़र्स्ट ईयर का छात्र था.

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मामले से जुड़ी तारीख़ें

  • 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान छत्रपति की मौत हो गई थी.
  • दिसंबर 2002 में छत्रपति के परिवार ने पुलिस की जांच से असंतुष्ठ होकर मुख्यमंत्री को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की गुहार लगाई.
  • जनवरी 2003 में मृतक के पुत्र अंशुल ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की. इस याचिका में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर भी इसमें संलिप्त होने के आरोप लगाए.
  • हाई कोर्ट ने पत्रकार छत्रपति और एक डेरा प्रेमी रंजीत सिंह की हत्या के मामलों को जोड़ते हुए 10 नवंबर, 2003 को सीबीआई को एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया.
  • दिसंबर 2003 में सीबीआई ने जांच शुरू की. रंजीत सिंह की हत्या भी 2002 में ही हुई थी.
  • इसी महीने डेरा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें कहा कि सीबीआई की जांच पर रोक लगाई जाए. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और मामले की जांच पर उस वक़्त रोक लगा दी गई.
  • नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका को ख़ारिज कर दिया और सीबीआई जांच को जारी रखने के आदेश दिए.
  • सीबीआई ने दोबारा दोनों मामलों की जांच शुरू की और डेरा प्रमुख समेत कइयों को अभियुक्त बनाया.
  • इसके ख़िलाफ़ डेरा समर्थकों ने चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया.
  • 25 अगस्त 2017 को दो साध्वियों के लगाए गए बलात्कार के आरोपों के मामले में पंचकुला की सीबीआई अदालत ने डेरा प्रमुख राम रहीम को दोषी क़रार दिया और 20 साल क़ैद की सज़ा सुनाई.

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