सीबीआई निदेशक से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा का इस्तीफ़ा, इस्तीफ़े में क्या लिखा है

  • 11 जनवरी 2019
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सीबीआई डायरेक्टर के पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने इस्तीफ़ा दे दिया है. केंद्र सरकार ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाकर अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स विभाग का महानिदेशक बनाया था.

लेकिन आलोक वर्मा ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी चंद्रमौली को अपना इस्तीफ़ा भेजा है. अपने इस्तीफ़े में उन्होंने कहा है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नही दिया गया और उन्हें न्याय नहीं मिला है. वो 31 जनवरी को रिटायर भी होने वाले थे.

हालांकि वर्मा ने अपने इस्तीफ़े ये भी कहा है कि उनकी सरकारी सेवा 31 जुलाई, 2017 को ही समाप्त हो गई थी, वे तो सीबीआई निदेशक के तौर पर दो साल का टर्म पूरा कर रहे थे.

दरअसल, गुरुवार की रात प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने 2-1 से सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को उनके पद से हटाने का फ़ैसला लिया था.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के मोदी सरकार के फ़ैसले को निरस्त कर दिया था. इसके बाद आलोक वर्मा ने दोबारा कार्यभार संभाल लिया था.

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पढ़ें आलोक वर्मा ने अपने इस्तीफ़े में क्या लिखा?

आलोक वर्मा ने अपना इस्तीफ़ा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी. चंद्रमौली को भेजा है. उन्होंने अपना इस्तीफ़े में लिखा है-

10 जनवरी 2019 के आदेश के अनुसार मेरा सीबीआई से तबादल करके फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड महानिदेशक बनाया गया है.

1. सेलेक्शन कमेटी ने फ़ैसला लेने से पहले मुझे सीवीसी के दर्ज विवरणों पर स्पष्टीकरण का अवसर प्रदान नहीं किया. जानबूझ कर स्वाभाविक न्याय नहीं दिया गया और पूरी प्रक्रिया को उलट दिया गया ताकि मुझे सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया जाये. सेलेक्शन कमेटी ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि सीवीसी रिपोर्ट में आधार उस एक शिकायतकर्ता के आरोपों को बनाया गया है, जिसपर खुद सीबीआई जांच चल रही है.

यह भी ध्यान देने योग्य है कि सीवीसी ने केवल उस शिकायतकर्ता के कथित रूप से हस्ताक्षरित बयान को आगे बढ़ाया और शिकायतकर्ता इस जांच की निगरानी कर रहे माननीय (रिटायर्ड) जस्टिस एके पटनायक के सामने कभी नहीं पेश हुए.

2. ये संस्थाएं हमारे लोकतंत्र के सबसे मजबूत प्रतीकों में से हैं और यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि सीबीआई आज भारत की सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से है. गुरुवार को लिए गए फ़ैसले न केवल मेरे कामकाज पर असर डालेंगे बल्कि इस बात का साक्ष्य भी बनेंगे कि एक संस्था के रूप में कोई भी सरकार सीवीसी के ज़रिए सीबीआई के साथ कैसा बर्ताव करेगी, जिन्हें सत्तारूढ़ सरकार के सदस्यों के बहुमत पर नियुक्त किया जाता है. यह सामूहिक आत्मनिरीक्षण का वक्त है.

3. करियर के चार दशकों के दौरान मेरी ईमानदारी ही मेरी प्रेरक शक्ति रही है. मैंने एक बेदाग रिकॉर्ड के साथ भारतीय पुलिस सर्विस की सेवा की है और अंडमान, निकोबार द्वीप समूह, पुड्डुचेरी, मिजोरम, दिल्ली में पुलिस बलों के साथ ही दिल्ली जेल और सीबीआई जैसे दो संगठनों का नेतृत्व भी किया है.

मैं सौभाग्यशाली हूं कि जिन बलों का नेतृत्व मैंने किया है मुझे उनका अमूल्य समर्थन प्राप्त हुआ है, जिसकी बदौलत उन बलों की उत्कृष्ट उपलब्धियां और उनकी समृद्धि पर सीधा असर पड़ा. मैं भारतीय पुलिस सर्विस और विशेषकर उन संगठनों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिनके लिए मैंने काम किया.

इसके अलावा, यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि 31 जुलाई 2017 को अपनी सरकारी सेवा पूरी कर ली थी और केवल 31 जनवरी 2019 तक सीबीआई निदेशक के रूप में सरकार की सेवा कर रहा था, क्योंकि यह दो साल के लिए निर्धारित कार्यकाल था.

चूंकि अब मैं सीबीआई निदेशक नहीं हूं और पहले ही डीजी फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स के लिए अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र को पार कर चुका हूं, इसलिए मुझे सेवानिवृत माना जाए.

आपका धन्यवाद,सादर,आलोक कुमार वर्मा

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