आलोक वर्मा को हटाने वाली कमिटी के सदस्य जस्टिस सीकरी ने केंद्र का ऑफ़र ठुकरायाः प्रेस रिव्यू

  • 14 जनवरी 2019
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द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने वाली कमेटी के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के जज एके सीकरी ने केंद्र सरकार के एक प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

केंद्र सरकार ने उनका नाम लंदन में राष्ट्रमंडल सचिवालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (सीसैट) के लिए भेजा था, जिसे कांग्रेस ने सीबीआई के पूर्व निदेशक को पद से हटाने के फ़ैसले में उनकी सहमति से नामांकन को जोड़कर देखा था.

इसके बाद जस्टिस सीकरी ने रविवार की शाम केंद्र को पत्र लिख कर सीसैट में उनके नामांकन से इनकार कर दिया.

ये ऑफर कुछ वक़्त पहले ही जस्टिस सीकरी को दिया गया था. इससे पहले मीडिया के एक तबके में ये ख़बरें आ रही थीं कि आलोक वर्मा मामले में सरकार का साथ देने का फ़ायदा जस्टिस सीकरी को मिला है.

माना जा रहा है कि सीकरी ने ऐसी खबरों पर 'दुख' जताते हुए यह कदम उठाया है. जस्टिस सीकरी 06 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो रहे हैं.

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अवसरवादी गठबंधन कर अपना साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैंः मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के ख़िलाफ़ महागठबंधन की कवायद पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि अगर मोदी इतना ही ख़राब है, सरकार काम नहीं कर रही है तो गठबंधन की ज़रूरत क्यों पड़ी.

अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक मोदी ने कहा कि भाजपा जनता को सशक्त बनाना चाहती है. वहीं विपक्षी अवसरवादी गठबंधन कर अपना साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं.

नरेंद्र मोदी तमिलनाडु की पांच संसदीय सीटों के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रविवार को बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष में हमारे कुछ मित्र बड़े ही भ्रमित हैं. वे सरकार को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ते.

Image caption देश के इतिहास में पहली बार तीन-तीन महिला जजों के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने का रिकॉर्ड बीते साल अगस्त में ही बना है

उच्च न्यायालयों में सिर्फ़ 73 महिला न्यायाधीश

जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक़, देश के उच्च न्यायालयों में सेवारत 670 न्यायाधीशों में सिर्फ़ 73 महिला न्यायाधीश हैं.

सरकार ने संसदीय कमेटी को ये जानकारी दी है.

23 मार्च 2019 तक न्यायाधीशों की मंज़ूर संख्या 1079 थी जबकि सिर्फ़ 670 न्यायाधीश ही देश के उच्च न्यायालयों में नियुक्त थे.

सरकार ने साफ किया कि उच्च न्यायपालिका में आरक्षण के लिए अनुच्छेद 124 और 217 में संशोधन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

जनसत्ता की एक दूसरी ख़बर के मुताबिक़, मेहरम यानी पुरुष साथी के बिना हज पर जाने की इजाजत मिलने के बाद इस साल 2340 महिलाएं अकेले हज जाने की तैयारी में है.

पिछले साल के मुकाबले ये संख्या दोगुनी है.

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