आरक्षण: निजी शिक्षा संस्थानों में कैसे लागू करेगी सरकार?

  • 16 जनवरी 2019
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Image caption प्रकाश जावड़ेकर

9 जनवरी को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फ़ीसदी के आरक्षण बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति से मंजूरी मिल चुकी है.

इसके साथ ही सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को 10 फ़ीसदी आरक्षण विधेयक ने अब क़ानून का रूप ले लिया है लेकिन मंगलवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरक्षण को लेकर एक नया राग छेड़ा है.

उन्होंने देश के प्राइवेट सेक्टर के उच्च शिक्षा संस्थानों में भी इसे लागू करने का इरादा ज़ाहिर किया है.

जावड़ेकर ने कहा, "संसद ने जो 124वां संविधान संशोधन किया. उसके अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फ़ैसला लिया है कि इस वर्ष से, 2019 के सत्र से ही 10 फ़ीसदी आरक्षण लागू होगा. 10 फ़ीसदी आरक्षण आर्थिक आधार पर ग़रीबों के लिए जो किया गया है, और ये करते समय एससी, एसटी, ओबीसी के आरक्षण को बिल्कुल धक्का नहीं लगेगा, वो बरकरार रहेंगे. और ये एडिशनल 10 परसेंट होंगे."

"इसके लिए आज मीटिंग हुई यूजीसी, एआईसीटीई और हमारे अधिकारी के बीच. इसी वर्ष से इसे लागू करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को सूचना दी जाएगी और उनके प्रॉस्पेक्टस में ये डाला जाएगा कि 10 फ़ीसदी आरक्षण, जो अनारक्षित वर्ग है, जिनको आज तक आरक्षण नहीं मिला है, ऐसे वर्गों के छात्रों के लिए 10 फ़ीसदी आरक्षण रहेगा, ये आर्थिक आरक्षण रहेगा, और इसमें निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू रहेगा. 40 हज़ार कॉलेज और 900 विश्वविद्यालयों में ये लागू रहेगा. और इसके लिए ज़्यादा सीटें निर्माण करेंगे."

"आज देश में चार करोड़ छात्र कॉलेज में पढ़ रहे हैं. टेक्नीकल, नॉन टेक्नीकल, मैनेजमेंट, आर्ट, साइंस, कॉमर्स सभी फैकेल्टिज़ में ये आरक्षण लागू होगा. और इसके लिए यूजीसी, एआईसीटीई और मंत्रालय एक हफ़्ते में निकालेंगे. यह बहुत बड़ा फ़ैसला है और इसके लिए संसद को भी हम रिपोर्ट करेंगे."

"10 परसेंट आरक्षण रख कर एससी-एसटी और ओबीसी को बाधित किए बगैर, अभी यदि 100 लोगों को एडमिशन मिल रहा है तो क़रीब 125 लोगों को एडमिशन मिलेगा."

जावड़ेकर का बयान क्यों महत्वपूर्ण?

राजनीतिक रूप से जावड़ेकर की यह घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि जावड़ेकर ने यह स्पष्ट किया कि सीटों को बढ़ाने का फ़ैसला इसलिए किया गया ताकि 10 फ़ीसदी आरक्षण लागू होने के बाद किसी भी वर्ग को पहले से मिल रही सीटों पर कोई असर नहीं पड़े.

वैसे अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को पहले ही 10 फ़ीसदी आरक्षण के दायरे से बाहर रखा गया है.

लेकिन निजी संस्थानों में एक आदेश की बदौलत 10 फ़ीसदी आरक्षण को सरकार कैसे लागू करवाएगी, इसे लेकर असमंजस की स्थिति है.

2009 में पारित शिक्षा के अधिकार क़ानून के तहत आर्थिक रूप से कमज़ोर और उपेक्षित वर्ग के बच्चों के लिए 25 फ़ीसदी सीटें आरक्षित किये जाने का प्रावधान किया था.

केंद्र सरकार बार बार यह कह रही है कि 10 फ़ीसदी आरक्षण के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी. यूजीसी से मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालय और शैक्षिक संस्थान चाहे वो सरकारी हो या निजी उन्हें आरक्षण लागू करना होगा.

ऑल इंडिया उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन या एआईएसएचई) 2018-19 के अनुसार, देश में कुल 950 विश्वविद्यालय, 41748 कॉलेज और 10,510 स्टैंडअलोन शिक्षण संस्थान हैं.

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क्या है मौजूदा स्थिति?

मौजूदा वक्त में भी निजी कॉलेजों में आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं है. इससे जुड़े कुछ मामले अदालत में चल रहे हैं.

मीडिया आई ख़बरों के मुताबिक केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित उच्च शैक्षिक संस्थानों समेत देश भर के शिक्षण संस्थानों में यदि 10 फ़ीसदी आरक्षण देना है तो इसके लिए क़रीब 10 लाख सीटें बढ़ानी होंगी.

इस पर ये कि भारत में कई शिक्षण संस्थानों का वर्तमान ढांचा अपर्याप्त है, उनमें उपकरणों की कमी है और सक्षम शिक्षकों का अभाव है.

इतना ही नहीं निजी कॉलेजों में आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं है और इससे जुड़े कुछ मामले अदालत में चल रहे हैं.

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष राहुल कारद ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "इतना बड़ा फ़ैसला लेने से पहले सरकार को निजी संस्थानों से बात करके उन्हें विश्वास में लेना चाहिए था. भारत में निजी संस्थानों ने आधारभूत ढांचे के विकास के लिए काफ़ी ज़्यादा खर्च किया है और उन्हें अपने खर्चों को निकालना है. और उनके ऊपर पहले से काफ़ी भार है. ऐसे में उन पर ये भार नहीं डाला जाना चाहिए."

एक और स्थिति ये है कि, पिछले पांच सालों के दौरान कम होते एडमिशन के चलते अप्रैल 2018 में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने 800 इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने का फ़ैसला किया था.

यानी सच ये भी है कि नौकरियों की कमी की वजह से पहले से चल रहे कई उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र घट रहे हैं.

ऐसे में सीटें बढ़ाने का फ़ैसला और निजी संस्थानों में आरक्षण पर सरकार क्या करेगी इस पर सभी की नज़रें बनी हुई हैं.

सरकार ने जुलाई 2019 से इसे लागू करने के बात कही है लेकिन सवाल यह भी है कि इतने कम समय में इसे कैसे लागू करेंगे क्योंकि मौजूदा मूलभूत सुविधाओं के साथ छात्रों की संख्या कैसे बढ़ाएंगे. सबसे पहला सवाल तो यही है कि बुनियादी सुविधाएं कहां हैं?

10 फ़ीसदी आरक्षण को लागू करने के लिए जिन सीटों को बढ़ाने की बात की जा रही है. उन छात्रों को बिठाएंगे कहां?

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