स्वाइन फ़्लू: अमित शाह को हुई बीमारी मेक्सिको से आई है

  • 17 जनवरी 2019
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भारत में एक बार फिर से स्वाइन फ़्लू सुर्खियों में है. अमित शाह के बीमार होने के बाद बहुत सारे लोग इसके बारे जानना चाहते हैं.

क्या है स्वाइन फ़्लू?

यह सांस से जुड़ी बीमारी है, जो इंफ़्लुएंज़ा टाइप A से होता है. इसी का वैज्ञानिक नाम H1N1 है और ब्रिटेन जैसे कई देशों में इससे बचाव के लिए टीके भी लगाए जाते हैं. ये टीके सभी लोगों को नहीं, लेकिन उनको लगाए जाते हैं जिन्हें कुछ दूसरी बीमारियों की वजह से अधिक ख़तरा होता है.

इसका नाम स्वाइन फ़्लू इसलिए पड़ा क्योंकि ये सुअरों को आम तौर पर पाया जाने वाला फ़्लू है.

स्वाइन फ़्लू के शुरुआती मामले 2009 में मैक्सिको में पाए गए थे. तब से अब तक लगभग सौ देशों में इस संक्रमण ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है.

प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों से पता चला कि इस वायरस के जींस उत्तरी अमरीका के सूअरों में पाए जाने वाले जींस जैसे होते हैं इसलिए इसे स्वाइन फ़्लू कहा जाने लगा.

वैज्ञानिक भाषा में इस वायरस को इंफ़्लुएंज़ा-ए (एच1एन1) कहा जाता है. शुरुआत में ये माना जा रहा था कि इसके संक्रमण में सूअरों की भूमिका होती है लेकिन बाद में पाया गया कि ये इंसान से इंसान के बीच भी फैलता है, ख़ास तौर खांसने और छींकने पर.

आम तौर पर होने वाला जुकाम भी H1N1 से ही होता है लेकिन स्वाइन फ़्लू एच1एन1 की एक खास किस्म से संक्रमित होने के कारण होता है.

स्वाइन फ़्लू से सबसे ज़्यादा मौतें महाराष्ट्र में क्यों?

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Image caption 10 साल पहले मेक्सिको में स्वाइन फ़्लू से बहुत सारे लोग प्रभावित हुए थे

स्वाइन फ़्लू के लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षण आम फ़्लू से मिलते जुलते ही हैं इसलिए इसकी पहचान खून की जाँच से ही संभव है.

वैसे इसके प्रमुख लक्षण हैं- सिर में दर्द, अचानक तेज़ बुखार, गले में खराश, खांसी, बदन में दर्द, सांस लेने में दिक्कत.

इसके अलावा, कई लोगों को इसकी वजह से पेट में दर्द, डायरिया, भूख न लगने, नींद न आने और उल्टियां आने की शिकायत भी हो सकती है.

इसके गंभीर संक्रमण के कारण शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं, जिसके कारण मौत भी हो सकती है.

आमिर ख़ान और उनकी पत्नी को स्वाइन फ़्लू

Image caption आमिर ख़ान को भी हो चुका है स्वाइन फ़्लू

क्या इसका इलाज संभव है?

इसका इलाज संभव है. इसके मरीज़ों का उपचार टैमीफ़्लू और रेलेन्ज़ा नामक वायरसरोधी दवा से शुरुआती अवस्था में किया जा सकता है.

डॉक्टर मरीज़ों को आराम करने, भरपूर पानी पीने और शरीर को गर्म रखने की सलाह देते हैं.

शरीर के दर्द के लिए डॉक्टर ब्रुफ़ेन जैसी दवा देते हैं, बुखार को कम करने के लिए पैरासीटामोल दिया जा सकता है.

यह समय के साथ ठीक होने वाली बीमारी है लेकिन अगर व्यक्ति को दमा या निमोनिया जैसी बीमारियां हों तो जटिलता बढ़ जाती है.

डॉक्टरों के अनुसार, दवाएं इस फ़्लू को रोक तो नहीं सकती पर इसके ख़तरनाक असर को कम ज़रूर कर सकती है.

सोनम कपूर को स्वाइन फ़्लू - BBC News हिंदी

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Image caption दो साल पहले भारत के कई राज्यों में लोग स्वाइन फ़्लू की चपेट में आए थे

इसके बचाव के क्या उपाय हैं?

स्वाइन फ़्लू से बचने का सबसे अच्छा तरीका स्वच्छता के नियमों का पालन करना.

भीड़-भाड़ वाली जगहों या सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें, खांसते और छींकते वक्त मुंह और नाक को रुमाल या कपड़े से ढंकें और दूसरों से भी ऐसा ही करने के लिए कहें.

फ्ल़ू प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें और सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर मास्क लगाएँ.

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