सबरीमला में प्रवेश करने वाली महिला के लिए घर के दरवाज़े बंद

  • 23 जनवरी 2019
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केरल के सबरीमला में मंदिर में प्रवेश कर इतिहास रचने वाली महिला, कनकदुर्गा को उनके पति ने घर से बाहर निकाल दिया है.

इस साल की शुरुआत में 50 साल की कम उम्र की एक और महिला के साथ कनकदुर्गा ने सबरीमला में मौजूद स्वामी अयप्पा के मंदिर में प्रवेश किया था.

सोमवार शाम कनकदुर्गा अस्पताल से छूटीं थीं. इससे पहले उनकी अपनी सास के साथ इस मुद्दे पर झड़प हो गई थी कि उन्होंने स्वामी अयप्पा के मंदिर में प्रार्थना कर प्राचीन परंपरा तोड़ी है. इस झड़प में कनकदुर्गा को सिर पर चोट आ गई थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

समाजसेवी तंकाचन विठयाटिल ने बीबीसी को बताया, "उनको पता चला कि उनके पति ने घर छोड़ दिया है और दरवाज़े पर ताला लगा दिया है. वो कनकदुर्गा से बात करने के लिए तैयार नहीं हैं. कनकदुर्गा के साथ पुलिस भी मौजूद थी जो उन्हें सोमवार रात को एक सरकारी महिला सहायता केंद्र पर लेकर आई."

जब कनकदुर्गा अस्पताल में थीं तभी उन्हें पता चला था कि उनके ससुराल वाले नहीं चाहते कि वो वापस घर आएं. इस कारण अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पहले वो पुलिस थाने पहुंची थीं.

मल्लापुरम के पुलिस अधीक्षक प्रतीश कुमार ने बताया, "कनकदुर्गा के पति पुलिस थाने आए थे और वो नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी वापस घर आएं. कनकदुर्गा का कहना था कि अपने पति के साथ ही रहेंगी. इस पर उनके पति ने कहा कि वो थाने में ही रहेंगे. हमने दोनों को समझाया-बुझाया और हमने कनकदुर्गा को केरल सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बनाए गए महिला सहायता केंद्र में भेज दिया."

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मामला अब अदालत में जाएगा

ज़िला पुलिस प्रमुख का कहना है कि, "कनकदुर्गा ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है और इसलिए अब ये घरेलू हिंसा का मामला भी बन गया है. अब ये मामला कोर्ट में पहुंचेगा."

कनकदुर्गा ने शिकायत उसी दिन दर्ज कराई थी जिस दिन उनकी अपनी सास के साथ झड़प हुई थी. सबरीमला मंदिर से लौटने के बाद प्रदर्शनकारियों के डर से वो कई दिनों तक छिप कर रहीं. जिस दिन वो घर लौटीं उसी दिन उनके घर पर उनको विरोध का सामना करना पड़ा था.

39 और 40 साल की कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी ने दो जनवरी को लंबी यात्रा करने के बाद सबरीमला मंदिर में प्रवेश किया. इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बीते साल उस आदेश का पालन भी किया जिसके अनुसार 10 से 50 साल की सभी महिलाओं को मंदिर में प्रार्थना करने की अनुमति है.

मंदिर के परिसर में प्रवेश करने के लिए इन दोनों महिलाओं ने उन सभी रीति-रिवाज़ों का पालन किया जो मंदिर की 18 सीढ़ियां चढ़ने से पहले भक्तों के लिए ज़रूरी होते हैं. इससे पहले भी इन्होंने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी. इस बार उनके साथ सादे लिबास में महिला पुलिस अधिकारी भी थीं.

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24 दिसंबर को पुलिस की भारी मौजूदगी में भी कनकदुर्गा और बिंदु ने मंदिर में जाने की कोशिश की थी. उस वक्त भाजपा के साथ जुड़े संगठन सबरीमला कर्मा समिति के सदस्यों ने पुलिस का विरोध किया था

ये समिति बीते साल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध कर रही है क्योंकि इसका मानना है कि मासिक धर्म होने वाली उम्र की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश हर हाल में रोका जाना चाहिए क्योंकि ये परंपरा के विरुद्ध है.

28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 4-1 के बहुमत से परंपरा के ऊपर महिला के अधिकारों को तरजीह दी थी.

तंकाचन ने बताया, "बुधवार को कनकदुर्गा निचली अदालत में अपने घर में प्रवेश की अनुमति पाने के लिए गुहार लगाएंगी. फिलहाल को इस मामले में किसी से कोई बात नहीं करना चाहतीं."

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