कश्मीर की बर्फबारी पड़ रही लोगों पर भारी

  • 23 जनवरी 2019
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Image caption ट्रक ड्राइवर राम सिंह अपने साथियों के साथ

बाहर गिरती बर्फ़ के बीच खड़े ट्रकों की लंबी क़तार. ट्रक के बोनट पर रखे स्टोव को जब ड्राइवर राम सिंह खाना पकाने के लिए जलाते हैं तो वहां बैठे लोग पहले हाथ तापना शुरू कर देते हैं.

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर बीते दो दिन से फंसे ये ट्रक ड्राइवर सर्द रातों में न सो पाने और कड़ाके की ठंड होने की बात को बार-बार दोहराते हैं.

40 साल के राम सिंह बीबीसी से कहते हैं, ''बीते दो दिनों से जो तकलीफ़ हमें हो रही हैं, उसे आपको कैसे बताऊं.''

राम सिंह पंजाब के अंबाला के ट्रक ड्राइवर हैं और वो भारी बर्फ़बारी की वजह से अनंतनाग के संगम में फँसे हुए हैं. वो बीते हफ़्ते दिल्ली से माल ढोकर कश्मीर आए थे.

रास्ते बंद होने की वजह से राम सिंह समेत सैकड़ों ड्राइवरों को ट्रकों के साथ आगे बढ़ने की पुलिस से इजाज़त नहीं मिल रही है.

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'मालूम नहीं...घर कब जा सकूंगा'

अपने ट्रक की खिड़की से बाहर झांकते हुए राम सिंह कहते हैं, ''पता नहीं ये बर्फ़ गिरनी कब बंद होगी ताकि मैं अपने घर जा सकूं.''

बर्फ़बारी की वजह से जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर यातायात को प्रशासन ने बंद किया है. इस वजह से हाईवे पर ट्रकों की लंबी क़तार लग गई है. इस हाईवे को कश्मीर की लाइफ़ लाइन भी कहा जाता है. ये इकलौता हाईवे है जो कश्मीर से पूरे भारत को सड़क के रास्ते जोड़ता है.

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इसी हाईवे पर फँसे संतोष कहते हैं, ''मेरी अपने बेटे से बात हुई थी. वो मेरे घर आने के बारे में पूछ रहा था. लेकिन मैं उसे क्या जवाब दूं. हमें बिलकुल नहीं मालूम कि ये रास्ता कब खुलेगा और हम कब जम्मू जा सकेंगे. ट्रक के अंदर बैठे रहना और सोना आसान नहीं है. तापमान माइनस में रहता है. सोने के अलावा खाने और पैसों की क़िल्लत से भी हम जूझ रहे हैं. ''

जम्मू-श्रीनगर हाईवे 300 किलोमीटर लंबा है. जवाहर टनल में बर्फ़ का जमा होना रास्तों को बंद किए जाने की अहम वजह है.

रविवार को हुई बर्फ़बारी के बाद कई जगह भूस्खलन भी हुआ, जिससे न सिर्फ़ ट्रक बल्कि यात्री गाड़ियां भी इस हाईवे पर फँसी हुई हैं.

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बर्फ़बारी कब थमेगी?

मौसम विभाग का अनुमान है कि कश्मीर में 23 जनवरी तक भारी बर्फ़बारी और बारिश होनी है.

क़ाज़ीगुंड में भी सैकड़ों ट्रक रास्ता खुलने का इंतज़ार कर रहे हैं.

इसी इलाक़े में फँसे ट्रक ड्राइवर मोहम्मद आरिफ़ कहते हैं, ''रातों को नींद नहीं आती है. नींद आए भी तो ट्रकों की बैटरी चार्ज रखने के लिए हमें ट्रक चालू रखना पड़ता है. अगर ऐसा नहीं करेंगे तो सुबह ट्रक चालू ही नहीं होगा. एक रात में यही काम पांच बार करना होता है. ट्रक इतने ज़्यादा हैं कि हम पास की दुकानों तक खाने का सामान लेने तक नहीं जा सकते. जिन ट्रकों में खाने का सामान है, वो जवाहर टनल में फंसे हुए हैं. कश्मीर की दुकानों में खाने का सामान ख़त्म हो रहा है. आप इसी से हमारी तकलीफ़ का अंदाज़ा लगा सकते हैं.'

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ऐसे ही एक ट्रक ड्राइवर जम्मू के मोहम्मद रमज़ान हैं.

वो कहते हैं, ''हमें मालूम है कि जब तक रास्ता नहीं खुलेगा तब तक हम जा नहीं सकेंगे. गाड़ी चलाते हुए मुझे सालों हो गए हैं. कई तकलीफ़ों से गुज़रे हैं. यहां बड़ी दिक़्क़त ये है कि हमें पीने का पानी तक नहीं मिल रहा. स्थानीय लोग कई बार पानी देते हैं. कई बार हमें खाने और पानी के लिए काफ़ी दूर जाना पड़ता है. बीते तीन दिन से यही हमारी दिनचर्या है.'

हिमस्खलन की वजह से रामबन में दो लोग मारे गए थे और दो लोग लापता हैं.

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अतीत में बर्फ़बारी रही कितनी जानलेवा?

1995 में जवाहर टनल के पास हिमस्खलन होने से कई लोगों की जान गई थी. तब भी इस रास्ते को बंद किया गया था.

लेकिन बर्फ़बारी का सबसे बड़ा क़हर साल 2005 में देखने को मिला.

2005 में हुए हिमस्खलन की वजह से 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी. तब इस हिमस्खलन की वजह से प्रभावित हुए लोगों को अब तक मुआवज़े का इंतज़ार है.

प्रशासन ने कश्मीर में हिमस्खलन की आशंका को देखते हुए नौ ज़िलों को अगले 24 घंटे के लिए अलर्ट पर रखा है.

कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल (ट्रैफिक) आलोक सिंह ने बताया कि क़रीब 350 ट्रक हाईवे पर फंसे हुए हैं. उधमपुर में 1400 ट्रक ट्रैफिक पुलिस ने रोके हैं.

आलोक सिंह ने कहा, ''मौसम के बारे में मिलने वाली जानकारियों के आधार पर हम गाड़ियों को रोक रहे हैं. हम हर किसी की सुरक्षा चाहते हैं. अलग-अलग हिस्सों में हमने 1400 ट्रक रोके हैं. बर्फ़बारी अभी थमी नहीं है. क़रीब 70 किलोमीटर के रास्ते पर बर्फ़ ढकी हुई है. मौसम बेहतर हुआ तो हम यातायात फिर से शुरू कर देंगे.'

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