अमित शाह ने क्या मालदा रैली में झूठ बोला?

  • 23 जनवरी 2019
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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलावार को मालदा की रैली में विरोधियों पर यूनाइटेड इंडिया रैली में 'भारत माता की जय' और जय हिंद के नारे ना लगाने का आरोप लगाया.

दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को यूनाइटेड इंडिया रैली का आयोजन किया था. इस रैली में पूरा विपक्ष एक मंच पर नज़र आया था.

रैली में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, डीएमके नेता एमके स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और एनसीपी नेता शरद पवार सहित कई नेताओं ने शिरकत की थी.

इन नेताओं ने मंच से ही संदेश दिया कि आने वाले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टियां सत्ता रूढ़ बीजेपी के ख़िलाफ़ मैदान में उतरेंगी.

इस रैली के जवाब में अमित शाह ने मालदा की रैली में कहा, ''इन लोगों (विपक्ष) ने रैली में जय हिंद के नारे नहीं लगाए.''

उन्होंने कहा, ''महागठबंधन विपक्ष की अवसरवादी राजनीति की झलक है. वे लोग देश से प्यार नहीं करते.''

अमित शाह के इस आरोप को बीजेपी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट भी किया.

लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या ये आरोप सच हैं? जवाब है-नहीं. अमित शाह का विपक्ष की रैली पर लगाया गया ये आरोप झूठा है.

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि यूनाइटेड इंडिया रैली में विपक्षी नेताओं ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए थे.

पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने अपने भाषण का अंत 'भारत माता की जय' के नारे के साथ ही किया था.

पटेल ने 2017 में गुजरात के चुनाव के दौरान बीजेपी के ख़िलाफ़ चुनाव प्रचार का नेतृत्व किया था. हालांकि वो किसी राजनीतिक पार्टी का कभी हिस्सा नहीं रहे. गुजरात में हुए पाटीदार आंदोलन में हार्दिक पटेल सबसे बड़े पाटीदार नेता के रूप में उभरे.

सिर्फ़ हार्दिक ही नहीं ममता बनर्जी ने भी अपने भाषण का अंत 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के साथ ही किया था.

अमित शाह पहले शख़्स नहीं है जिन्होंने विपक्ष की रैली में ऐसे नारे ना लगाए जाने के आरोप लगाए हों. इससे पहले एक सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट वायरल हुआ था जिसमें दावा किया जा रहा था कि न्यूज़ चैनल आज तक की न्यूज़ एंकर श्वेता सिंह ने भी विपक्ष की रैली में ऐसे नारे ना लगाए जाने की बात कही है.

हालांकि उन्होंने ऐसे किसी भी ट्वीट से इनकार किया है जो विपक्ष की रैली में लगने वाले नारों से जुड़े हों.

बीजेपी और विपक्षी पार्टियां चुनावी कैंपेन में अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं और ऐसे में राष्ट्रवाद का मुद्दा बार-बार चर्चा का विषय बन जाता है.

कई बार बीजेपी नेताओं ने बयान दिया है, ''जो भी वंदे मातरम और जय हिंद के नारे लगाने से इनकार करता है वो हिंदू-विरोधी हैं. ''

ये मुद्दा बार-बार उठता रहा है, खासकर मुसलमान नेताओं के बीच. एएमआईएम के नेता और सांसद असदउद्दीन ओवैसी कई बार कह चुके हैं कि वंदे मातरम् कहना 'हमारे मज़हब के ख़िलाफ़ है'.

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साल 2017 में उन्होंने एएनआई एजेंसी से कहा था, ''हम लोग केवल अल्लाह की पूजा करते हैं. हम मक्का और पैगंबर मोहम्मद की भी पूजा नहीं करते. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हम अपने वतन से प्यार नहीं करते. इतिहास गवाह है कि हमने वतन पर सब कुछ न्यौछावर किया है और आगे भी करेंगे. लेकिन संविधान के मुताबिक हमें अपना धर्म मानने की स्वतंत्रता है.''

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये हैरानी की बात नहीं है बीजेपी ने विपक्ष को वंदे मातरम या भारत माता की जय के नारों पर घेरा हो, लेकिन इस बार पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने झूठे दावों के जरिए घेरने की कोशिश की.

अब तक बीजेपी के किसी भी बड़े नेता और बीजेपी के ट्विटर से विपक्ष पर लगाए गए झूठे आरोप पर सफ़ाई नहीं पेश की गई है.

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