एम्स दिल्ली में डॉक्टरों से मांगी गई धर्म और जाति की जानकारीः प्रेस रिव्यू

  • 28 जनवरी 2019
एम्स दिल्ली

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टरों से धर्म और जाति का विवरण मांगा गया है. एम्स के निदेशक ने इसे अनुचित और चौंकाने वाला क़दम माना है.

दरअसल एम्स ने डॉक्टरों से उनका पूरा विवरण मांगा है जिसमें धर्म और जाति की जानकारी भी मांग ली गई है. एक पन्ने के इस फॉर्म को सभी डॉक्टरों का डाटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से बीते सप्ताह वितरित किया गया था.

एम्स के निदेशक डॉ. रनदीप गुलेरिया ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि उन्हें इस फॉर्म के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने ये भी कहा है कि एम्स में कभी भी डॉक्टरों से उनके धर्म और जाति के बारे में नहीं पूछा गया है.

किसानों को जल्द राहत दे सकती है केंद्र सरकार

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार जल्द ही किसानों को राहत दे सकती है. केंद्र सरकार की कैबिनेट जल्द ही किसानों को राहत देने के लिए रिलीफ़ पैकेज की घोषणा कर सकती है. माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों से पहले किसानों के असंतोष को शांत करने के लिए ये क़दम उठाया जा रहा है. कृषि मंत्रालय ने किसानों को दीर्घकालिक और अल्पकालिक राहत देने के उद्देश्य से कई सुझाव दिए हैं.

मुझे अदालत में पूरा विश्वास हैः चोकसी

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भारत छोड़कर गए उद्योगपति मेहुल चोकसी ने कहा है कि उन्हें एंटीगा की अदालत में पूरा भरोसा है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चोकसी ने कहा है कि उनके प्रत्यर्पण से जुड़ी याचिका पर अभी एंटीगा की अदालत में सुनवाई चल रही है और उन्हें अदालत पर भूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, "बेशक भारत मेरा जन्मस्थान है लेकिन अभी मैं स्वस्थ नहीं हूं और यात्रा करने की हालत में नहीं हूं. एक बार जब मैं स्वस्थ हो जाउंगा और यात्रा करने लायक हो जाउंगा तो अपना नाम ज़रूर साफ़ करूंगा." मेहुल चौकसी और उनके रिश्तेदार नीरव मोदी पर भारत की बैंकों से क़र्ज़ लेकर न लौटाने के आरोप हैं. फिलहाल उन्होंने भारतीय पासपोर्ट लौटाया दिया है और एंटीगुआ की नागरिकता ले ली है. भारत सरकार उन्हें वापस लाने के प्रयास कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने रोका जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर का प्रयास

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इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट के हाई प्रोफ़ाइल जज जस्टिस एस मुरलीधर को ट्रांस्फर करने का प्रयास कोलेजियम में किया गया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया. अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ये प्रयास दोबारा किया जा सकता है. अख़बार के मुताबिक कोलेजियम में दिसंबर और जनवरी में दो बार जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर पर चर्चा की गई है. जस्टिस मुरलीधर सांप्रदायिक हिंसा और व्यक्तिगत आज़ादी से जुड़े मामलों में दिए गए अपने फ़ैसलों के लिए जाने जाते हैं. साल 2018 में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में कई अहम फ़ैसले दिए जिन पर देश भर में चर्चा हुई.

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