बेरोज़गारी की लीक हुई रिपोर्ट पर नीति आयोग की सफ़ाई

  • 31 जनवरी 2019
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने देश में रोज़गार की स्थिति से जुड़ी उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है, जिसे बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार ने छापा था.

इस ख़बर में दावा किया गया था कि नेशनल सैंपल सर्वे ऑफ़िस के एक सर्वे में सामने आया है कि साल 2017-18 में बेरोज़गारी की दर पिछले 45 साल में सबसे ज़्यादा रही.

अख़बार का दावा था कि सरकार ने इस रिपोर्ट को जारी नहीं होने दिया. इस रिपोर्ट को भारत की राष्ट्रीय स्टैटिस्टिक्स कमीशन (एनएसओ) ने अपनी मंज़ूरी दे दी थी.

इसी सप्ताह के शुरू में एनएसओ से जुड़े दो अधिकारियों ने ये कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि सरकार ने उनकी रिपोर्ट को जारी करने से मना कर दिया है.

ख़बर सामने आते ही विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया.

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लेकिन अब नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने सामने आकर सफ़ाई दी है. उनका कहना है कि जिस रिपोर्ट के बारे में बात की जा रही है वो 'सत्यापित नहीं है' और इस रिपोर्ट के लिए इस्तेमाल किए गए 'डेटा को भी सत्यापित नहीं किया जा सका है'.

राजीव कुमार ने कहा कि सरकार मार्च तक रोज़गार के बारे में रिपोर्ट जारी करेगी.

इस साल अप्रैल-मई में ही आम चुनाव होने हैं, ऐसे में बेरोज़गारी से जुड़े इस तरह के आंकड़े बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकते हैं.

बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर सामने आते ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस ख़बर को शेयर किया.

उन्होंने लिखा, "नमो जॉब्स! एक साल में दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया गया था. पांच साल बाद उनकी रोज़गार से जुड़ी लीक हुई रिपोर्ट एक राष्ट्रीय त्रासदी की तरह सामने आती है. पिछले 45 साल में सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी इस वक़्त है. सिर्फ़ 2017-2018 में ही 6.5 करोड़ युवा बेरोज़गार हैं."

रिपोर्ट में और क्या है?

बिजनेस स्टैंडर्ड ने जो रिपोर्ट छापी है, उसके मुताबिक़ भारत में साल 2017-18 में बेरोज़गारी की दर 6.1 फ़ीसदी रही जो कि साल 1972-73 के बाद से सबसे ज़्यादा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, 2017-18 में बेरोज़गारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में 5.3% और शहरी क्षेत्र में सबसे ज़्यादा 7.8% रही.

इनमें नौजवान बेरोज़गार सबसे ज़्यादा थे, जिनकी संख्या 13% से 27% थी.

शहरी इलाक़ों में 15 से 29 साल के लोगों के बीच बेरोज़गारी की दर ख़ासा अधिक है. शहरों में 15 से 29 साल की उम्र के 18.7 फ़ीसदी मर्द और 27.2 फ़ीसदी महिलाएं नौकरी की तलाश में हैं. इसी उम्र ब्रैकेट में ग्रामीण इलाक़ों में 17.4 फ़ीसदी पुरुष और 13.6 फ़ीसदी महिलाएं बेरोज़गार हैं.

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2011-12 में बेरोज़गारी दर 2.2% थी. जबकि 1972-73 में यह सबसे ज़्यादा थी. बीते सालों में कामगारों की ज़रूरत कम होने से ज़्यादा लोग काम से हटाए गए.

नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 के दिन देश में नोटबंदी लागू की थी, जिसके तहत एक हज़ार और पांच सौ के पुराने नोट बंद कर दिए गए थे.

तब कांग्रेस समेत विपक्ष पार्टियों ने इससे रोज़गार पर असर पड़ने के दावे किए थे.

इस रिपोर्ट के लिए जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच आंकड़े जमा किए गए थे. नोटबंदी और जीएसटी के बाद रोज़गार से जुड़ा ये पहला सर्वे था.

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