कर्नाटक में पीएम मोदी की रैली, कौन होगा निशाने पर

  • 10 फरवरी 2019
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कर्नाटक में चुनावी अभियान का आगाज़ करते हुए रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महागठबंधन पर हमले करने के लिए तैयार हैं.

पिछले साल कर्नाटक में ही पहली बार विपक्षी दलों ने एकता दिखाई थी और अब मोदी वहां से रैली करके बीजेपी की ताक़त दिखाने की कोशिश करेंगे.

पीएम मोदी उत्तरी कर्नाटक के हुबली में रविवार शाम एक सभा को संबोधित करने वाले हैं. राज्य में बीजेपी को साल 2014 के लोकसभा चुनावों में 28 में से 17 सीटें मिली थीं.

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कौन होगा मोदी के निशाने पर

इस सभा में मोदी किन दो बातों पर ज़ोर देने वाले हैं इसके बारे में विपक्षी दलों के प्रतिनिधि और विश्लेषक अच्छी तरह जानते हैं.

राजनीतिक विश्लेषक महादेव प्रकाश ने बीबीसी को बताया, ''यह बिल्कुल साफ़ है कि उनका ज़ोर महागठबंधन पर होगा. इस महागठबंधन के तहत कई दल पिछले साल 23 मई को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में एकजुट हुए थे. दूसरा मुद्दा जिसे वो उठाएंगे वो है किसानों की कर्ज़ माफ़ी. कुमारस्वामी ने किसानों से कर्ज़ माफ़ी का वादा किया था.''

राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि कर्ज़ माफ़ी को लेकर मोदी का हमला चलाकी से होगा. साथ ही वो उस गलती को सुधारने का कोई प्रयास नहीं करेंगे, जो उन्होंने कथित तौर पर लोकसभा में की थी. कुमारस्वामी ने जिसका आरोप लगाया था.

कुमारस्वामी ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर 'संसद को गुमराह' करने का आरोप लगाया था. उनके अनुसार मोदी का संसद में ये कहना गलत था कि ''कर्नाटक में कर्ज़ माफ़ी योजना से सिर्फ़ पांच हजार किसानों को फ़ायदा हुआ है.''

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कर्नाटक सरकार ने किसानों को सहयोग के लिए धन्यवाद देने के लिए अख़बारों में आधे पेज का विज्ञापन निकाला था. इस विज्ञापन में लिखा था कि कर्ज़ माफ़ी की दिशा में चार लाख किसानों के लिए पहली किस्त के तौर पर 1900 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.

ये चार लाख किसान उन 29 लाख किसानों में से हैं जिन्होंने अपने सही आधार कार्ड, राशन कार्ड और भूमि सर्वेक्षण संख्या जमा किए हैं. बचे हुए सात लाख किसानों को उनका सही आधार कार्ड और भूमि सर्वेक्षण संख्या फरवरी तक देने के लिए कहा गया है.

एक अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर बीबीसी हिंदी को बताया कि कोऑपरेटिव और बैंक ऋण में छूट की प्रक्रिया एक सॉफ्टवेयर के जरिए की गई थी जिससे स्पष्टता लाने में मदद मिली. इससे ये जानने में मदद मिली कि बैंक, सरकार और किसानों सहित सभी हितधारकों को पता होगा कि किसान के पहचान संबंधी प्रमाण दिए जाने के बाद कौन से कर्ज़ को मंजूरी दी जा रही है.

कुमारस्वामी ने कहा था, ''प्रधानमंत्री बार-बार ये झूठ बोल रहे हैं कि हम अपने वादे के मुताबिक कर्ज़ माफ़ी करने में असफल हुए हैं. जबकि हम ये व्यवस्थित तरीके से कर रहे हैं.''

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सरकार की उपलब्धियों पर फोकस

धारवाड़ यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हरीश रामास्वामी ने कहा, ''मोदी एक चतुर वक्ता हैं और जानते हैं कि बोलते हुए ​कैसे जोड़-तोड़ करनी है. वो कुछ इस तरह अपनी बात रखते हैं कि लोग उन पर भरोसा कर लें.''

पहचान छिपाने की शर्त पर एक कांग्रेस नेता ने कहा, ''प्रधानमंत्री निश्चित रूप से इस मुद्दे पर गठबंधन सरकार पर हमला करेंगे क्योंकि उन्हें लगता है कि कुमारस्वामी ने 46 लाख किसानों के 44 हजार करोड़ रुपये के कर्ज़ को एक ही दिन में माफ़ करने का वादा किया था. यह अव्यावहारिक है क्योंकि सरकार को कर्ज़ माफ़ करने के लिए पहले बैंक में पैसे जमा करने होंगे.''

कांग्रेस नेता ने कहा, ''लेकिन, मोदी इसे बड़ा मुद्दा बनाएंगे जबकि कुमारस्वामी अपने बजट में वादा कर चुके हैं कि वो अगले दो या तीन महीनों में कर्ज़ माफ़ कर देंगे.''

प्रोफेसर रामास्वामी कहते हैं, ''मोदी ये भूलते हुए की जनता दल एक बार (2006-2008) उनकी भी सहयोगी रही है, जनता दल और कांग्रेस की गठबंधन सरकार को निशाने पर लेंगे.''

बीजेपी के प्रवक्ता डॉक्टर वामन आचार्य ने कहा, ''वह महागठबंधन पर हमला करेंगे और उनका फोकस अपनी सरकार की उपलब्धियों और महागठबंधन की खामियों पर होगा.''

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हुबली क्यों है महत्वपूर्ण

नरेंद्र मोदी के हुबली से ही चुनाव अभियान कर शुरुआत करने का महत्व ये है कि ये जगह उत्तरी कर्नाटक का दिल है.

प्रोफेसर रामास्वामी ने कहा, ''यह वही क्षेत्र है जहां चुनावों में बीजेपी के मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है और यहीं से पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटें भी मिली थीं.''

उत्तरी कर्नाटक में मुंबई-कर्नाटक और हैदराबाद-कर्नाटक के क्षेत्र शामिल हैं. इस क्षेत्र में लिंगायत समुदाय का बहुमत है और राज्य में बीजेपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा इसी समुदाय से आते हैं. यहां तक कि येदियुरप्पा राज्य के सभी दलों में सबसे बड़े लिंगायत नेता हैं.

उत्तरी कर्नाटक में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस है. जेडीएस के पास इस क्षेत्र में बहुत कम या कहें कि बिल्कुल भी समर्थन नहीं है.

जेडीएस का प्रभाव दक्षिणी कर्नाटक के ज़िलों में देखने को मिलता है जहां उसे वोक्कालिगा जैसे अन्य उच्च जाति समूहों में समर्थन हासिल है. यहां जेडीएस के लिए कांग्रेस बड़ी चुनौती है.

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