मोदी और चंद्रबाबू नायडू की तू-तू मैं-मैं परिवारों तक जा पहुंची : नज़रिया

  • 11 फरवरी 2019
चंद्रबाबू नायडू और मोदी इमेज कॉपीरइट Getty Images

बीजेपी और कभी उसकी सहयोगी रही आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के बीच चल रहे खींचतान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चंद्रबाबू नायडू ने एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमलों के साथ एक नये मुक़ाम को छुआ.

यह आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के समय विशेष राज्य का दर्जा देने के अपने वादे के पूरा करने में नाकाम रही मोदी सरकार के विरोध में दिल्ली में सोमवार से नायडू के शुरू हो रहे भूख हड़ताल से एक दिन पहले हुआ.

'धर्म पोरता' (धर्म के लिए संघर्ष) के नाम से नायडू की इस भूख हड़ताल को कांग्रेस समेत 22 पार्टियों का समर्थन हासिल है.

बीते वर्ष मार्च में एनडीए सरकार से टीडीपी के बाहर होने के बाद रविवार को मोदी पहली बार आंध्र प्रदेश के दौरे पर थे. नायडू ने इसे 'काला और बुरा दिवस' बताते हुए राज्य के साथ हुए अन्याय के ख़िलाफ़ लोगों से विरोध का आह्वान किया.

आंध्र प्रदेश पहुंचने पर मोदी को टीडीपी और लेफ़्ट पार्टी के सदस्यों के काले झंडे और "मोदी नेवर अगेन" और "मोदी नो एंट्री" की होर्डिंग्स का सामना करना पड़ा.

कांग्रेस ने भी मोदी के दौरे का विरोध किया जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर ने इससे दूरी बनाए रखी, इस पर टीडीपी ने इसके प्रमुख जगनमोहन रेड्डी पर आंध्र-विरोधी पार्टी बीजेपी से सांठ-गांठ का आरोप मढ़ा.

मोदी देश के भीतर हाल के अपने दौरे के दौरान काले झंडे और विरोध का सामना कर रहे हैं.

कई राज्यों में मोदी का विरोध

असम, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक में उन्हें आंध्र प्रदेश के जैसे ही विरोध का सामना करना पड़ा है.

दक्षिण भारत के इन तीन राज्यों में मोदी ने आगामी चुनावों के मद्देनज़र रविवार को रैलियों को संबोधित किया.

मोदी और नायडू के बीच एक दूसरे के लिए विरोध का आलम यह था कि नायडू ने राज्य के किसी मंत्री को रिवाज के मुताबिक़ प्रधानमंत्री के स्वागत में भेजने तक को नज़रअंदाज़ किया.

गुंटूर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने नायडू पर ज़ोरदार हमला करते हुए उन्हें उनके 'ससुर एनटी रामा राव का ग़द्दार' और चुनाव से पहले दल बदलने वाला शख़्स तक कह डाला.

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Image caption असम में बीजेपी की सहयोगी रही असम गण परिषद ने नागरिकता बिल के ख़िलाफ़ मार्च निकाला.

मोदी ने नायडू के बेटे को घसीटा

मोदी ने नायडू के बेटे लोकेश के राजनीतिक उदय का ज़िक्र करते हुए टीडीपी सरकार को 'बाप-बेटे की सरकार' भी कहा.

उन्होंने कहा, "नायडू ने सन राइज़ (सूर्य उदय) का वादा किया था लेकिन राज्य को सन राइज़ (बेटे का उदय) दिया."

केंद्र ने राज्य के लिए कुछ भी नहीं किया, मोदी ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा, "हमने जो वादा किया था उससे ज़्यादा किया. लेकिन नायडू ने यू-टर्न ले लिया क्योंकि राज्य का विकास सुनिश्चित करने के लिए वो फ़ंड का सही से इस्तेमाल नहीं कर रहे थे."

उन्होंने कहा कि नायडू 'चौकीदार' से डरते थे कि वो पैसों का हिसाब मांगेगा.

टीडीपी का कांग्रेस से हाथ मिलाने का ज़िक्र करते हुए मोदी ने कहा कि नायडू यह भूल गए कि एनटी रामा राव ने भारत को कांग्रेस मुक्त बनाने के लिए तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की थी.

उन्होंने कहा, "नायडू हर चुनाव से पहले अपने दोस्त बदलते हैं और अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए उनके पैरों पर गिर जाते हैं."

मोदी के दौरे पर प्रदर्शनकारियों ने काले शर्ट पहने, काले ग़ुब्बारे भी छोड़े गए, और हाथ में काले झंडे लेकर बाइक पर रैली निकाली गई.

वहीं राज्य के बीजेपी नेताओं ने टीडीपी सरकार पर आरोप लगाया कि लोगों को मोदी की सभा में शामिल होने से रोका गया.

उन्होंने पुलिस से मोदी विरोधी होर्डिंग्स की भी शिकायत की. पुलिस ने कुछ होर्डिंग्स हटा भी दिए.

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नायडू ने जशोदाबेन का नाम घसीटा

मोदी के 'लोकेश के पिता' कहने पर नायडू ने भी जवाबी हमला किया और प्रधानमंत्री की पत्नी जशोदाबेन का नाम घसीटा.

उन्होंने कहा, "जब आपने मेरे बेटे का ज़िक्र किया है तो मैं आपकी पत्नी का ज़िक्र करता हूं. लोगों, क्या आपको पता है नरेंद्र मोदी की एक पत्नी भी हैं? उनका नाम जशोदाबेन है."

साथ ही नायडू ने कहा कि मोदी पारिवारिक मूल्यों का सम्मान नहीं करते.

नायडू के बेटे लोकेश राज्य में कैबिनेट मंत्री हैं और कई महत्वपूर्ण विभाग उनके पास है, साथ ही वो पार्टी के महासचिव भी हैं.

मोदी के भाषण के कुछ ही घंटों के बाद नायडू ने गुंटूर में कहा, "आपने अपनी पत्नी को छोड़ दिया. क्या आपके पास पारिवारिक व्यवस्था को लेकर कोई सम्मान है."

इस दौरान उन्होंने ख़ुद को पारिवारिक व्यवस्था से प्यार करने वाला और उसका सम्मान करने वाला शख़्स बताया.

नायडू ने शासन के मुद्दे को लेकर भी मोदी पर निशाना साधा और उन पर, ख़ास तौर पर नोटबंदी के ज़रिए, देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया.

दोनों के बीच इस तीखे नोकझोंक और व्यक्तिगत हमले से यह स्पष्ट है कि दोनों पार्टी आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों पर आमने सामने की चुनावी लड़ाई की तैयारी कर रही हैं.

दोनों पार्टियां ने 2014 का लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक गठबंधन में लड़ा था. टीडीपी ने 15 और बीजेपी ने दो सीटों पर जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आंध्र प्रदेश की आठ सीटों पर जीत हासिल की थी.

लेकिन मार्च 2018 में यह गठबंधन टूट गया जब मोदी सरकार ने चुनावी वादों को तोड़ते हुए आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने से इंकार कर दिया.

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Image caption चंद्रबाबू नायडू के साथ उनकी पत्नी एन.भुवनेश्वरी (दाएं से दूसरी), बेटा एन. लोकेश (बाईं तरफ) और बहू ब्रहाम्णी (बाएं से दूसरी)

अब मोदी विरोधी प्रदर्शनों के साथ और ख़ास कर दिल्ली में भूख हड़ताल से, नायडू निश्चित ही क्षेत्रीय भावनाओं और आत्मसम्मान पर भरोसा रखते हुए राज्य की मुख्य प्रतिद्वंद्वी वाईएसआर कांग्रेस से मुक़ाबला कर रही है.

आंध्र प्रदेश में बीजेपी की उपस्थिति या उसके संगठन की ताक़त बहुत कम है और वर्तमान दो सीटों को भी वो बरक़रार रख सके इसकी संभावना कम है.

ऐसे भी संकेत हैं कि नायडू का सामना करने के लिए वाईएसआर कांग्रेस अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के साथ हो जाए. बीजेपी के सामने दूसरा विकल्प यह है कि उसे तेलुगु फ़िल्म स्टार पवन कल्याण की जन सेना पार्टी से हाथ मिलाना होगा.

दूसरी ओर टीडीपी, कांग्रेस के साथ चुनावी तालमेल कर सकती है.

(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. इसमें शामिल तथ्य और विचार बीबीसी के नहीं हैं और बीबीसी इसकी कोई ज़िम्मेदारी या जवाबदेही नहीं लेती है)

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