प्रियंका गांधी का रोड शो, लेकिन बोला कुछ नहीं

  • 12 फरवरी 2019
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पिछले महीने कांग्रेस पार्टी में महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी बनीं प्रियंका गांधी ने सोमवार को लखनऊ में अपना पहला रोड शो किया.

लखनऊ हवाई अड्डे से कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय तक 15 किलोमीटर का सफ़र करने में प्रियंका को क़रीब पांच घंटे लगे.

उनके क़ाफ़िले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पश्चिमी उत्तरप्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज बब्बर और कई वरिष्ठ नेता शामिल थे.

पार्टी ऑफ़िस पहुंचने के बाद जब वहां मौजूद सभी लोग ये उम्मीद लगाए बैठे थे कि प्रियंका उनसे मुख़ातिब होंगी, तो उन्हें निराशा हाथ लगी.

क्योंकि प्रियंका ने कुछ नहीं बोला. हालांकि राहुल गांधी ने थोड़ी देर के लिए भाषण दिया.

उसमें उन्होंने ज़्यादातर वहीं बातें कहीं जो वो पिछले कुछ दिनों से लगातार कह रहे हैं. ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो करोड़ सालाना रोज़गार देने का वादा किया था जो पूरा नहीं हुआ, उन्होंने अपने दोस्त अनिल अंबानी को रफ़ाल मामले में 30 हज़ार करोड़ का फ़ायदा पहुंचाया और अपना वही पुराना नारा, चौकीदार चोर हैं.''

''उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन के बारे में सिर्फ़ एक बात कही, मैं मायावती जी और अखिलेश जी का बहुत आदर करता हूं, लेकिन कांग्रेस यूपी में पूरे दमख़म से लड़ेगी. कांग्रेस अपनी विचारधारा के लिए लड़ेगी. यूपी को बदलने के लिए लड़ेगी.''

उसके बाद राहुल, प्रियंका और ज्योतिरादित्य सभी पार्टी दफ़्तर के अंदर चले गए, जहां एक मीटिंग होनी है.

इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने उनके स्वागत की ज़ोरदार तैयारी की थी. कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरे शहर को प्रियंका गांधी के पोस्टरों से इस क़दर पाट दिया है, मानो वो लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी करने नहीं, बल्कि जीतकर आ रही हों.

यूं तो यूपी में प्रियंका गांधी को राजनीतिक भूमिका सौंपे जाने की ख़बर के बाद से ही कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं में ज़बरदस्त उत्साह है, अब यह उत्साह कार्यकर्ताओं ने अपनी नेता को भी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ा.

प्रियंका गांधी ने भी कार्यकर्ताओं को एक ऑडियो टेप जारी करके उनके उत्साह को और बढ़ा दिया है.

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Image caption प्रियंका गांधी के स्वागत में लखनऊ की दीवारों पर लगे पोस्टर

राहुल-प्रियंका का रोड शो

इस ऑडियो टेप में प्रियंका गांधी ने युवाओं, महिलाओं और ग़रीबों पर ख़ासतौर पर फ़ोकस किया है. इससे पहले कांग्रेस महासचिव नियुक्त होने के बाद प्रियंका ने पहला आधिकारिक बयान जारी किया था जिसमें उन्होंने यूपी और उत्तराखंड में ज़हरीली शराब से मरने वालों के प्रति संवेदना प्रकट की थी और सरकार को आड़े हाथों लिया था.

रविवार को इस तैयारी को लेकर पार्टी नेताओं में गंभीर मंथन हुआ और राज्य के लगभग सभी बड़े नेता उसमें मौजूद रहे. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की मौजूदगी भी ख़ास रही.

हरीश रावत का कहना था, "प्रियंका जी की मौजूदगी से यूपी में कांग्रेस को नई ताक़त मिलेगी. साल 2009 में भी लोग ये उम्मीद नहीं कर रहे थे कि हम इतनी बड़ी जीत दर्ज करेंगे, जबकि हमने 22 सीटें जीत लीं. इस बार उससे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे."

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला का कहना था कि कार्यकर्ताओं की लंबे समय से हो रही मांग पूरी हुई है इसलिए लोगों में ज़बरदस्त जोश है.

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प्रियंका सेना

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रियंका गांधी के समर्थन में जो पोस्टर और होर्डिंग्स लगाई हैं उनमें से तमाम ऐसे हैं जिनमें उनकी तुलना इंदिरा गांधी से की गई है.

यही नहीं, गुलाबी टी-शर्ट पहने युवाओं की एक टोली भी हमें लखनऊ में मिली जिनकी टी-शर्ट पर 'प्रियंका सेना' लिखा था. बताया जा रहा है कि ये सेना भी इंदिरा गांधी की वानर सेना की तर्ज पर बनाई गई है.

इस सेना के एक सदस्य ने हमें बताया, "हम लोगों का एक बड़ा समूह है जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हैं. प्रियंका गांधी के स्वागत के अलावा उनके कार्यक्रमों की ज़िम्मेदारी भी हम निभा रहे हैं. गुलाबी रंग की टी-शर्ट हमने इसलिए पहनी है कि हम महिलाओं को सम्मान दिलाना चाहते हैं."

हालांकि इन लोगों का कहना है कि ख़ुद प्रियंका गांधी को इस सेना के बारे में कुछ भी पता नहीं है.

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Image caption कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रियंका गांधी की तुलना इंदिरा गांधी से कर रहे हैं.

कितना फ़ायदा पहुंचाएंगी प्रियंका?

उधर प्रियंका गांधी के कार्यक्रम के चलते लखनऊ का कांग्रेस दफ्तर भी पूरा सजा दिया गया है. रंग-रोगन के साथ ही दफ़्तर में नया बोर्ड भी लगा है और आस-पास की सभी दीवारें पोस्टरों और होर्डिंग्स से पाट दी गई हैं. प्रदेश कांग्रेस के दफ़्तर में प्रियंका गांधी का एक कमरा भी तैयार किया गया है.

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र चुटकी लेते हैं, "हाल के दिनों ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है जब कांग्रेस का कोई यूपी प्रभारी लगातार चार दिन तक दफ़्तर में रुककर कार्यकर्ताओं से मिलेगा और चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी."

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कांग्रेस पार्टी महागठबंधन में शामिल नहीं है इसलिए इस बात को लेकर काफ़ी आशंकाएं हैं कि अकेले लड़कर कांग्रेस पार्टी ख़ुद का फ़ायदा करेगी या फिर गठबंधन का नुक़सान करेगी.

वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं, "नुक़सान और फ़ायदा अभी से तो तय नहीं हो सकता लेकिन बीजेपी नेताओं के बयान और टिप्पणियां ये बता रही हैं कि उनके यहां इस बात को लेकर हलचल ज़रूर है. सीटों के लिहाज़ से कितना फ़ायदा प्रियंका पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिला पाएंगी ये तो कहना मुश्किल है लेकिन कुल मिलाकर कांग्रेस को लाभ होना तय है."

इस रोड शो के बाद प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने-अपने क्षेत्रों में ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर जीत की योजना पर काम करने वाले हैं.

जानकारों के मुताबिक़, इसी दौरे में उम्मीदवारों के नामों पर भी आरंभिक चर्चा हो सकती है.

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