ममता बनर्जी की राजनीति है केंद्र से टकराव

  • 14 फरवरी 2019
पश्चिम बंगाल इमेज कॉपीरइट Sanjay Das/BBC

"दीदी भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए धरने पर बैठी थीं"-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

"ये आदमी (मोदी) भ्रष्टाचार का मास्टर है. पहले चाय वाला था और अब रफाल वाला बन गया है"-ममता बनर्जी

"बर्बर और अराजक है बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार"-योगी आदित्यनाथ

"योगी पहले अपना उत्तर प्रदेश संभालें जहां दिनदहाड़े पुलिस वालों की हत्या हो रही है" -ममता

एक-दूसरे पर हमला करने वाले ये तमाम बयान बीते एक हफ़्ते के दौरान के हैं.

इनसे पता चलता है कि दीदी के नाम से मशहूर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री अब केंद्र और बीजेपी से टकराव की राजनीति पर आगे बढ़ रही हैं.

इमेज कॉपीरइट Sanjay Das/BBC

रथयात्रा की अनुमति

वैसे, ममता, उनकी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के आपसी रिश्ते बीते चार-पांच साल से मधुर नहीं रहे हैं. लेकिन खासकर बीते छह महीनों से इसमें तेजी से तल्खी आई है.

इसकी शुरुआत बीते साल के आखिर में बीजेपी की प्रस्तावित रथयात्राओं को अनुमति नहीं देने से हुई थी.

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक के दरवाजे खटखटाने के बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने पार्टी को यहां रथयात्रा की अनुमति नहीं दी.

ममता नोटबंदी और जीएसटी के खिलाफ भी सबसे ज्यादा मुखर रही हैं.

लेकिन रथयात्रा और लगभग उसी समय से विपक्षी दलों का महागठंबधन बनाने की कोशिशों ने ममता और बीजेपी के बीच की खाई और बढ़ा दी है.

हाल के दिनों में तो दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर जैसे हमले कर रहे हैं, उसकी पहले कोई मिसाल नहीं मिलती.

भाजपा के 'उड़ता योगी' यूपी पर ध्यान दें: डेरेक ओ ब्रायन

मोदी से आर-पार की जंग के लिए ममता कितनी तैयार?

धरने से ममता का क़द बढ़ा या ये बीजेपी का डर है

टकराव की राजनीति

एक तरफ दीदी ने मोर्चा संभाल रखा है तो दूसरी ओर से नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गज लगातार जुबानी बम बरसा रहे हैं.

चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ की सीबीआई की कोशिशों के विरोध में धरने पर बैठ कर ममता ने अपनी साफ कर दिया है वे टकराव की इस राजनीति से पीछे नहीं हटेंगी.

दिलचस्प बात यह है कि ममता केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना के तहत काम करने का आरोप लगा रही हैं तो बीजेपी नेता भी उनकी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ यही आरोप लगा रहे हैं.

अब ताजा मामले में नदिया जिले के तृणमूल कांग्रेस विधायक सत्यजीत विश्वास की हत्या के मामले में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल राय के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है.

क्या वाक़ई जीत गईं ममता बनर्जी, ख़त्म किया धरना

मुहर्रम के लिए दुर्गा पूजा रोकी जा रही है: योगी

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से किसे राजनीतिक फ़ायदा मिलेगा

'राजनीतिक बदले की भावना'

तृणमूल कांग्रेस के जिला प्रभारी अणुब्रत मंडल कहते हैं, "इस हत्या के पीछे मुकुल राय का दिमाग है."

लेकिन मुकुल राय इसे अपने ख़िलाफ़ साजिश बताते हैं.

मुकुल राय कहते हैं, "ममता बनर्जी के निर्देश पर राजनीतिक बदले की भावना से ही उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. ये हत्या तृणमूल की अंतरकलह का नतीजा है."

उनका कहना है कि ममता बीजेपी से डरी हुई हैं. इसलिए किसी भी वजह से होने वाली हत्या का दोष बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर थोप दिया जाता है.

टकराव और शह-मात की इस राजनीति के तहत ममता अपने प्रशासनिक अधिकारों का भी इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटीं हैं.

CBI बनाम ममताः किसके हक़ में है क़ानून

आख़िर कमिश्नर से पूछताछ क्यों नहीं चाहतीं ममता

ममता- मोदी, पुलिस- सीबीआई के उलझने की कहानी

हेलीकॉप्टर प्रकरण

मिसाल के तौर पर पहले अमित शाह की मालदा रैली के दौरान हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति नहीं दी गई. ज़िला प्रशासन ने आख़िरी मौके पर इसकी इजाजत दी.

लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर को तो आखिर तक उतरने की अनुमति नहीं दी गई.

नतीजतन उत्तर बंगाल में बीते सप्ताह उनकी दो सभाएं रद्द करनी पड़ीं और दक्षिण बंगाल के बांकुड़ा में एक.

पुरुलिया की सभा के लिए योगी को झारखंड के बोकारो से सड़क मार्ग से लगभग 50 किमी की दूरी तय करनी पड़ी.

उनके अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान के हेलीकॉप्टरों को भी अनुमति नहीं दी गई.

ममता के साथ विपक्ष, बीजेपी बोली- लोकतंत्र की हत्या

ममता पर इतने हमले क्यों कर रहे हैं मोदी

'चार पीढ़ी राज करने वालों को चायवाला दे रहा चुनौती'

बंगाल के दौरे पर...

राज्य सरकार के इस रवैये के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी ममता की खिंचाई की है.

उन्होंने अपनी जलपाईगुड़ी की रैली में कहा, "दीदी घुसपैठियों का तो स्वागत कर रही हैं. लेकिन बीजेपी नेताओं को राज्य में आने से रोक रही हैं."

बीजेपी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान भी पार्टी के नेताओं के हेलीकॉप्टरों को उतरने की अनुमति नहीं देने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए यहां कहा कि इसकी वजह से पार्टी को कई रैलियां रद्द करनी पड़ी हैं.

खुद चौहान की एक सभा भी इसी वजह से रद्द करनी पड़ी.

बीजेपी नेता ने कहा कि ममता बनर्जी बीजेपी नेताओं को रोकने का जितना प्रयास करेंगी, वे लोग उतना ही बंगाल के दौरे पर दौरे पर आएंगे.

सरकार से असहमत सांख्यिकी आयोग सदस्यों का इस्तीफ़ा

अमित शाह ने क्या मालदा रैली में झूठ बोला?

प्रियंका गांधी क्या अगली इंदिरा गांधी हो सकती हैं?

तृणमूल का जवाब

योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी रैली में इसके लिए ममता पर जमकर बरसते हुए उनकी सरकार को बर्बर और अराजक तक करार दिया.

योगी ने कहा, "इस सरकार के अब गिने-चुने दिन रह गए हैं."

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा राज्य प्रशासन पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाते हैं.

सिन्हा कहते हैं, "हेलीकॉप्टरों को उतरने देने से इनकार कर बंगाल में बीजेपी के बढ़ते कदमों को नहीं रोका जा सकता."

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही जिला प्रशासन ने हेलीकॉप्टरों को उतरने की अनुमति नहीं दी होगी.

राज ठाकरे शरद पवार के साथ जाएंगे या राहुल के साथ?

ईवीएम हैकिंग: बीजेपी के आरोप पर सिब्बल की सफ़ाई

अमित शाह की पश्चिम बंगाल से ममता को 'चुनावी ललकार'

बीजेपी की निगाहें

पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा था कि हेलीपैड पूरी तरह तैयार नहीं होने की वजह से ही अमित शाह के हेलीकॉप्टर को पहले मालदा में उतरने की अनुमति नहीं दी गई थी.

लेकिन बाद में जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति दे दी. वे सरकार के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को निराधार बताती हैं.

ममता का सवाल है कि अगर सरकार अनुमति नहीं दे रही है तो बीजेपी के इतने नेता बंगाल में रैलियां कैसे कर रहे हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी की निगाहें बंगाल की लोकसभा सीटों पर हैं.

अमित शाह प्रदेश नेतृत्व को राज्य की 42 में कम से कम 22 सीटें जीतने का लक्ष्य दे चुके हैं. इसके लिए पार्टी की निगाहें सीमावर्ती ज़िलों पर टिकी हैं.

दूसरी ओर, ममता अबकी तमाम 42 सीटें जीत कर विपक्षी महागठबंधन के सबसे प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरने का प्रयास कर रही हैं.

सैय्यद शुजा ने क्यों नहीं किया चुनाव आयोग की चुनौती का सामना?

विपक्षी दलों का ये गठबंधन क्या कहलाता है?

बीजेपी महागठबंधन का चेहरा न होने से बेचैन है?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
पश्चिम बंगाल में अभी कैसा माहौल है? ममता बनर्जी और सीबीआई की आगे की रणनीति क्या है?

फाइनल मैच

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ पंडित कहते हैं, "केंद्र और बीजेपी के खिलाफ टकराव की राजनीति तेज कर ममता यह संदेश देना चाहती हैं कि वह अकेली ऐसी विपक्षी नेता हैं जो इन निडर होकर दोनों से दो-दो हाथ करने में सक्षम हैं. लोकसभा चुनावों के बाद उनकी यह छवि अहम साबित हो सकती है."

ममता के धरने पर पहुंचे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा भी कि दीदी की पार्टी यहां सभी 42 सीटें जीतेगी और चुनावों के बाद दीदी एक निर्णायक ताकत बन कर उभरेंगी.

विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव करीब आने के साथ ही दोनों के बीच टकराव और तेज होगा.

पंडित कहते हैं, "चुनावी नतीजे चाहे जो भी हों, इस टकराव के खत्म होने या कम होने के आसार कम ही हैं. इसकी वजह यह है कि दो साल बाद ही बंगाल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी उसे ही फाइनल मैच कहती रही हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार