किरण बेदी के घर के बाहर धरने पर बैठे पुडुचेरी के मुख्यमंत्री

  • 14 फरवरी 2019
पुडुचेरी राज निवास के बाहर में धरना इमेज कॉपीरइट Twitter/@VNarayanasami

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने उपराज्यपाल किरण बेदी के ख़िलाफ़ विरोध जताने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का तरीका अपनाते हुए धरना शुरू किया है.

नारायणसामी का कहना है कि किरण बेदी ने पुडुचेरी की चुनी हुई सरकार के कई प्रस्ताव रोके हुए हैं जिनमें मुफ़्त चावल देने की योजना भी शामिल है.

रास्ता भले ही अरविंद केजरीवाल वाला हो, नारायणसामी के धरने की शैली थोड़ी अलग है. मुख्यमंत्री नारायणसामी और उनके कैबिनेट के सहयोगियों ने धरना देने के लिए उपराज्यपाल के आधिकारिक आवास 'राज निवास' के गेट के सामने वाली सड़क चुनी है.

पुडुचेरी में चल रहे इस प्रदर्शन को लेकर ख़ास बात यह है कि पहले मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच चिट्ठियों का आदान-प्रदान हुआ था. बाद में यह नौबत आई कि सीएम समेत पूरा मंत्रिमंडल राज निवास के बाहर धरना दे रहा है.

उपराज्यपाल की चिट्ठी पर साढ़े छह बजे का समय है तो वहीं मुख्यमंत्री द्वारा भेजी चिट्ठी पर रात 10 बजे का समय लिखा है. उपराज्यपाल की चिट्ठी सीधे मुख्यमंत्री को सौंपी गई जो काली कमीज़ और काली धोती पहनकर धरना दे रहे हैं. आमतौर पर वह सफ़ेद कमीज़ और धोती पहनते हैं.

चिट्ठी में किरण बेदी ने नारायणसामी को 21 फ़रवरी को बातचीत के लिए बुलाया है जबकि मुख्यमंत्री ने लिखा है कि 'वह यहां आकर (राज निवास के गेट से बाहर) हमारे साथ बात क्यों नहीं कर सकतीं.'

सोने से पहले नारायणसामी ने पत्रकारों से कहा, "मैं नहीं कह रहा कि सभी 39 मुद्दे अभी हल हो जाएंगे. मुफ़्त चावल योजना, वेतन का मुद्दा और किसानों का भुगतान करने के लिए चीनी मिलों की नीलामी की इजाज़त जैसे मामले तो सुलझा लेने चाहिए.

किस बात को लेकर बढ़ा विवाद

रविवार से ही उपराज्यपाल सड़कों पर उतरकर अपने उस आदेश का अनुपालना करवाने लगीं जिसके तहत उन्होंने दो-पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया है. इस कारण नियम का पालन न करने वालों संख्या पिछले तीन दिनों में कई हज़ार तक पहुंच गई है.

इस मामले में मतभेद इस बात को लेकर है कि जहां मुख्यमंत्री का मानना है कि हेलमेट वाले नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए, वहीं पूर्व आईपीएस रहीं पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी चाहती हैं कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए.

उनके मुताबिक नियम का पालन न करना 'अदालत की अवमानना' है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की ओर से भी हेलमेट के संबंध में आदेश आ चुके हैं.

उपराज्यपाल ने एक वीडियो भी ट्वीट किया था जिसमें वह दोपहिया वाहन चालकों से पूछ रही थीं कि उन्होंने हेलमेट क्यों नहीं पहना.

जवाब में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने सड़कों पर हेलमेट तोड़कर विरोध जताया. इस घटना के बाद किरण बेदी ने ट्वीट करते हुए सवाल उठाया- ये क़ानून बनाने वाले हैं या क़ानून तोड़ने वाले?

पत्रों का सिलसिला

उपराज्यपाल ने पिछली शाम 6:30 बजे मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा और कहा, ''मुझे सूत्रों से पता चला है कि आप अपने 7 फ़रवरी को भेजे गए पत्र के जवाब के लिए बैठे हुए हैं, जिसमें आपने कई मुद्दे उठाए थे. आपको मेरे जवाब के लिए इस तरह इंतजार करने और गैरक़ानूनी तरीके से जवाब मांगने के बजाय राज भवन आना चाहिए था. आपके पद के किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा तरीका इस्तेमाल करने के बारे में कभी नहीं सुना.''

इमेज कॉपीरइट Facebook/CMPuducherry

राज्यपाल ने लिखा, ''आपने अपने पत्र में जिन भी मसलों को उठाया है, उन पर विचार करके जवाब देने के लिए जांच किए जाने की ज़रूरत है. यह कहना ग़ैरजरूरी है कि राज निवास में कई मामले लंबित पड़े हैं (जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है). इसके अलावा आपने पत्र में ये कभी नहीं लिखा था कि अगर 13 फ़रवरी तक जवाब नहीं दिए गए तो आप और आपके सहकर्मी धरने पर बैठ जाएंगे.''

पत्र में लिखा है, ''हालांकि, मैं आपके मसलों पर विस्तारपूर्वक चर्चा के लिए आपको 21 फ़रवरी सुबह 10 बजे आने के लिए आमंत्रित करती है. कृपया पुष्टि करें.''

इसके बाद सीएम नारायणसामी ने रात 10 बजे एक पत्र लिखा और उसमें लिखा कि जो मसले उन्होंने 7 फ़रवरी के पत्र में उठाए थे वो 'आपके लिए नए नहीं हैं'. उन्होंने लिखा है, "मैं पत्रों या फ़ाइलों के ज़रिए इन मसलों को लगातार उठाता रहा हूं. मेरे द्वारा 7.2.2019 के अपने पत्र में बताए गए आपके विभिन्न कार्यों के कारण पुडुचेरी के लोगों ने कई नुकसान और अनकही मुसीबतें उठाई हैं. आपके अलोकतांत्रिक कार्य और काम करने का तरीका लोगों को दिखाता है कि एक तानाशाह का सबसे बुरा विनाशकारी शासन क्या हो सकता है? निरंकुश रवैया यानी 'मैं ही सरकार हूँ, मैं सब कुछ जानती हूँ और मैं ही सब कुछ हूं.''

नारायणसामी ने कहा, ''मैं दोहराता हूं कि 7.2.2019 को लिखे पत्र में लिखी गई मेरी सभी मांगों को आपको तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है. जब तक उन सभी मसलों का हल नहीं निकल जाता, तब तक मैं शांत नहीं बैठूंगा.''

उन्होंने लिखा, ''तब तक हमारे शांतिपूर्ण लोग अपना विरोध जारी रखेंगे और किसी भी तरह की तानाशाही धमकी से नहीं डरेंगे. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि पुडुचेरी के लोगों की भावनाओं से और न खेलें. सत्यमेव जयते.''

सरकार और उपराज्यपाल के बीच टकराव के कारण

नारायणसामी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने राज्यपाल द्वारा बुलाई गई बैठक में जाने से इनकार कर ​दिया है क्योंकि 'उनका तानाशाही रवैया लोगों को प्रभावित कर रहा है.' उन्होंने कहा, "कई पत्र भेजे और राज्यपाल के साथ कई बैठकें कीं और उनसे मुख्य सविच और अन्य सचिवों के जरिए बातचीत करने की भी कोशिश की. मगर यह समस्या 2016 से ही बनी हुई है. उनके कार्यों ने सरकार को ठहराव की स्थिति में ला दिया है. यहां त​क कि कई कार्यों के लिए सरकार द्वारा दिए गए फ़ंड के इस्तेमाल में भी देरी हो रही है जिसमें बाढ़ से बचने के लिए दीवार निर्माण के लिए दिए गए 136 करोड़ रुपये भी शामिल हैं."

इस तरह की जिस पहली योजना को रोकने का आरोप सरकार की ओर से लगाया गया था, वो थी मुफ्त में चावल देने की योजना. आरोप था कि राज्य सरकार इसे लागू करना चाहती थी लेकिन किरन बेदी के उपराज्यपाल बनने के बाद इसे रोक दिया गया.

उपराज्यपाल चावल देने के बजाय लाभान्वित होने वाले परिवारों को सीधा पैसा देना चाहती थीं. लेकिन राज्य सरकार का कहना था कि महिलाएं पैसा नहीं चाहतीं क्योंकि उनके पति इसे दूसरे कामों में इस्तेमाल कर लेते हैं.

इमेज कॉपीरइट Facebook/thekiranbedi

राज्य सरकार ने कई सरकारी स्कूलों में सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों को अनुबंध पर नियुक्त किया था. इसे राज्यपाल ने खारिज कर दिया. सरकार का कहना था कि शिक्षकों को अनुबंध पर इसलिए रखा गया क्योंकि नियमित आधार पर नियुक्त शिक्षकों के वेतन के लिए फ़ंड को कथित तौर पर उपराज्यपाल से मंजूरी नहीं मिली थी.

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी उपक्रमों और अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए उपराज्यपाल द्वारा धन की मंजूरी रोक दी गई थी. हालांकि, फिर उनके लिए बजट में धनराशि निर्धारित की गई थी.

पहचान छुपाने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, ''पूरे प्रशासन पर उपराज्यपाल ने नियंत्रण कर लिया है. कैबिनट जो भी फ़ैसला लेती है, उसे उपराज्यपाल मूंजरी नहीं ​देतीं. आप कह सकते हैं कि सरकार एक कठपुतली बनकर रह गई है.''

4 जनवरी को मुख्यमंत्री ने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उपराज्यपाल को पद से हटाने की मांग करते हुए दिल्ली में एक धरना भी किया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार