बिहार: सनी लियोनी ने इंजीनियरिंग परीक्षा में किया टॉप, क्या है सच?

  • 22 फरवरी 2019
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बिहार में नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया की एक बार फिर से धज्जियां उड़ गई हैं. और इस बार वजह बनी है पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य एवं अभियंत्रण) विभाग में जूनियर इंजीनियर पद के लिए होने वाली बहाली.

संविदा के आधार पर होने वाली इस नियुक्ति के लिए 13 फरवरी को विभाग की वेबसाइट पर अभ्यर्थियों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर मेरिट लिस्ट का ड्राफ्ट अपलोड कर दिया गया.

ड्राफ्ट में सबसे ऊपर नाम है सनी लियोनी का. एप्लिकेशन आईडी JEC/0031211 है. पिता के नाम की जगह लियोना लियोनी नाम दर्ज है. एप्लिकेशन के अनुसार शैक्षणिक और कार्य अनुभव की जानकारी के आधार पर उन्हें कुल 98.5 प्वाइंट्स मिले हैं.

इस सूची में दूसरा नाम है निर्मल चक्रवर्ती, जिनके पिता का नाम ओम पुरी लिखा हुआ है. तीसरे नंबर पर नाम वाले शख्स का नाम'bvcxzbnnb' लिखा गया है.

सूचना के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर तुरंत इससे जुड़ी खबरें वायरल हो गई. विपक्ष ने भी इस पर सरकार को घेरा और कईयों ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रणाली का मजाक बनाया.

और इसका कारण भी स्पष्ट है. बिहार में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. पहले भी बिहार में रूबी राय और गणेश छात्र इंटरमीडिएट टॉपर निकल चुके हैं. पेपर-लीक और परीक्षाओं में धांधली की खबरें यहां आए दिन आती रही हैं.

हालांकि, इस बार मसला शिक्षा विभाग से जुड़ा नहीं है मगर इसने बिहार में होने वाले नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.

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विभाग का गड़बड़ी से इनकार

पीएचईडी विभाग इससे इनकार किया है वेबसाइट पर जो लिस्ट प्रकाशित हुई है वो फ़ाइनल लिस्ट थी.

पीएचईडी विभाग के मंत्री विनोद नारायण झा ने बीबीसी से कहा, "यह फ़ाइनल मेरिट लिस्ट नहीं थी. विभाग की ओर से जूनियर इंजीनियर के पद पर कॉन्ट्रैक्ट की बहाली के लिए आवेदन मांगे गए थे. हमें कुल सात हजार आवेदन मिले थे. आवेदनों में दी गई जानकारी के आधार पर ड्राफ्ट लिस्ट अपलोड की गई थी."

"यदि किसी को किसी नाम पर दावा/आपत्ति हो तो वह क्लेम कर सकता है. इसके लिए सात दिन का वक्त दिया गया था. इसके बाद ही हम शॉर्टलिस्ट करके फ़ाइनल मेरिट लिस्ट तैयार करते है."

मंत्री विनोद नारायण झा कहते हैं, "किसी ने शरारत में ऐसा किया है. लेकिन जिसने भी किया है उसको बख्शा नहीं जाएगा. आप सिस्टम का मजाक नहीं उड़ा सकते."

"हमने इस मामले में एफआईआर करने के लिए निर्देश दिया है. साइबर सेल इसमें आईटी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज करेगा. जांच होगी और ऐसी ओछी हरकत करने वाले के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी."

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वेबसाइट पर मेरिट लिस्ट 15 फरवरी को अपलोड की गई थी. इसके बाद 16 फरवरी को इस लिस्ट के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने के लिए सूचना अपलोड की गई. इस नोटिस में 13 फरवरी को हस्ताक्षर किए गए हैं.

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सनी लियोनी का नाम कैसे आया?

अगर पीएचईडी विभाग की मेरिट लिस्ट में सनी लियोनी का नाम नहीं होता तो जूनियर इंजीनियर की बहाली की कभी इतनी बड़ी खबर नहीं बनती.

तीसरे नंबर के नाम का उल्लेख करते हुए विभाग के मंत्री कहते हैं, "इसके देखने से स्पष्ट हो जाता है कि यह किसी की जानबूझ कर की गई हरकत है. इसमें विभाग की गलती नहीं है. हमनें सिर्फ आवेदन मांगे थे. अभी तो उन आवेदनों की जांच भी नहीं की गई थी. इसलिए लिस्ट में ऐसे नाम भी रह गए हैं."

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लेकिन मंत्री का बस ये कह देना कि "इसमें हमारी गलती नहीं है" काफी नहीं है. क्योंकि सवाल ये है कि आख़िर उस लिस्ट में सनी लियोनी का नाम कैसे आया?

इसको समझने से पहले हमें ये समझ लेना चाहिए कि पीएचईडी विभाग के जूनियर इंजीनियर पद के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं हुई थी.

विभाग ने जूनियर इंजीनियर पदों पर कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर अस्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु की है. इसके लिए 11 जनवरी को विभाग के अभियंता प्रमुख सतीश चंद्र मिश्र की ओर से विज्ञापन जारी किया गया था.

विज्ञापन में चयन की प्रक्रिया का ज़िक्र कुछ इस तरह है, ''मेधा सूची में कुल 100 अंकों में से 75 अंक शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हैं. शैक्षणिक योग्यता में बिहार लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, अवर अभियंत्रण (असैनिक, यांत्रिक) संवर्ग भर्ती नियमावली के अनुरूप असैनिक डिप्लोमा की योग्यता को शर्त रखा गया है.''

साथ ही ये भी लिखा है कि अंकों की गिनती डिप्लोमा में मिले अंकों के प्रतिशत के आधार पर की जाएगी.

मेधा सूची में बाकी के 25 अंक कार्य अनुभव के आधार पर मिलेंगे. कम से कम एक साल के अनुभव के लिए पांच अंक दिए जाएंगे. और अधिक से अधिक 25 अंक. जिसके पास पांच सालों का अनुभव होगा उसे 25 अंक मिलने तय हैं.

विभाग के संयुक्त सचिव अशोक कुमार कहते हैं, "प्राप्त आवेदनों के आधार पर पहले से निर्धारित सॉफ्टवेयर के अनुसार जो लिस्ट बनी उसी को 11 फरवरी को अपलोड कर दिया गया. साथ ही बिहार सरकार में नियम में ये समय सीमा भी रखी गई कि 24 फरवरी के पहले तक सुधार के लिए क्लेम करना होगा."

उनका कहना था, "सब कुछ ऑटोमैटिक था. जिसने अपने आवेदन में जैसी जानकारी भरी थी, उसके आधार पर लिस्ट बन गई. इसमें विभाग की ओर से कुछ भी नहीं किया गया है."

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अब सवाल ये है कि आख़िर यह हरकत किसनेकी?

अशोक कुमार कहते हैं, "ये तो जांच में पता चल पाएगा क्योंकि ऑनलाइन आवेदन के लिए जो ज़रूरी जानकारियां मांगी गईं, उस कैंडिडेट ने वो जानकारियां ही दी होंगी. जैसे मोबाइल नंबर या इमेल आईडी, वगैरह. साइबर सेल इसका पता लगा लेगी."

वो कहते हैं कि हमें जो आवेदन मिला उसमें सनी लियोनी का नाम था. फॉर्म में तस्वीर भी अभिनेत्री सनी लियोनी की ही लगाई गई थी. जन्मतिथि 13 मई 1991 दर्ज है. इमेल आईडी की जगह Alixxxx@gmail.com लिखा हुआ है. साथ ही मोबाइल नंबर भी दिया गया.

हमने इस नंबर पर फोन कर जानना चाहा कि ये नंबर किसका है. तीन-चार बार घंटी जाने के बाद फ़ोन एक पुरुष ने उठाया. हमारे सवालों का जवाब मिला, "अलिसा एस्कॉर्ट सर्विस से."

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हमने पूछा कि आप कहां से बोल रहे हैं. इसका हमें कोई जवाब नहीं मिला. थोड़ी देर में आवाज नहीं सुनाई पड़ने की बात कहकर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया गया.

ट्रू कॉलर पर ये नंबर 'अलीसा मेल एसकॉर्ट्स' के नाम से दिखता है. गूगल करने पर मालूम चलता है कि ये अहमदाबाद से चल रही एक कंपनी का नंबर है. हालांकि, अब इस मामले की जांच साइबर सेल के हवाले है.

विभाग का कहना है कि जिसने ये हरकत की है उसको पकड़ा जाएगा.

लेकिन एक बार फिर से बिहार की व्यवस्था का मजाक बन गया है. बार-बार ऐसा हो क्यों रहा है?

वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर बताते हैं, "ये केवल सिस्टम का मजाक उड़ाना नहीं है, ये यह भी दिखाता है कि सिस्टम ही मज़ाक बन कर रह गया है."

"देखिएगा, ऐसा नहीं होगा कि इस तरह की घटना होने के बाद अब कुछ हो जाएगा या कुछ बदल जाएगा. सरकार और ऐसी बातों को ले कर सिस्टम गंभीर नहीं है, भ्रष्टाचार का स्तर इतना बढ़ गया है कि अभी ऐसी चीजें और सामने आएंगी."

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