पुलवामा हमले के बाद गुरमेहर कौर के 'पाकिस्तान जाने' की हक़ीक़त

  • 23 फरवरी 2019
गुरमेहर

छात्र कार्यकर्ता और लेखिका गुरमेहर कौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि 'वो पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान गईं, सिर्फ़ ये कहने के लिए कि ऐसे हमलों से अल्पसंख्यकों की तकलीफ़ें बढ़ी हैं'.

फ़ेसबुक के क्लोज़ ग्रुप्स में, ट्विटर पर और व्हॉट्सऐप पर जिन लोगों ने ये 19 सेकेंड का वीडियो शेयर किया है, उन्होंने सवाल उठाया है कि गुरमेहर कौर को पाकिस्तान जाने के लिए फंड किसने दिया?

इस मामले में कांग्रेस को निशाना बनाने के लिए कुछ लोगों ने गुरमेहर कौर की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ मार्च 2018 में खींची गई एक तस्वीर भी शेयर की है और लिखा है कि 'क्या प्रियंका गांधी ने गुरमेहर की पाकिस्तान जाने में मदद की?'

इमेज कॉपीरइट Twitter/@mehartweets

बहरहाल, ये सभी दावे झूठे हैं और जो अनुमान लगाए जा रहे हैं, उनकी बुनियाद ग़लत है क्योंकि गुरमेहर कौर का ये वीडियो पाकिस्तान नहीं, बल्कि लंदन (ब्रिटेन) का है.

ये संभव है कि इसे शेयर करने वाले लोगों को वीडियो का सोर्स 'बीबीसी उर्दू' देखकर लगा हो कि वीडियो पाकिस्तान का है, लेकिन ऐसा नहीं है.

लंदन का वीडियो

वायरल हो रहा वीडियो लंदन स्थित बीबीसी उर्दू के स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया था. गुरमेहर कौर पुलवामा हमले के बाद, 15 फ़रवरी को बीबीसी उर्दू सेवा के टीवी शो सैरबीन में बतौर मेहमान पहुँची थीं.

गुरमेहर कौर 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए भारतीय मेजर मनदीप सिंह की बेटी हैं और खुले तौर पर दोनों देशों के बीच युद्ध की मुख़ालफ़त करती रही हैं.

टीवी शो सैरबीन में एंकर शफ़ी नक़ी जामी ने इसी हवाले से गुरमेहर से सवाल किया था कि "आपने कम उम्र में अपने पिता को खो दिया, आप वो दर्द समझ सकती हैं, पुलवामा हमले को आप कैसे देखती हैं?"

इसके जवाब में गुरमेहर ने कहा था, "लंदन पहुँचकर जब मैंने फ़ोन देखा तो पुलवामा हमले के बारे में पता चला. सबसे पहले मेरे मन में शहीदों के परिवारवालों का ख्याल आया. उन्हें मैं सलाम करना चाहूँगी. भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कायम करने की चर्चा के बीच ऐसे हमले दिल तोड़ देते हैं और एक उम्मीद हमसे छिन जाती है."

इसके बाद उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति के लिए डटे रहना बहुत ज़रूरी है.

'नफ़रत और गुस्से के बीच'

शो में गुरमेहर से पूछा गया था कि आम चुनाव से ठीक पहले हुए पुलवामा हमले का देश की सियासत पर कोई फ़र्क पड़ेगा?

इसपर गुरमेहर का जवाब था: "ये दिख ही रहा है कैसे राजनेता इस हादसे का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसी घटनाओं से समाज में ग़ुस्सा और नफ़रत बढ़ती है. इस्लाम और पाकिस्तान को एक समझा जाने लगता है. इससे अल्पसंख्यकों की तकलीफ़ें बढ़ती हैं. नेता इस विभाजन का फ़ायदा लेते हैं."

बातचीत के अंत में गुरमेहर कौर ने कहा था, "शहीदों के बच्चों और उनके परिवार को न्याय तभी मिल सकता है जब हिंसा समाप्त होगी".

'स्मॉल एक्ट्स ऑफ़ फ़्रीडम' नाम की क़िताब लिख चुकीं गुरमेहर कौर यूके की चेरिटेबल संस्था 'पोस्टकार्ड्स फ़ॉर पीस' की एंबेसडर भी हैं.

इमेज कॉपीरइट SM Viral Post

फ़ेक न्यूज़

साल 2017 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज विवाद के बाद गुरमेहर कौर चर्चा में आई थीं.

उन्होंने कॉलेज में लेफ़्ट और राइट विचारधारा वाले स्टूडेंट के बीच हुई झड़प के बाद अपनी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल पिक्चर बदल दी थी जिसपर लिखा था कि वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोगों से नहीं डरतीं.

लेकिन ज़्यादा बवाल उस तस्वीर पर खड़ा हुए जिसमें वो एक प्लेकार्ड लिए खड़ी थीं और उस पर अंग्रेज़ी में लिखा था, ''पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने उनकी जान ली.'' इस तस्वीर के लिए गुरमेहर कौर को सोशल मीडिया पर बहुत ट्रोल किया गया था.

पिछले हफ़्ते पुलवामा हमले में भारत के 40 से ज़्यादा जवान मारे गए थे जिसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए कई कड़े फ़ैसले लिए हैं.

इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के आक्रोश के बीच फ़र्ज़ी ख़बरें बहुत तेज़ी से शेयर की गई हैं.

इसी क्रम में गुरमेहर कौर का वीडियो ग़लत संदर्भ के साथ शेयर किया जा रहा है. इसे @DrGPradhan नाम के ट्विटर यूज़र ने भी शेयर किया है जिसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़ॉलो करते हैं.

इमेज कॉपीरइट Twitter
Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़ॉलो करते हैं @DrGPradhan नाम के ट्विटर यूज़र को

उनके द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो को क़रीब 30 हज़ार बार देखा जा चुका है. गुरमेहर कौर इस ट्विटर यूज़र को बता चुकी हैं कि वो फ़ेक न्यूज़ फैला रहे हैं.

इसके बावजूद रिपोर्ट लिखे जाने तक उन्होंने वीडियो को हटाया नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार