केंद्रीय मंत्री ने इस 'फ़र्ज़ी वीडियो' को बताया 'बालाकोट का सबूत'

  • 15 मार्च 2019
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Image caption वायरल वीडियो के 20वें सेकेंड में पाकिस्तान आर्मी के फ़ैसल कुरैशी इसी बच्चे के साथ बातचीत करते हुए दिखाई देते हैं

भारत के कई बड़े न्यूज़ चैनलों ने बुधवार को पाकिस्तान का एक वीडियो इस दावे के साथ दिखाया कि पाकिस्तान आर्मी के एक बड़े अफ़सर ने बालाकोट हमले में 200 लोगों के मारे जाने की बात स्वीकार की है.

टीवी चैनलों पर आने से पहले ये वीडियो हमें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होता हुआ मिला था. फ़ेसबुक के कुछ क्लोज़ ग्रुप्स में इस वीडियो को 'भारतीय वायु सेना के बालाकोट हमले के सबूत' के तौर पर शेयर किया गया है.

केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है, "हिंदुस्तान की सेना के शौर्य पर पाकिस्तान रो रहा है. जिसका वीडियो वायरल हो रहा है और देश के गद्दार हमारी सेना को अपमानित कर रहे हैं और सबूत मांग रहे हैं."

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Image caption गिरिराज सिंह का ट्वीट

कुछ यू-ट्यूब चैनलों के अलावा 'मोदीनामा' और 'अच्छे दिन' जैसे कई फ़ेसबुक पन्ने हैं जहाँ इस वीडियो को शेयर किया गया है और लाखों बार इस वीडियो को देखा जा चुका है.

टीवी चैनलों पर दिखाये जाने के बाद ये वीडियो तेज़ी से फैला है और इसे व्हॉट्सऐप पर भी 'बालाकोट के सबूत' के तौर पर शेयर किया जा रहा है. बीबीसी को अपने कई पाठकों से यह वीडियो मिला है और उन्होंने इसकी सत्यता जाननी चाही है.

वीडियो की पड़ताल में हमने पाया है कि इसमें दिख रहे पाकिस्तानी आर्मी अफ़सर ने कहीं भी बालाकोट हमले में 200 लोगों के मरने की बात स्वीकार नहीं की है.

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Image caption पीड़ित परिवार के साथ खड़े पाकिस्तान फ़ौज के फ़ैसल कुरैशी.

200 नहीं, सिर्फ़ एक शख़्स की मौत!

पाकिस्तान में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई से जब हमने इस वीडियो के बारे में बात की तो उन्होंने वीडियो से जुड़ीं दो चीज़ें बताईं.

पहली ये कि वीडियो में जो लोग आर्मी अफ़सर से बात कर रहे हैं, ख़ासतौर पर पाकिस्तानी अफ़सर के बगल में खाट पर बैठे बुजुर्ग, वो पश्तो बोल रहे हैं और खैबर पख़्तूनख्वा के मानसेरा-बालाकोट इलाक़े में हिंदको भाषा बोली जाती है.

दूसरी बात ये कि जो पाकिस्तानी अफ़सर लोगों से बात कर रहे हैं, उन्हें सुनकर लगता है कि वो 200 लोगों के मरने की नहीं, बल्कि 200 लोगों में से किसी एक शख़्स के मरने की बात कर रहे हैं.

वायरल वीडियो के पहले 17 सेकेंड में वो कहते हैं, "...इसीलिए हम आये हैं कि हम सब का ईमान है कि जो हुकूमत के साथ खड़े होकर लड़ाई करता है, वो जिहाद है."

इसके बाद आर्मी अफ़सर तीन बच्चों से मुलाक़ात करते हैं और 49वें सेकेंड से उन्हीं की आवाज़ फिर सुनाई देती है:

"ये रुतबा कुछ ही लोगों को नसीब होता है. ये हरेक बंदे को नसीब नहीं होता. आपको पता है कि कल दो सौ बंदा ऊपर (पहाड़ पर) गया था. इसके नसीब में लिखी हुई थी शहादत. हमारे नसीब में नहीं लिखी हुई थी. हम रोज़ाना चढ़ते हैं. जाते हैं, आते हैं. लेकिन शहादत उन्हीं को नसीब होती है जिनपर अल्लाह की ख़ास नज़र होती है."

49वें सेकेंड के बाद जो आवाज़ सुनाई देती है वो सुनने में तो उन्हीं आर्मी अफ़सर की लगती है, लेकिन इस दौरान उनके हाव-भाव और आवाज़ मेल नहीं खाते. ऐसा लगता है कि उनकी आवाज़ का ये हिस्सा एडिटिंग की मदद से वीडियो में जोड़ा गया है.

बहरहाल, वायरल वीडियो में उन्हें सुनकर कहीं से भी ये अर्थ नहीं निकलता कि '200 लोगों की मौत हुई है'.

लेकिन भारत में इस वीडियो को यह कहते हुए शेयर किया जा रहा है कि पाकिस्तानी अफ़सर ने 200 लोगों के मरने की बात स्वीकार की.

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Image caption गाँव वालों से मुलाक़ात के दौरान फ़रमानुल्लाह ख़ान से हाथ मिलाते पाकिस्तान आर्मी के आला अफ़सर हलीम

वीडियो बालाकोट का नहीं

इस वायरल वीडियो को फ़्रेम बाई फ़्रेम सर्च करने पर जो सबसे पुरानी फ़ेसबुक पोस्ट मिलती है वो 1 मार्च 2019 की है.

उर्दू में लिखी इस फ़ेसबुक पोस्ट के अनुसार ये कथित तौर पर एहसानुल्लाह नाम के किसी पाकिस्तानी सैनिक के जनाज़े का वीडियो है जिसका गाँव पश्चिमी खैबर पख़्तूनख्वा में स्थित है.

बीबीसी ने पाकिस्तान की फ़ौज के प्रवक्ताओं से भी इस वीडियो के बारे में बात की.

उनके मुताबिक़ ये वीडियो कुछ दिन पुराना है और पश्चिमी खैबर पख़्तूनख्वा में स्थित लोअर दीर (Lower Dir) इलाक़े का है जो बालाकोट से पश्चिम में क़रीब 300 किलोमीटर दूर है.

हमने इस घटना से जुड़ी एक अन्य वीडियो भी देखी और फ़ेसबुक के ज़रिए उसमें दिखने वाले जावेद इक़बाल शाहीन और फ़रमानुल्लाह ख़ान की पहचान की. ये दोनों शख़्स फ़ौजी अफ़सरों के दौरे के समय पीड़ित परिवार के साथ थे.

ख़ुद को पाकिस्तान के दीर का बाशिंदा बताने वाले इन दोनों लोगों ने 2 मार्च को इस घटना की कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं. इनमें से एक तस्वीर के साथ फ़रमानुल्लाह ख़ान ने लिखा था, "पाकिस्तानी फ़ौज के आला अफ़सर हलीम और लेफ़्टिनेंट कर्नल फ़ैसल कुरैशी से मुलाक़ात हुई".

दोनों अफ़सरों की वर्दी पर जड़े सितारों के अनुसार हलीम पाकिस्तान आर्मी में कर्नल हो सकते हैं और फ़ैसल कुरैशी लेफ़्टिनेंट कर्नल. लेकिन पाकिस्तानी आर्मी के प्रवक्ता ने अपने अफ़सरों की पहचान बीबीसी से ज़ाहिर नहीं की.

भारत में इस घटना का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें लेफ़्टिनेंट कर्नल फ़ैसल कुरैशी की ही आवाज़ सुनाई देती है.

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वीडियो पर पाकिस्तान में भी भ्रम

भारत में ये वीडियो वायरल होने के बाद कुछ पाकिस्तानी मीडिया वेबसाइट्स ने भी इस वीडियो को फ़ेक बताया है और लिखा है कि 'बालाकोट हमले में कथित तौर पर हुई लोगों की मौत के दावे को सही साबित करने के लिए भारतीय मीडिया ने फिर फ़र्ज़ी वीडियो दिखाए'.

लेकिन इन वेबसाइट्स ने इस वीडियो के बारे में जो सूचना दी है वो भी तथ्यात्मक रूप से ग़लत है.

'डेली पाकिस्तान डॉट कॉम' ने लिखा है कि ये वीडियो एलओसी पर भारत और पाकिस्तान के बीच हुई फ़ायरिंग में नायक ख़ुर्रम के साथ मारे गए हवलदार अब्दुल राब के अंतिम संस्कार से पहले का है.

लेकिन पाकिस्तान के सरकारी 'रेडियो पाकिस्तान' की आधिकारिक पोस्ट के अनुसार ये दोनों ही सिपाही पाकिस्तान के पंजाब में स्थित डेरा गाज़ी ख़ान से वास्ता रखते थे.

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