लोकसभा चुनाव 2019: मोदी राज में घर-घर बिजली पहुंच गई है?- बीबीसी रियलिटी चेक

  • 15 मार्च 2019
क्या गांव-गांव में पहुंची बिजली? इमेज कॉपीरइट AFP

देश में 11 अप्रैल से शुरु हो रहे आम चुनावों के बीच बीबीसी की रियलटी चेक टीम अहम राजनीतिक दलों के दावों की पड़ताल कर रही है.

बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर-शोर से एक बड़े लैंडमार्क को हासिल करने का दावा किया था . केंद्र सरकार ने कहा था कि वो देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा कर चुकी है.

पीएम मोदी ने एक ट्वीट के जरिए जानकारी दी थी, "कल हमने वो वादा पूरा किया, जिससे कई देशवासियों की जिंदगी हमेशा हमेशा के लिए बदल जायेगी"

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गांव-गांव, घर-घर बिजली पुहंचाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में शामिल था.

पीएम मोदी के इस दावे की हकीकत क्या है, आइये जानते हैं:

सबसे पहले गांव की बात

सरकारी पैमाने के मुताबिक उन गांवों को "इलेक्ट्रिफ़ाइड" माना जाता है, जहां 10 फ़ीसदी घरों में बिजली पहुंच चुकी है और जहां सार्वजनिक स्थानों मसलन अस्पताल और स्कूलों को रोशन किया जा चुका है.

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में करीब छह लाख गांव हैं. सरकारी पैमानें के मुताबिक इन सभी गांवों का विद्युतीकरण किया जा चुका है.

हालांकि हकीक़त ये भी है कि इसमें से बहुत सारा काम पिछली सरकारों के कार्यकाल में किया गया.

साल 2014 में जब मोदी सत्ता में आए, तब तक ज़्यादातर गांवों तक बिजली पहुंच चुकी थी. केवल 18 हज़ार गांवों का विद्युतीकरण किया जाना बाकी था.

भारत की इस उपलब्धि की प्रशंसा विश्व बैंक ने भी की थी. वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक करीब 85 फ़ीसदी आबादी तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है जो केंद्र सरकार के 82 फ़ीसदी अनुमान से कहीं ज्यादा है.

बिजली की सुविधा वाले गांवों की संख्या

स्रोतः सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी

साल 2017 के विश्व बैंक की बिजली उपलब्धता रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में भाजपा की सरकार बनने से पहले क़रीब 27 करोड़ आबादी तक बिजली नहीं पहुंची थी.

जो दुनिया भर में बगैर बिजली के रहने वालों की कुल संख्या का एक तिहाई है.

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Image caption गांवों में बिजली की सप्लाई

क्या है दावों का सच?

मोदी ने सितंबर 2017 में एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट लॉन्च किया था, जिसका मक़सद दिसंबर 2018 तक देश के हर घर तक बिजली पहुंचाना था.

प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करीब चार करोड़ लोगों तक बिजली पहुंचाना था.

मार्च में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर में 19,753 परिवारों को छोड़कर लगभग सभी घरों में बिजली पहुंचाई जा चुकी थी.

मौजूदा सरकार का दावा है कि वो अपनी पिछली सरकारों की तुलना में ज्यादा तेजी सी गांवो का विद्युतीकरण कर रही है.

हालांकि विद्युतीकरण प्राधिकरण के आंकड़े कुछ और तस्वीर पेश करते हैं.

इन आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली यूपीए सरकार ने औसतन सालाना 9,000 गांवों तक बिजली पहुंचाई, जो मोदी सरकार के गांवो के विद्युतीकरण के सालाना औसत, यानी 4,000 गांवों से कहीं ज्यादा है.

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सप्लाई की समस्या

इसमें कोई शक नहीं कि मौजूदा और पिछली सरकारों ने विद्युतीकरण के मामले में अच्छी-खासी प्रगति हासिल की है. हांलाकि ग्रामीण इलाकों में बिजली की नियमित सप्लाई अभी भी नहीं हो पा रही है.

संसद में पूछे गये सवाल के जवाब में हाल ही बताया गया था कि 29 में से केवल छह राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली की सप्लाई कर पा रहे हैं.

अभी भी देश के आधे से कम ही गांवों में 12 घंटे से ज़्यादा बिजली की सप्लाई की जा रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ देश के एक तिहाई गांव में आठ से 12 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है.

उत्तर पूर्व के राज्यों में हालात सबसे ज्यादा खराब है.

जिन राज्यों में ग्रामीण क्षत्रों में केवल एक से चार घंटे बिजली दी जा रही है, उनमें झारखंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं.

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