#BoleBihar मुझे नरेंद्र मोदी से कोई दिक्कत नहीं है: कन्हैया कुमार

  • 16 मार्च 2019
कन्हैंया कुमार

बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को बीबीसी हिन्दी सेवा के 'बोले बिहार' कार्यक्रम में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने बिहार और लोकसभा चुनाव से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा की. बीबीसी का यह मंच परिचर्चा में शामिल होने वाले नेताओं और विषय के लिहाज़ से काफ़ी विविध रहा.

जनता दल यूनाइटेड, कांग्रेस, राजद, भाजपा के नेताओं और युवा नेता कन्हैया कुमार से तीखे सवाल पूछे गए.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि अगर वो आज लोकप्रिय हैं तो वो सीपीआई की लोकप्रियता है. बेगूसराय से लोकसभा का टिकट मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा, "मेरी उम्मीदवारी को लेकर राज्य इकाई ने सहमति प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया है. अभी तक नाम नहीं आया है. मैं पार्टी का कैडर हूं और पार्टी जो कहेगी, करूँगा."

कन्हैया कुमार ने ये भी दावा किया कि वो चुनाव लड़ें या नहीं लेकिन बीजेपी विरोधी वोट को बंटने नहीं देंगे.

उन्होंने कहा, "हम चुनाव लड़ें या नहीं. हमारी पार्टी लड़े या न लड़े लेकिन देश के पक्ष में भाजपा विरोधी जो वोट है, उसमें एक परसेंट भी बंटवारा हम नहीं करने जा रहे हैं."

बीबीसी की भारतीय भाषाओं की प्रमुख रूपा झा के इस सवाल पर कि आपकी सोशल मीडिया टाइमलाइन मोदी विरोध से भरी पड़ी रहती है आख़िर नरेंद्र मोदी से आपको क्या दिक्कत है?

कन्हैया कुमार ने कहा, "मुझे नरेंद्र मोदी से कोई दिक्कत नहीं है. जिस पद पर मोदी बैठे हुए हैं, उस पद की गरिमा का ख़याल है मुझे. मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं है. मेरी लड़ाई संविधान के मूल्यों को स्थापित करने को लेकर है."

एक दर्शक के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा वो नरेंद्र मोदी से सिर्फ़ इसलिए सवाल करते हैं क्योंकि वो आज देश के प्रधानमंत्री हैं, पहले प्रधानमंत्री से सवाल तो नहीं करेंगे. ऐसे में फिर मोदी जी का विरोध करना देश विरोध कैसे हो गया.

भाकपा के चुनावी राजनीति में नगण्य होने की क्या वजह है? इस सवाल के जवाब में कन्हैया ने कहा, "कोई पार्टी अपनी विचारधारा की बदौलत ही ज़िंदा रहती है. अगर हमारी विचारधारा न्यायपूर्ण है और शोषित जनता के लिए आवाज़ उठाने वाली है तो उस विचारधारा को कोई मार नहीं सकता है."

उन्होंने कहा कि ये कहना गलत है कि कम्युनिस्ट पार्टी की विफलता को जातीय राजनीति से जोड़कर देखा जाता है. कन्हैया ने कहा, "कम्युनिस्ट पार्टी अगर किसी चीज़ में विफल हुई है तो वो समाज और आंदोलन को समझने में विफल हुई है. समाज जिस तरीके से बदला है, उस तरीके से आंदोलन का रंग रूप बदलना चाहिए था."

ये पूछे जाने पर कि अगर महागठबंधन आपको बेगूसराय से उम्मीदवार बनाने पर समर्थन नहीं देती है, कन्हैया ने सवाल को टाल दिया. कन्हैया ने कहा, "हम समझते हैं कि 2019 का चुनाव सच और झूठ के बीच में है. हक और लूट की लड़ाई के बीच है. हमें सीट मिले न मिले, हम भाजपा को जिताने में कोई मदद करने वाले नहीं हैं. रहा सवाल टिकट मिलने न मिलने का तो ये मेरे लिए कोई करियर तो है नहीं, किसी कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर देंगे."

एक दर्शक के ये पूछने पर कि आप मोदी के ख़िलाफ़ क्यों नहीं लड़ते, कन्हैया इस सवाल से भी बचते नज़र आए. उन्होंने कहा, "मैं ये कहना चाहता हूँ कि कभी किसी पर अंधा उम्मीद मत कीजिएगा. ये करिश्माई रणनीति ख़तरनाक है. जब तक हम नेताओं से सवाल नहीं करेंगे, जब तक उन पर शक नहीं करेंगे. तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो पाएगा."

कन्हैया से ये पूछे जाने पर कि राजद नेता तेजस्वी के बारे में उनकी क्या राय है? कन्हैया ने कहा, "तेजस्वी के बारे में मेरी राय स्पष्ट है. युवाओं के हाथों में प्रतिनिधित्व जाना चाहिए. तेजस्वी के हाथों में नेतृत्व आया है और वो राजनीति में भी परिपक्व हो रहे हैं."

क्या जाति के कारण आपको लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिली? कन्हैया ने कहा, "ये सवाल मीडिया ने खड़ा किया है. अगर मुझे अपनी जाति का फ़ायदा उठाना होता तो मैं लाल सलाम के साथ जय भीम का नारा नहीं लगाता."

बिहार का पीएम होना ज़रूरी

परिचर्चा में राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने कहा, "बिहार लंबे समय से पिछड़ा हुआ राज्य है, उसकी लगातार उपेक्षा हो रही है. मुझे लगता है कि जब तक बिहार से पीएम नहीं होगा तब तक इस राज्य की हालत नहीं बदलेगी".

जब सिद्दीक़ी से पूछा गया कि युवाओं को राजनीति में मौक़ा क्यों नहीं मिल रहा है, तो सिद्दीक़ी ने कहा, "जो युवा अनुभव के साथ नहीं आते वे बोझ बन जाते हैं".

इसके बाद जब उनसे पूछा गया क्या तेजस्वी बोझ हैं? इसके जवाब में अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने कहा, "मैं कहूँगा कि तेजस्वी को सत्ता विरासत में मिली थी".

कार्यकम के पहले वक़्ता बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि बीबीसी और बिहार का ख़ास संबंध रहा है. चौधरी ने कहा कि बीबीसी ने बिहारवासियों को जागरूक बनाने में अहम भूमिका अदा की है. विजय चौधरी ने बीबीसी रेडियो के प्रसारण में तकनीकी ख़ामियों को भी उठाया.

कार्यक्रम के पहले सत्र की शुरुआत में लोकसभा चुनाव में बिहार की क्या भूमिका होगी पर चर्चा हुई. इस परिचर्चा में राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश सिंह और जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने अपनी बातें रखीं.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि 2014 के आम चुनाव में भी बिहार की अहम भूमिका थी और इस बार भी अहम भूमिका होगी. शिवानंद तिवारी ने केंद्र के मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाती. ऐसा लगता है कि सरकार का विश्वास लोकतंत्र और संविधान में नहीं है. सरकार एक तबके को टार्गेट कर रही है, पाकिस्तान भेज रही है. इससे समाज में तनाव पैदा हो रहा है. इस सरकार को हटाया जाना चाहिए."

कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह ने कहा कि बिहार बदहाली के दौर से गुजर रहा है और यह हर क्षेत्र में है. सिंह ने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी का स्वर्णिम इतिहास रहा था लेकिन वर्तमान की हालत बयां करना भी मुश्किल है. सिंह ने कहा कि बिहार के साथ अन्याय हो रहा है.

उन्होंने कहा, "बिहार के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. केंद्र सरकार उसका हिस्सा नहीं दे रही है. मुख्यमंत्री गिड़गिड़ाते रहे लेकिन पीएम ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की बात अनसुनी कर दी. बंद पड़ी चीनी मिलें नहीं खुल रही हैं."

जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि बिहार को नीतीश कुमार ने दिशा दिखाई है. आलोक ने कहा कि महागठबंधन की अवधारणा नीतीश कुमार ने दी लेकिन वो भ्रष्टाचार के साथ नहीं रह सकते थे.

शिवानंद तिवारी और अखिलेश सिंह से असहमति जताते हुए अजय आलोक ने कहा कि बिहार में किसान आत्महत्या नहीं करते हैं क्योंकि उनकी स्थिति अच्छी है. इस परिचर्चा में बेरोज़गारी की समस्या को लेकर तीनों दलों के नेताओं के बीच अहम मुद्दा रहा. शिवानंद तिवारी ने कहा बेरोज़गारी और खेती-किसानी की समस्या विकराल हो गई है और यह कभी भी विस्फोट कर सकता है.

परिचर्चा को संचालित करते हुए बीबीसी हिन्दी सेवा के संपादक मुकेश शर्मा ने पूछा कि जब कांग्रेस के नेता बुनियादी मुद्दों को उठाते हैं तो लोग पलटकर पूछते हैं कि कांग्रेस दशकों तक केंद्र और राज्यों की सत्ता में रही तब भी ये मुद्दे क्यों नहीं सुलझ पाए?

इस सवाल का अखिलेश सिंह कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए.

पलायन का मुद्दा

इस परिचर्चा में दर्शकों के बीच से बिहार से पलायन का भी सवाल उठा. पलायन के सवाल पर जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि यहां आबादी ज़्यादा है और देश में कोई भी कहीं भी जा सकता है. अजय आलोक ने बिहार से प्रतिभा के पलायन की बात को ख़ारिज कर दिया.

बिहार में बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी में सीटों के बँटवारे की घोषणा हो गई है लेकिन आरजेडी और कांग्रेस में अब भी सीटों का बँटवारा नहीं हो पाया है. अखिलेश सिंह से सीटों के बँटवारे पर सवाल पूछा गया तो वो सवाल को टाल गए.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार रोज़गार के सवाल पर नाकाम रही है इसलिए सवर्णों को आरक्षण देने का शिगूफा छोड़ा है. अजय आलोक से एक लड़की ने पूछा कि आप ट्रक चलाने वालों को रोज़गार से जोड़ रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी उनके घर जाकर देखा कि वो उस रोज़गार से कैसी ज़िंदगी जी रहे हैं? इस सवाल पर लोगों ने ख़ूब तालियां मारीं. अजय आलोक भी इस सवाल कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए.

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में 'क्षेत्रीय पार्टियों का मोर्चा विकल्प क्यों नहीं बन पाता' इस विषय पर चर्चा हुई. इस परिचर्चा में सीपीआई (एमएल) की मीना तिवारी और बीजेपी नेता अमृता भूषण शामिल हुईं.

इस परिचर्चा में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी ज़ोर-शोर से उठा. मुज़फ़्फ़रपुर में एक बालिका गृह की बच्चियों के यौन उत्पीड़न का भी मुद्दा उठा. बीजेपी की अमृता भूषण ने अपनी सरकार की तारीफ़ की तो मीना तिवारी ने सरकार को नाकाम बताया. अमृता भूषण ने कहा कि उनकी सरकार विकास और हिन्दुत्व के लिए काम कर रही है.

दलित-मुसलमान क्या वोट बैंक हैं?

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में 'क्या दलित और मुसलमान इस देश में महज वोट बैंक बनकर रह गए हैं' विषय पर चर्चा हुई. परिचर्चा में बीजेपी नेता संजय पासवान ने कहा कि दलितों का स्वभाव सत्ता को चुनौती देने वाला रहा है.

पासवान ने कहा कि मोदी सरकार ने दलितों के हक़ में कई काम किए हैं. कांग्रेस नेता शकील अहमद ख़ान ने कहा कि आरएसएस ने पिछले 90 सालों में देश में सांप्रदायिकता की जड़ों को मज़बूत किया है इसलिए कई राजनीतिक पार्टियों को लगता है कि मुसलमान चुनाव में खड़ा होगा तो जीत नहीं पाएगा.

क्या दलित और मुस्लिम एक मंच पर आ पाएंगे? इस सवाल के जवाब में अशोक चौधरी ने कहा कि दलितों के बीच ही एक मंच नहीं है और नेतृत्व भी बँटा हुआ है. ऐसे में दलितों और मुसलमानों को एक करना आसान नहीं है.

दर्शकों के बीच से तीखे सवाल

इस परिचर्चा में पटना यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर रहे नवल किशोर चौधरी दर्शक की हैसियत से शामिल हुए और उन्होंने जेडीयू नेता अशोक चौधरी, बीजेपी नेता संजय पासवान और कांग्रेस नेता शकील ख़ान से तीखे सवाल पूछे.

चौधरी ने कहा, ''मैं सवाल पूछ रहा हूं लेकिन जवाब भी पता है. स्कूलों में टीचर नहीं हैं. अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं. अगर हैं तो क्या मंत्रियों के बच्चे वहां जाते हैं या उनका वहां इलाज होता है. मुझसे बिहार के शिक्षा मंत्री मिले तो कहा कि आप बोलते हैं तो डर लगता है. मैं आज आ रहा था तो एक आदमी मेरे पास से गुज़रा. उसने मुझसे पूछा कि सर, क्या मेरा जन्म हिन्दुस्तान में नहीं हुआ है. वो मुसलमान था. आपकी सरकार ये क्यों ने अहसास करा पा रही है कि दलित और मुसलमान भी इसी समाज के हिस्सा हैं. दलितों और मुसलमनों की हैसियत ठीक करने के लिए आर्थिक नीति बदलने की ज़रूरत है. मोदी, मनमोहन सिंह और नीतीश सभी की आर्थिक नीति एक ही है.''

कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनता दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और जेडीयू नेता राजीव रंजन से दर्शकों के बीच बैठे डॉ शकील ने बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जुड़ा सवाल पूछा तो दशर्कों ने ख़ूब ताली मारी. हालांकि डॉ शकील के सवाल पर दोनों नेता पूरी तरह से लाचार दिखे.

बिहार में सांप्रदायिक झड़पों को लेकर भी सवाल उठे. इस पर जेडीयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ रहे हैं और वो ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

दर्शकों के बीच से एक छात्रा ने पूछा ने कि क्या हमारा लोकतंत्र क्या जातितंत्र में तब्दील हो गया है? इस सवाल पर ख़ूब तालियां बजीं. सवाल के जवाब में बिहार से लोकसभा सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि जाति के नाम पर कांग्रेस राजनीति नहीं करती है इसलिए सिमट गई. रंजीत रंजन ने कहा कि वोट विकास के नाम पर पड़ना चाहिए.

पटना की सामाजिक कार्यकर्ता निवेदिता शकील ने मुज़फ़्फ़रपुर के बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं उनके नाम सार्वजनिक करने को लेकर सवाल पूछा. इस पर राजीव रंजन ने कहा मामला कोर्ट में है और इंसाफ़ के लिए इंतज़ार करना चाहिए.

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